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सफाई कर्मी की मौत में वायरल हुआ जिला प्रशासन के झूठ का वीडियो
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अंबेडकरनगर। सीएम की सभा के दौरान सफाई कर्मी की मौत मामले में जिला प्रशासन के झूठ का वीडियो वायरल हुआ है। इससे जिला प्रशासन की चौतरफा किरकिरी हो रही। वायरल वीडियो में डीएम राकेश मिश्र साफ साफ कहते देखे जा रहे कि सफाई कर्मी मुख्यमंत्री की ड्यूटी में तैनात नहीं था, जबकि सफाईकर्मी को अस्पताल ले जाए जाने के दौरान उसके गले में पड़े सीएम ड्यूटी पास सहित फोटो पहले ही सावर्जनिक हो चुका है। अब ऐसे में वीडियो सामने आने के बाद अधिकारियों के रवैये को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। कई नागरिकों ने कहा कि यह जिम्मेदार प्रशासन का रवैया नहीं है तो कई अन्य ने कहा कि इस तरह का झूठ बोलने व तथ्यों को गुमराह करने वाले अधिकारियों पर शासन को सीधे कार्रवाई करनी चाहिए।
गौरतलब है कि एक दिन पहले शनिवार को जलालपुर में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हेलीकाप्टर से पहुंचे तो उसी समय ड्यूटी पर तैनात एक सफाई कर्मी सुरेश कन्नौजिया की मौत हो गई थी। प्रशासन ने बताया था कि उसकी मौत मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल से दूर ब्लाक परिसर में बने परित्यक्त पशु अस्पताल से गिरकर हुई, जबकि सफाई कर्मियों का कहना था कि सीएम का हेलीकाप्टर आने के बाद मची भगदड़ में दबकर सफाई कर्मी की जान गई। प्रशासन के अलावा बाकी सबका यही कहना था कि सफाई कर्मी की मौत भगदड़ के चलते हुई है। सफाई कर्मी की मौत की परिस्थिति को लेकर प्रशासन चौतरफा घिरा ही था कि इस बीच डीएम राकेश मिश्र के वायरल हुए एक बयान ने मामले को और तूल पकड़ा दिया है।
दरअसल शनिवार देर शाम डीएम का वीडियो युक्त बयान सामने आया, जिसमें वे सवालों का जवाब देते हए कह रहे कि वह मुख्यमंत्री की ड्यूटी में तैनात नहीं था। वे इसी पर जोर देते रहे कि उसकी मौत सभा स्थल पर नहीं हुई है। डीएम के इसी बयान के बाद से प्रशासन पर तथ्यों को छिपाने और झूठे तथ्य सामने रखने का आरोप लगने लगा है। पूर्व मंत्री शंखलाल मांझी ने कहा कि यदि सफाई कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं था तो उसके पास मुख्यमंत्री ड्यूटी का कार्ड कैसे मौजूद था और उसके नाम का वह कार्ड मौत के बाद तक उसके गले में कैसे पड़ा रहा। कई अन्य नागरिकों ने भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि सफाई कर्मी की सीएम ड्यूटी पास समेत पिक सामने आने के बाद भी जिला प्रशासन जिस तरह का झूठ जनता के सामने रख रहा है। वह अनुचित है। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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अपने ही जाल में उलझा प्रशासन
जिला प्रशासन के अनुसार सफाई कर्मी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की ड्यूटी पर नहीं था। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि सफाई कर्मी के पास उसके नाम का पास मौजूद था तो आखिर वह उसके पास कैसे आया। यदि सफाई कर्मी के पास फर्जी पास था तो आखिर उसे ऐसा करने की जरूरत क्यों थी। सवाल यह भी खड़े हो रहे कि यदि सफाई कर्मी को फर्जी पास बनवाकर कार्यक्रम के अंदर जाना था तो फिर वह पास बनवाने के बाद कार्यक्रम स्थल पर न जाकर उससे कथित तौर पर दूर क्यों बना रहा। इस बात की जांच कौन कराएगा कि यदि सफाई कर्मी के पास मौजूद पास फर्जी था तो ऐसे कितने और लोग थे, जिनके पास इस तरह के फर्जी पास थे।
सवाल यह भी खड़ा हो रहा कि यदि सफाई कर्मी के पास फर्जी पास था तो फर्जी पास बनवाने में लिप्त लोगों के विरुद्ध केस दर्ज करने की पहल प्रशासन कब और कैसे करेगा। सवाल यह भी है कि सफाई कर्मी सुरेश को यदि मुख्यमंत्री कार्यक्रम की ड्यूटी के लिए नहीं बुलाया गया था तो फिर वह जलालपुर ब्लाक मुख्यालय तक कैसे पहुंचा। उसकी ड्यूटी तो जैनापुर गांव में सफाई के लिए है। ऐसे में यदि प्रशासन ने उसे ब्लाक मुख्यालय बुलाया तो बगल स्थित एनडी इंटर कॉलेज में मुख्यमंत्री की सभा के दौरान ऐसी कौन सा विशेष कार्यक्रम था, जिसके चलते उसे ब्लाक में बुलाना पड़ा।
इस मामले में डीएम राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि सफाई कर्मी की मौत मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर नहीं हुई थी और न ही वह उनके लिए किसी ड्यूटी पर तैनात था। मेरे पास यही इतनी जानकारी है। इसके अलावा इस विषय पर और कोई जानकारी देने लायक तथ्य नहीं हैं। हां संबंधित परिवार की मदद नियमानुसार की जा रही है।
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गौरतलब है कि एक दिन पहले शनिवार को जलालपुर में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हेलीकाप्टर से पहुंचे तो उसी समय ड्यूटी पर तैनात एक सफाई कर्मी सुरेश कन्नौजिया की मौत हो गई थी। प्रशासन ने बताया था कि उसकी मौत मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल से दूर ब्लाक परिसर में बने परित्यक्त पशु अस्पताल से गिरकर हुई, जबकि सफाई कर्मियों का कहना था कि सीएम का हेलीकाप्टर आने के बाद मची भगदड़ में दबकर सफाई कर्मी की जान गई। प्रशासन के अलावा बाकी सबका यही कहना था कि सफाई कर्मी की मौत भगदड़ के चलते हुई है। सफाई कर्मी की मौत की परिस्थिति को लेकर प्रशासन चौतरफा घिरा ही था कि इस बीच डीएम राकेश मिश्र के वायरल हुए एक बयान ने मामले को और तूल पकड़ा दिया है।
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दरअसल शनिवार देर शाम डीएम का वीडियो युक्त बयान सामने आया, जिसमें वे सवालों का जवाब देते हए कह रहे कि वह मुख्यमंत्री की ड्यूटी में तैनात नहीं था। वे इसी पर जोर देते रहे कि उसकी मौत सभा स्थल पर नहीं हुई है। डीएम के इसी बयान के बाद से प्रशासन पर तथ्यों को छिपाने और झूठे तथ्य सामने रखने का आरोप लगने लगा है। पूर्व मंत्री शंखलाल मांझी ने कहा कि यदि सफाई कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं था तो उसके पास मुख्यमंत्री ड्यूटी का कार्ड कैसे मौजूद था और उसके नाम का वह कार्ड मौत के बाद तक उसके गले में कैसे पड़ा रहा। कई अन्य नागरिकों ने भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि सफाई कर्मी की सीएम ड्यूटी पास समेत पिक सामने आने के बाद भी जिला प्रशासन जिस तरह का झूठ जनता के सामने रख रहा है। वह अनुचित है। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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अपने ही जाल में उलझा प्रशासन
जिला प्रशासन के अनुसार सफाई कर्मी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की ड्यूटी पर नहीं था। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि सफाई कर्मी के पास उसके नाम का पास मौजूद था तो आखिर वह उसके पास कैसे आया। यदि सफाई कर्मी के पास फर्जी पास था तो आखिर उसे ऐसा करने की जरूरत क्यों थी। सवाल यह भी खड़े हो रहे कि यदि सफाई कर्मी को फर्जी पास बनवाकर कार्यक्रम के अंदर जाना था तो फिर वह पास बनवाने के बाद कार्यक्रम स्थल पर न जाकर उससे कथित तौर पर दूर क्यों बना रहा। इस बात की जांच कौन कराएगा कि यदि सफाई कर्मी के पास मौजूद पास फर्जी था तो ऐसे कितने और लोग थे, जिनके पास इस तरह के फर्जी पास थे।
सवाल यह भी खड़ा हो रहा कि यदि सफाई कर्मी के पास फर्जी पास था तो फर्जी पास बनवाने में लिप्त लोगों के विरुद्ध केस दर्ज करने की पहल प्रशासन कब और कैसे करेगा। सवाल यह भी है कि सफाई कर्मी सुरेश को यदि मुख्यमंत्री कार्यक्रम की ड्यूटी के लिए नहीं बुलाया गया था तो फिर वह जलालपुर ब्लाक मुख्यालय तक कैसे पहुंचा। उसकी ड्यूटी तो जैनापुर गांव में सफाई के लिए है। ऐसे में यदि प्रशासन ने उसे ब्लाक मुख्यालय बुलाया तो बगल स्थित एनडी इंटर कॉलेज में मुख्यमंत्री की सभा के दौरान ऐसी कौन सा विशेष कार्यक्रम था, जिसके चलते उसे ब्लाक में बुलाना पड़ा।
इस मामले में डीएम राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि सफाई कर्मी की मौत मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर नहीं हुई थी और न ही वह उनके लिए किसी ड्यूटी पर तैनात था। मेरे पास यही इतनी जानकारी है। इसके अलावा इस विषय पर और कोई जानकारी देने लायक तथ्य नहीं हैं। हां संबंधित परिवार की मदद नियमानुसार की जा रही है।