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Balrampur News: बेला गांव के 80 घरों पर गहराया कटान का संकट
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बलरामपुर के बेला गांव के पास कटान रही राप्ती नदी ।-फाइल फोटो
महराजगंज तराई (बलरामपुर)। तुलसीपुर तहसील स्थित बेला गांव के 80 घरों पर कटान का संकट मंडरा रहा है। पेड़ों की टहनियों को बांस के सहारे बांधकर ग्रामीण कटान रोकने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन राप्ती नदी की कटान को रोकने का प्रयास सफल नहीं हो पा रहा है। कटान से परेशान ग्रामीणों ने कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है। बीते वर्ष गांव के 10 किसानों की 50 बीघे जमीन कटान से राप्ती में समाहित हो गई थी। इस बार भी किसान चिंतित हैं।
ग्राम पंचायत बेला के प्रधान प्रतिनिधि उमेश यादव, अजय कुमार पांडेय, कृष्ण मोहन, राम नरेश, त्रिभुवन व विजय राज ने बताया कि उनके गांव पर राप्ती नदी के कटान का संकट बढ़ गया है। राप्ती नदी कटान करते-करते गांव के पास पहुंच गई है। किसानों की 50 बीघे से अधिक जमीन नदी में समा चुकी है।
2023 से ग्रामीण प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि तमाम मांग के बाद भी बेला गांव के पास अभी तक कटानरोधी कार्य शुरू नहीं कराया गया है। कटान बढ़ने पर बेला गांव का अस्तित्व राप्ती नदी में विलीन हो जाएगा। ग्रामीणों ने पेड़ों की टहनियों को बांस के सहारे बांधकर कटान रोकने का प्रयास किया, लेकिन बाढ़ आने पर पेड़ों की टहनियां बह जाती हैं और फिर से कटान शुरू हो जाता है।
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बरसात से पहले कटानरोधी कार्य कराने का निर्देश
राप्ती नदी किनारे बसे बेला गांव के लोगों ने कटानरोधी कार्य के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। बाढ़ खंड के अधिकारियों को जांच करके कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
-राकेश कुमार जयंत, एसडीएम तुलसीपुर
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ग्राम पंचायत बेला के प्रधान प्रतिनिधि उमेश यादव, अजय कुमार पांडेय, कृष्ण मोहन, राम नरेश, त्रिभुवन व विजय राज ने बताया कि उनके गांव पर राप्ती नदी के कटान का संकट बढ़ गया है। राप्ती नदी कटान करते-करते गांव के पास पहुंच गई है। किसानों की 50 बीघे से अधिक जमीन नदी में समा चुकी है।
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2023 से ग्रामीण प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि तमाम मांग के बाद भी बेला गांव के पास अभी तक कटानरोधी कार्य शुरू नहीं कराया गया है। कटान बढ़ने पर बेला गांव का अस्तित्व राप्ती नदी में विलीन हो जाएगा। ग्रामीणों ने पेड़ों की टहनियों को बांस के सहारे बांधकर कटान रोकने का प्रयास किया, लेकिन बाढ़ आने पर पेड़ों की टहनियां बह जाती हैं और फिर से कटान शुरू हो जाता है।
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बरसात से पहले कटानरोधी कार्य कराने का निर्देश
राप्ती नदी किनारे बसे बेला गांव के लोगों ने कटानरोधी कार्य के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। बाढ़ खंड के अधिकारियों को जांच करके कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
-राकेश कुमार जयंत, एसडीएम तुलसीपुर