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24 हजार बच्चों का वजन औसत से काफी कम
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अंबेडकरनगर। तमाम कोशिशों के बाद भी जिले में बच्चों को कुपोषण के दंश से बचाने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। इसके चलते ही जिले में मौजूदा समय में कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों की संख्या का आंकड़ा 24,036 तक पहुंच गया है। 2,551 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत 2.22 लाख बच्चों के वजन के बाद सामने आए कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को इस दंश से छुटकारा दिलवाने की कवायद शुरू की गयी है। इसके तहत इन बच्चों को केंद्र से मिलने वाले खाद्यान्न की मात्रा को बढ़ा कर उन्हें अलग से पौष्टिक सामग्री भी मुहैया करायी जा रही है।
इस संबंध में आंगनबाड़ी कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि यदि कोई बच्चा अतिकुपोषित श्रेणी से भी नीचे हो, तो उसका समुचित इलाज जिला अस्पताल में सुनिश्चित कराया जाए। बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। तमाम कोशिशों के बाद भी बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने की मंशा परवान नहीं चढ़ पा रही है।
बीते जून माह में अभियान चलाकर करीब दो लाख बच्चों का वजन किया गया था। इसमें से 1.74 लाख बच्चे ही सामान्य श्रेणी में पाए गए थे। जबकि 18391 बच्चे कुपोषित और 5645 अतिकुपोषित श्रेणी में चिह्नित हुए थे। इन बच्चों को अब कुपोषण मुक्त बनाने के लिए संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों से खाद्यान्न बढ़ाकर दिया जा रहा है। इस दौरान यदि कोई बच्चा अतिकुपोषित की श्रेणी से नीचे मिला तो उसे समुचित इलाज के लिए अस्पताल में भी भर्ती कराया जाएगा।
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दिया जा रहा विशेष ध्यान
कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए सभी आंगनबाड़ी कर्मचारियों को इनका विशेष तौर पर ध्यान रखने का निर्देश दिया गया है। ऐसे बच्चों को डेढ़ किग्रा दलिया, डेढ़ किग्रा. चावल, दो किग्रा. चना दाल, 455 ग्राम खाद्य तेल दिया जा रहा है। जल्द ही ऐसे बच्चों को पूरी तरह कुपोषण मुक्त बनाया जाएगा। -दिनेश कुमार मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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इस संबंध में आंगनबाड़ी कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि यदि कोई बच्चा अतिकुपोषित श्रेणी से भी नीचे हो, तो उसका समुचित इलाज जिला अस्पताल में सुनिश्चित कराया जाए। बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। तमाम कोशिशों के बाद भी बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने की मंशा परवान नहीं चढ़ पा रही है।
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बीते जून माह में अभियान चलाकर करीब दो लाख बच्चों का वजन किया गया था। इसमें से 1.74 लाख बच्चे ही सामान्य श्रेणी में पाए गए थे। जबकि 18391 बच्चे कुपोषित और 5645 अतिकुपोषित श्रेणी में चिह्नित हुए थे। इन बच्चों को अब कुपोषण मुक्त बनाने के लिए संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों से खाद्यान्न बढ़ाकर दिया जा रहा है। इस दौरान यदि कोई बच्चा अतिकुपोषित की श्रेणी से नीचे मिला तो उसे समुचित इलाज के लिए अस्पताल में भी भर्ती कराया जाएगा।
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दिया जा रहा विशेष ध्यान
कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए सभी आंगनबाड़ी कर्मचारियों को इनका विशेष तौर पर ध्यान रखने का निर्देश दिया गया है। ऐसे बच्चों को डेढ़ किग्रा दलिया, डेढ़ किग्रा. चावल, दो किग्रा. चना दाल, 455 ग्राम खाद्य तेल दिया जा रहा है। जल्द ही ऐसे बच्चों को पूरी तरह कुपोषण मुक्त बनाया जाएगा। -दिनेश कुमार मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी