{"_id":"6a1dbd2ff14563a9670cb5c8","slug":"the-plea-for-discharge-of-the-accused-in-molesting-a-teenage-girl-was-rejected-ambedkar-nagar-news-c-91-brp1007-157597-2026-06-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: किशोरी से छेड़छाड़ के आरोपी की डिस्चार्ज अर्जी खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: किशोरी से छेड़छाड़ के आरोपी की डिस्चार्ज अर्जी खारिज
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। विशेष पॉक्सो न्यायालय ने शादी का झांसा देकर किशोरी से छेड़छाड़ और लैंगिक उत्पीड़न के आरोप में नामजद आरोपी तौसीफ अहमद को राहत देने से इन्कार कर दिया है। न्यायालय ने आरोपी की ओर से दायर उन्मोचन (डिस्चार्ज) प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए कहा कि उसके विरुद्ध आरोप तय किए जाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं।
मामला थाना टांडा क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़िता की तहरीर पर तौसीफ अहमद के खिलाफ छेड़छाड़ व पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। आरोपी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया है। पीड़िता बालिग है और पॉक्सो एक्ट की धाराएं लागू नहीं होती हैं। साथ ही एफआईआर में देरी, कथित विरोधाभास और विवेचना पर भी सवाल उठाए गए थे।
न्यायालय ने केस डायरी, पीड़िता के बयानों तथा अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2016 में नाबालिग रहने के दौरान आरोपी ने शादी का भरोसा देकर उससे संपर्क बढ़ाया। बाद में शादी का रिश्ता तय होने के बावजूद आरोपी ने विवाह से इन्कार कर दिया।
विज्ञापन
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मोहन कुमार ने अपने आदेश में कहा कि आरोप तय करने के चरण में केवल यह देखा जाता है कि अभियोजन के पास प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री है या नहीं। इस स्तर पर बचाव पक्ष के तर्कों की विस्तृत जांच नहीं की जा सकती।
विज्ञापन
मामला थाना टांडा क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़िता की तहरीर पर तौसीफ अहमद के खिलाफ छेड़छाड़ व पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। आरोपी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया है। पीड़िता बालिग है और पॉक्सो एक्ट की धाराएं लागू नहीं होती हैं। साथ ही एफआईआर में देरी, कथित विरोधाभास और विवेचना पर भी सवाल उठाए गए थे।
विज्ञापन
न्यायालय ने केस डायरी, पीड़िता के बयानों तथा अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2016 में नाबालिग रहने के दौरान आरोपी ने शादी का भरोसा देकर उससे संपर्क बढ़ाया। बाद में शादी का रिश्ता तय होने के बावजूद आरोपी ने विवाह से इन्कार कर दिया।
विज्ञापन
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मोहन कुमार ने अपने आदेश में कहा कि आरोप तय करने के चरण में केवल यह देखा जाता है कि अभियोजन के पास प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री है या नहीं। इस स्तर पर बचाव पक्ष के तर्कों की विस्तृत जांच नहीं की जा सकती।