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सात करोड़ का लेनदेन प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Tue, 30 Jun 2015 11:34 PM IST
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इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही इसे वापस लेने की घोषणा नहीं की गई, तो बेमियादी हड़ताल शुरू की जाएगी। हड़ताल के चलते लगभग सात करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। हड़ताल की जानकारी न होने पर निकटवर्ती बैंक शाखाओं में पहुंचे खाताधारकों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों ने विभिन्न मागों को लेकर मंगलवार को हड़ताल कर प्रदर्शन किया। इस दौरान बैंकों में ताले लटकते रहे। कामकाज ठप रहा। जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संघ संरक्षक सै. जलाल हैदर ने कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का निजीकरण करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
यह अत्यंत चिंताजनक है। कर्मचारियों के हित को देखते हुए इस प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। यदि निजीकरण किया गया तो बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। कहा कि कर्मचारी पूरी लगन व ईमानदारी से कर्तव्य निभा रहे हैं। इसके बाद भी उनकी उपेक्षा की जा रही है। वक्ताओं ने दसवां वेतनमान लागू करने, पेंशन देनेे, मित्रा कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने की मांग की।
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कहा कि लंबे समय से कर्मचारियों के हित में कोई निर्णय लिया जाए। इस दौरान अनिल पाण्डेय, विवेक तिवारी, राजेश गुप्ता, राकेश आदि मौजूद रहे।
उधर जिले की 45 ग्रामीण बैंक शाखाओं में हड़ताल के चलते लगभग सात करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। हड़ताल की जानकारी न होने पर धननिकासी व जमा करने के लिए निकटवर्ती बैंक शाखाओं में पहुंचे खाताधारकों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
अकबरपुर नगर स्थित बैंक शाखा के बाहर मिले अकबरपुर के राजेश व चंद्रेश ने कहा कि वह धन निकालने के लिए बैंक आए हुए थे। हड़ताल के चलते धन नहीं निकल सका। बताया कि यदि पूर्व में बैंक के बाहर हड़ताल की सूचना लगा दी जाती तो लोगों को दौड़ न लगानी पड़ती।
जाफरगंज बैंक शाखा के बाहर मिले मोहम्मद इलियास व जगदीश ने भी बैंक प्रबंधन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते जानकारी दे दी जाती तो लोगों को परेशान न होना पड़ता।
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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों ने विभिन्न मागों को लेकर मंगलवार को हड़ताल कर प्रदर्शन किया। इस दौरान बैंकों में ताले लटकते रहे। कामकाज ठप रहा। जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संघ संरक्षक सै. जलाल हैदर ने कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का निजीकरण करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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यह अत्यंत चिंताजनक है। कर्मचारियों के हित को देखते हुए इस प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। यदि निजीकरण किया गया तो बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। कहा कि कर्मचारी पूरी लगन व ईमानदारी से कर्तव्य निभा रहे हैं। इसके बाद भी उनकी उपेक्षा की जा रही है। वक्ताओं ने दसवां वेतनमान लागू करने, पेंशन देनेे, मित्रा कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने की मांग की।
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कहा कि लंबे समय से कर्मचारियों के हित में कोई निर्णय लिया जाए। इस दौरान अनिल पाण्डेय, विवेक तिवारी, राजेश गुप्ता, राकेश आदि मौजूद रहे।
उधर जिले की 45 ग्रामीण बैंक शाखाओं में हड़ताल के चलते लगभग सात करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। हड़ताल की जानकारी न होने पर धननिकासी व जमा करने के लिए निकटवर्ती बैंक शाखाओं में पहुंचे खाताधारकों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
अकबरपुर नगर स्थित बैंक शाखा के बाहर मिले अकबरपुर के राजेश व चंद्रेश ने कहा कि वह धन निकालने के लिए बैंक आए हुए थे। हड़ताल के चलते धन नहीं निकल सका। बताया कि यदि पूर्व में बैंक के बाहर हड़ताल की सूचना लगा दी जाती तो लोगों को दौड़ न लगानी पड़ती।
जाफरगंज बैंक शाखा के बाहर मिले मोहम्मद इलियास व जगदीश ने भी बैंक प्रबंधन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते जानकारी दे दी जाती तो लोगों को परेशान न होना पड़ता।