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तीन गांव टापू में तब्दील
अंबेडकरनगर
Updated Tue, 09 Aug 2016 10:58 PM IST
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अंबेडकरनगर के टांडा में मंगलवार को इस तरह आबादी तक पहुंचा सरयू नदी का पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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सरयू नदी का उफान लगातार जारी है। सोमवार से ही जलस्तर में आधा सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि हो रही थी। इसी का नतीजा रहा कि मंगलवार शाम चार बजे जलस्तर 92.80 मीटर दर्ज किया गया, जो कि खतरे के लाल निशान 92.73 मीटर से 7 सेमी अधिक था।
जलस्तर में वृद्धि होने से एक बार फिर से माझा उलटहवा के तीन गांव टापू में बदल गए, जबकि लगभग एक दर्जन गांवों के निकट बाढ़ का पानी पहुंच गया। इसके अलावा नगरीय क्षेत्र के कई मोहल्लों में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से जलभराव की समस्या होने लगी। इससे लोगों को आवागमन में समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि बीते दिनों जलस्तर में वृद्धि के बाद बीते शनिवार से जलस्तर में तेजी से कमी शुरू हो गई थी। रविवार शाम तक जलस्तर खतरे के लाल निशान 92.73 मीटर से लगभग 7 सेमी नीचे पहुंच गया था। इससे निकटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी।
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हालांकि सोमवार सुबह से एक बार फिर से जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई। सोमवार शाम चार बजे जलस्तर खतरे के लाल निशान से ढाई सेमी ऊपर पहुंचकर 92.75 मीटर दर्ज किया गया। प्रति घंटा आधा सेमी जलस्तर में वृद्धि होने लगी।
मंगलवार शाम चार बजे जलस्तर 92.80 मीटर दर्ज किया गया, जो कि खतरे के लाल निशान से 7 सेमी ऊपर था। बाढ़ प्रखंड के अवर अभियंता चिंतामणि शर्मा के अनुसार मंगलवार दोपहर तक जलस्तर स्थिर था, लेकिन दोपहर बाद फिर से बढ़ने लगा। शाम चार बजे 92.80 मीटर दर्ज किया गया।
उधर जलस्तर में वृद्धि होने के चलते एक बार फिर से माझा उलटहवा के तीन गांव दिलशेर का पूरा, जालिम का पूरा व बाबूराम का पूरा टापू में बदल गए। संबंधित गांवों के ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इसके अलावा माझा कला, माझज्ञ अवसानपुर, माझा इस्माइलपुर बेलदहा, माझा छज्जापुर, माझा करमपुर बरसावां, माझा मुबारकपुर समेत एक दर्जन से अधिक के निकट बाढ़ का पानी पहुंच गया। संबंधित गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन से आवश्यक सुविधाएं समय रहते उपलब्ध कराए जाने की मांग की।
जलस्तर बढ़ने से नाले व नालियों से सुचारु रूप से जलनिकासी नहीं हो पा रही है। इससे नगर के नेहरूनगर, कश्मीरिया नई बस्ती, मेहनिया, छज्जापुर में जगह-जगह जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने लगी है। इससे लोगों को आवागमन में व्यापक समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
उधर एसडीएम पंकज ने बताया कि प्रशासन जलस्तर पर लगातार नजर रखे हुए है। बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए संबंधित क्षेत्र में 14 नावों को उतारा गया है।
सभी नौ बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया गया है। शरणालयों पर भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।
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जलस्तर में वृद्धि होने से एक बार फिर से माझा उलटहवा के तीन गांव टापू में बदल गए, जबकि लगभग एक दर्जन गांवों के निकट बाढ़ का पानी पहुंच गया। इसके अलावा नगरीय क्षेत्र के कई मोहल्लों में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से जलभराव की समस्या होने लगी। इससे लोगों को आवागमन में समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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गौरतलब है कि बीते दिनों जलस्तर में वृद्धि के बाद बीते शनिवार से जलस्तर में तेजी से कमी शुरू हो गई थी। रविवार शाम तक जलस्तर खतरे के लाल निशान 92.73 मीटर से लगभग 7 सेमी नीचे पहुंच गया था। इससे निकटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी।
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हालांकि सोमवार सुबह से एक बार फिर से जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई। सोमवार शाम चार बजे जलस्तर खतरे के लाल निशान से ढाई सेमी ऊपर पहुंचकर 92.75 मीटर दर्ज किया गया। प्रति घंटा आधा सेमी जलस्तर में वृद्धि होने लगी।
मंगलवार शाम चार बजे जलस्तर 92.80 मीटर दर्ज किया गया, जो कि खतरे के लाल निशान से 7 सेमी ऊपर था। बाढ़ प्रखंड के अवर अभियंता चिंतामणि शर्मा के अनुसार मंगलवार दोपहर तक जलस्तर स्थिर था, लेकिन दोपहर बाद फिर से बढ़ने लगा। शाम चार बजे 92.80 मीटर दर्ज किया गया।
उधर जलस्तर में वृद्धि होने के चलते एक बार फिर से माझा उलटहवा के तीन गांव दिलशेर का पूरा, जालिम का पूरा व बाबूराम का पूरा टापू में बदल गए। संबंधित गांवों के ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इसके अलावा माझा कला, माझज्ञ अवसानपुर, माझा इस्माइलपुर बेलदहा, माझा छज्जापुर, माझा करमपुर बरसावां, माझा मुबारकपुर समेत एक दर्जन से अधिक के निकट बाढ़ का पानी पहुंच गया। संबंधित गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन से आवश्यक सुविधाएं समय रहते उपलब्ध कराए जाने की मांग की।
जलस्तर बढ़ने से नाले व नालियों से सुचारु रूप से जलनिकासी नहीं हो पा रही है। इससे नगर के नेहरूनगर, कश्मीरिया नई बस्ती, मेहनिया, छज्जापुर में जगह-जगह जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने लगी है। इससे लोगों को आवागमन में व्यापक समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
उधर एसडीएम पंकज ने बताया कि प्रशासन जलस्तर पर लगातार नजर रखे हुए है। बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए संबंधित क्षेत्र में 14 नावों को उतारा गया है।
सभी नौ बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया गया है। शरणालयों पर भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।