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थाने में तड़पता रहा युवक, नहीं पसीजे पुलिसकर्मी

Fri, 26 Mar 2021 11:11 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Mar 2021 11:11 PM IST
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The young man kept torturing in the police station, policeman did not sweat
अंबेडकरनगर जिला अस्पताल में मृतक जियाद्दीन के परिजन से वार्ता करते कोतवाल अकबरपुर। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। पुलिस हिरासत में जियाउद्दीन की मौत के मामले में पुलिस कर्मियों की संवेदनहीनता सामने आई है। चौंकाने वाली खबर मिली है कि कड़ी पूछताछ कर स्वाट टीम के चले जाने के बाद जियाउद्दीन की हालत जिला मुख्यालय से लगभग बीस किलोमीटर दूर के एक थाने में शुक्रवार की रात बिगड़ गई थी। संबंधित थाना प्रभारी ने इसके बावजूद उसे तत्काल अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नहीं महसूस की। नतीजा यह हुआ कि जियाउद्दीन काफी देर तक थाने में ही तड़पता रहा। थाना प्रभारी ने सिर्फ स्वाट टीम को फोन कर यह संदेश दे दिया कि जियाउद्दीन की हालत बिगड़ रही है। आकर उसे ले जाओ। इसके काफी देर बाद पहुंची स्वाट टीम ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी। भर्ती कराने के कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई।
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आजमगढ़ के पवई निवासी जियाउद्दीन (36) की मौत मामले में लापरवाही व संवेदनहीनता सिर्फ स्वाट टीम ने ही नहीं बरती। जिला मुख्यालय से बीस किलोमीटर दूर स्थित जिस थाने में ले जाकर स्वाट टीम ने जियाउद्दीन से पूछताछ की थी, वहां के पुलिस कर्मी भी कम जिम्मेदार नहीं है। विश्वस्त सूत्रों से खबर मिली है कि जियाउद्दीन को स्वाट टीम ने पवई क्षेत्र से पकड़कर लाने के बाद उसे जिला मुख्यालय से लगभग बीस किलोमीटर दूर स्थित एक थाने में रखा था। यह थाना मुख्य मार्ग से थोड़ा हटकर ग्रामीण क्षेत्र में है। इसीलिए उसे वहां रखा गया था।
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बताया जाता है कि स्वाट टीम के सदस्य जब पूछताछ कर संबंधित थाने से चले आए तो जियाउद्दीन की हालत बिगड़ गई। इस पर संबंधित थाने के प्रभारी व अन्य पुलिस कर्मियों ने उसके त्वरित उपचार पर ध्यान नहीं दिया। वह थाने में ही दर्द से कराहता रहा। संवेदनहीन बने थाने के पुलिसकर्मी उसकी कराह के बाद भी मुंह मोड़कर अपना काम करते रहे। कुछ देर बाद थाना प्रभारी ने स्वाट टीम के सदस्यों को फोन कर कहा कि आकर अपनी बला ले जाओ। इसकी तबियत तेजी से खराब हो रही है। इतना बताकर थाना प्रभारी ने भी अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। काफी देर बाद स्वाट टीम के सदस्य थाने पहुंचे और उसे ले जाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
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यहां यह जिक्र करना जरूरी है कि यदि संबंधित थाने के पुलिस कर्मियों ने जियाउद्दीन की हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया होता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि जियाउद्दीन की हालत अचानक इतनी नहीं खराब हुई होगी कि कुछ देर में उसकी मौत हो जाए। ऐसे में यदि यह मान भी लिया जाए कि स्वाट टीम ने पिटाई नहीं की तो बड़ा सवाल यह कि पूछताछ के दौरान उसने जियाउद्दीन की हालत का ख्याल क्यों नहीं रखा। इन सब के बीच सबसे बड़ी बात यह है कि जियाउद्दीन के छोटे भाई शहाबुद्दीन के अनुसार उसके भाई को कोई भी बीमारी नहीं थी। न ही उसका कोई उपचार चल रहा था।
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