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चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद में यहां भी हुई जमकर मनमानी

Sun, 06 Sep 2020 10:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2020 10:27 PM IST
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There was also irregularity in the purchase of medical equipment here
अंबेडकरनगर। आपदा में अवसर खोजने का काम शातिरों ने अंबेडकरनगर जनपद में भी कर लिया। कोविड संक्रमण से बचाव के लिए कई ग्राम पंचायत में मनमाने ढंग से पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर खरीद लिए गए। शासनादेश के अनुसार दोनों की निर्धारित कीमत 2800 रुपए है लेकिन दर्जनों ग्राम पंचायतों में इसके लिए साढ़े तीन से लेकर 15 हजार तक की खरीददारी कर लिए जाने की खबर है।
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इस मनमानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले के सभी नौ विकास खंड मुख्यालयों को इसकी कोई सूचना ही नहीं है कि ग्राम पंचायतों में किस दर पर इन सामान की खरीददारी की गई। जानकारों का कहना है कि यदि इन दोनों सामान की खरीददारी का उच्च स्तरीय सत्यापन करा लिया जाए तो बड़ी धांधली का पर्दाफाश हो सकता है।
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गौरतलब है कि कोविड संक्रमण से बचाव के लिए राज्य सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक पल्स ऑक्सीमीटर तथा इंफ्रारेड थर्मामीटर उपलब्ध कराने का निर्देश 25 जून को दिया था। कहा गया था कि इसका भुगतान ग्राम पंचायतों के जरिये कराया जाए। शासन स्तर से यह भी निर्देश है कि ये सामान खरीदकर ग्राम पंचायत में तैनात आशा बहू को दिये जाएं जिससे कोरोना फैलने की आशंका को कम किया जा सके।
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शासन के इसी निर्देश के बाद आपदा में अवसर तलाशने का खेल शुरू हो गया। जिला पंचायत राज अधिकारी की तरफ से सभी नौ ब्लाकों को निर्देश दिए गए कि अविलंब पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीददारी कर ली जाए। निर्देश निर्गत होने के बाद बताया जाता है कि कई तरह के रैकेट सक्रिय हो गए। नतीजतन कई ग्राम पंचायतों में मनमाने दर पर ये दोनों सामान खरीद लिए गये। दोनों सामन के लिए शासन की तरफ से 2800 रुपये की दर निर्धारित की गई लेकिन खबर है कि कई ग्राम पंचायतों में साढ़े तीन से लेकर 10 हजार रुपये से भी अधिक कीमत पर इन सामान की खरीददारी हो गई।
जहांगीरगंज ब्लॉक के बनकटा बुजुर्ग गांव में दोनों सामान की खरीददारी पर लगभग छह हजार खर्च कर दिये गये। टांडा से खबर है कि कई ग्राम पंचायतों में सात से लेकर 10 हजार से अधिक का भुगतान किया गया। जलालपुर, बसखारी व भीटी ब्लॉकों में भी शासन द्वारा निर्धारित दर से अधिक पर कई ग्राम पंचायत ने खरीददारी किए जाने की जानकारी मिली है।
पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर खरीद में किस तरह की मनमानी बरती गई है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई ब्लॉक मुख्यालयों को यह जानकारी ही नहीं है कि ग्राम पंचायतों में सामानों की खरीददारी का डिटेल क्या है। जिला पंचायत राज अधिकारी की तरफ से 10 जुलाई को सभी बीडीओ तथा सहायक विकास अधिकारियों को इन सामान की खरीददारी के लिए पत्र निर्गत किया गया था। इसमें स्पष्ट तौर पर निर्देश था कि खरीददारी तीन दिनों में कर ली जाए एवं इस आशय का प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया जाए।
लगभग दो माह बाद भी ब्लॉक मुख्यालयों पर इस तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हो पायी है कि किन किन ग्राम पंचायतों में खरीददारी की गई और किस किस दर पर यह खरीददारी हुई। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जब शासन स्तर से दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं और समयबद्धता तय की जा रही है तो भी तीन दिन के भीतर पूरा कर लिए जाने वाला काम दो माह बाद तक अधूरा पड़ा है। जानकारों का कहना है कि ऐसा इसलिए क्योंकि इस पूरे मामले में कई स्तर पर गड़बड़झाला है।
जल्लापुर के ग्राम प्रधान सोमप्रकाश ने बताया कि ब्लॉक मुख्यालय पर सामान आने की खबर मिली है। संबंधित आशा बहू को इस बारे में बता दिया गया है। खरीददारी कहां से और कैसे हुई यह जानकारी मुझे नहीं है। सामान का रेेट भी मुझे नहीं पता। हरदिया जलाल के ग्राम प्रधान संजय ने बताया कि हमें कोई जानकारी नहीं है। हो सकता है ब्लॉक कार्यालय से सीधे आशा बहू को सामान का भुगतान कर दिया गया हो। उनसे पूछा गया कि इन सामान की खरीददारी तो ग्राम पंचायत निधि से होनी थी। ऐसे में आपको खबर कैसे नहीं है।
उन्होंने बताया कि मुझे खरीददारी व भुगतान के बारे में कोई जानकारी नहीं है। कई ग्राम पंचायत अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमें सामान उपलब्ध करा दिए गए थे। भुगतान करने का निर्देश था। जिसे कराया गया है। कई ग्राम प्रधानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमें सिर्फ यह बताया गया कि दो उपकरण खरीदे जाने हैं, जिसे आशा बहुओं को उपलब्ध करा दिया गया है। सामान खरीद उठा है, इसकी जानकारी तब मिली, जब उसका बिल प्राप्त हुआ।

डीपीआरओ शेषदेव पांडेय ने बताया कि ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीददारी के निर्देश पूर्व में ही दिए गए थे। इनकी नियमानुसार खरीददारी लगभग पूरी हो चुकी है। कहीं से कोई शिकायत नहीं है। प्रशासन का पूरा फोकस कोरोना संक्रमण रोकने पर है। जिले में इसमें काफी सफलता भी मिली है। हालांकि यदि चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद में कहीं से भी गड़बड़ी की शिकायत जानकारी मिली तो जांच कराकर कार्रवाई होगी।
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