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Ambedkar Nagar News: सीबीआई अधिकारी बनकर धमकाया, ठगने का प्रयास
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जलालपुर। कटका इलाके में साइबर ठगों ने रिटायर्ड मेडिकल अफसर को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताकर लाखों रुपये ठगने की कोशिश की। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाकर बैंक खाते में जमा पूरी रकम अपने बताए खाते में ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया। हालांकि समय रहते पीड़ित को ठगी का अंदेशा हो गया और उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
कटका क्षेत्र के मसौड़ा सैदही निवासी एवं सेवानिवृत्त मेडिकल अफसर रविंद्र कुमार ने बताया कि 18 से 20 जुलाई के बीच उनके मोबाइल पर कई कॉल आए। कॉल करने वालों ने खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताया। उनसे कहा गया कि उनके नाम से मुंबई के विशाल टावर पते पर एक सिम जारी है, जिसका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हुआ है और इस संबंध में मुंबई क्राइम ब्रांच में प्राथमिकी दर्ज है।
इसके बाद कॉल को कथित वर्दीधारी आईपीएस अधिकारी से जोड़ दिया गया। पूछताछ के दौरान उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर मुंबई के केनरा बैंक में एक खाता है, जिसमें 24 लोगों ने 2.24 करोड़ रुपये जमा किए हैं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उनके खाते में 25 लाख रुपये कमीशन भेजे गए हैं।
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ठगों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए रविंद्र कुमार पर दबाव बनाया कि वे अपनी एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, पोस्ट ऑफिस की किसान विकास पत्र सहित सभी निवेश तोड़कर रकम बैंक खाते में जमा करें। ठगों ने झांसा दिया कि आरबीआई जांच के बाद यदि वे निर्दोष पाए गए तो पूरी रकम क्षतिपूर्ति के साथ वापस कर दी जाएगी। इसके लिए व्हाट्सएप पर भी एक मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया गया। हालांकि वह समय रहते ठगी की साजिश समझ गए और बात करना बंद कर दिया।
कटका थाना प्रभारी अक्षय कुमार पटेल ने बताया कि साइबर अपराधी लगातार खुद को सीबीआई, पुलिस, दूरसंचार विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तत्काल स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
ऐसे करें साइबर ठगी से बचाव
खुद को सीबीआई, पुलिस या सरकारी अधिकारी बताने वाले अनजान कॉल पर भरोसा न करें।
फोन या वीडियो कॉल पर किसी भी प्रकार की डिजिटल गिरफ्तार के दावे से सावधान रहें।
बैंक खाता, ओटीपी, एटीएम, यूपीआई पिन या आधार संबंधी जानकारी किसी से साझा न करें।
किसी के कहने पर निवेश या बैंक खाते की राशि दूसरे खाते में ट्रांसफर न करें।
संदेह होने पर कॉल काटकर संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से सत्यापन करें।
साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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कटका क्षेत्र के मसौड़ा सैदही निवासी एवं सेवानिवृत्त मेडिकल अफसर रविंद्र कुमार ने बताया कि 18 से 20 जुलाई के बीच उनके मोबाइल पर कई कॉल आए। कॉल करने वालों ने खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताया। उनसे कहा गया कि उनके नाम से मुंबई के विशाल टावर पते पर एक सिम जारी है, जिसका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हुआ है और इस संबंध में मुंबई क्राइम ब्रांच में प्राथमिकी दर्ज है।
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इसके बाद कॉल को कथित वर्दीधारी आईपीएस अधिकारी से जोड़ दिया गया। पूछताछ के दौरान उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर मुंबई के केनरा बैंक में एक खाता है, जिसमें 24 लोगों ने 2.24 करोड़ रुपये जमा किए हैं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उनके खाते में 25 लाख रुपये कमीशन भेजे गए हैं।
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ठगों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए रविंद्र कुमार पर दबाव बनाया कि वे अपनी एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, पोस्ट ऑफिस की किसान विकास पत्र सहित सभी निवेश तोड़कर रकम बैंक खाते में जमा करें। ठगों ने झांसा दिया कि आरबीआई जांच के बाद यदि वे निर्दोष पाए गए तो पूरी रकम क्षतिपूर्ति के साथ वापस कर दी जाएगी। इसके लिए व्हाट्सएप पर भी एक मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया गया। हालांकि वह समय रहते ठगी की साजिश समझ गए और बात करना बंद कर दिया।
कटका थाना प्रभारी अक्षय कुमार पटेल ने बताया कि साइबर अपराधी लगातार खुद को सीबीआई, पुलिस, दूरसंचार विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तत्काल स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
ऐसे करें साइबर ठगी से बचाव
खुद को सीबीआई, पुलिस या सरकारी अधिकारी बताने वाले अनजान कॉल पर भरोसा न करें।
फोन या वीडियो कॉल पर किसी भी प्रकार की डिजिटल गिरफ्तार के दावे से सावधान रहें।
बैंक खाता, ओटीपी, एटीएम, यूपीआई पिन या आधार संबंधी जानकारी किसी से साझा न करें।
किसी के कहने पर निवेश या बैंक खाते की राशि दूसरे खाते में ट्रांसफर न करें।
संदेह होने पर कॉल काटकर संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर से सत्यापन करें।
साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।