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Ambedkar Nagar News: डायग्नोस्टिक लैब में दो वर्ष से स्टाफ की तैनाती का इंतजार
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अंबेडकरनगर। राजकीय पशु चिकित्सालय अकबरपुर परिसर में करीब 60 लाख रुपये खर्च कर बनी पशु चिकित्सा डायग्नोस्टिक लैब दो वर्ष से निष्प्रयोज्य पड़ी है। यहां पर एक चिकित्सक, दो लैब टेक्नीशियन व एक फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो पा रही है। इससे जिले के पशुपालकों को बीमार पशुओं की जांच व समुचित इलाज कराने में मुश्किलें आ रही हैं।
पशुधन व दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई तरह की योजनाएं पशुपालकों के लिए संचालित कर रही है। पशुपालकों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के साथ ही उनके बेहतर व त्वरित उपचार के लिए एंबुलेंस टीम भी काम कर रही है। इन सब के बीच करीब दो वर्ष पहले बनकर विभाग को हैंडओवर हुए अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक लैब को शुरू करने की सुध ही नहीं है।
लाखों की लागत से इस लैब की स्थापना का उद्देश्य पशुओं के गोबर, मूत्र व खून की जांच कर बीमारियों केा पता लगाना व इसके बाद उनका समुचित उपचार करना है। जिले में पहली बार पशुओं की बीमारियों की जांच के लिए बन रहे इस लैब को लेकर पशुपालकों में भी काफी उत्साह था। लेकिन दो वर्ष का समय बीत गया पशु चिकित्सा विभाग लैब के संचालन के लिए स्टाफ की तैनाती ही नहीं कर सका है।
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पशुपालकों ने जताई नाराजगी
पशुओं के उपचार में अहम भूमिका निभाने के उद्देश्य से बनाए गए लैब के शुरू न होने पर पशुपालकों ने नाराजगी जताई है। मरथुआ सरैया के पशुपालक संतराम वर्मा, बूढ़नपुर के महेेश शर्मा व पेठिया के सुरेंद्र त्रिपाठी ने अत्याधुनिक जांच केंद्र को जल्द शुरू कराने की मांग की। कहा कि पशुओं के उपचार के लिए यह काफी उपयोगी साबित होगा। शासन प्रशासन को स्टाफ की तैनाती कर जांच सेवा जल्द शुरू कराना चाहिए।
शासन को भेजा गया पत्र
डायग्नोस्टिक लैब विभाग को हैंडओवर हो चुका है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजने के साथ ही स्टाफ तैनाती के लिए भी पत्र भेजा गया है। स्टाफ की तैनाती होते ही सेवा को सुचारु रूप से शुरू कराया जाएगा। - डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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पशुधन व दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई तरह की योजनाएं पशुपालकों के लिए संचालित कर रही है। पशुपालकों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के साथ ही उनके बेहतर व त्वरित उपचार के लिए एंबुलेंस टीम भी काम कर रही है। इन सब के बीच करीब दो वर्ष पहले बनकर विभाग को हैंडओवर हुए अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक लैब को शुरू करने की सुध ही नहीं है।
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लाखों की लागत से इस लैब की स्थापना का उद्देश्य पशुओं के गोबर, मूत्र व खून की जांच कर बीमारियों केा पता लगाना व इसके बाद उनका समुचित उपचार करना है। जिले में पहली बार पशुओं की बीमारियों की जांच के लिए बन रहे इस लैब को लेकर पशुपालकों में भी काफी उत्साह था। लेकिन दो वर्ष का समय बीत गया पशु चिकित्सा विभाग लैब के संचालन के लिए स्टाफ की तैनाती ही नहीं कर सका है।
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पशुपालकों ने जताई नाराजगी
पशुओं के उपचार में अहम भूमिका निभाने के उद्देश्य से बनाए गए लैब के शुरू न होने पर पशुपालकों ने नाराजगी जताई है। मरथुआ सरैया के पशुपालक संतराम वर्मा, बूढ़नपुर के महेेश शर्मा व पेठिया के सुरेंद्र त्रिपाठी ने अत्याधुनिक जांच केंद्र को जल्द शुरू कराने की मांग की। कहा कि पशुओं के उपचार के लिए यह काफी उपयोगी साबित होगा। शासन प्रशासन को स्टाफ की तैनाती कर जांच सेवा जल्द शुरू कराना चाहिए।
शासन को भेजा गया पत्र
डायग्नोस्टिक लैब विभाग को हैंडओवर हो चुका है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजने के साथ ही स्टाफ तैनाती के लिए भी पत्र भेजा गया है। स्टाफ की तैनाती होते ही सेवा को सुचारु रूप से शुरू कराया जाएगा। - डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी