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रस्म अदायगी बन कर रह गया आरोग्य मेला
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अंबेडकरनगर के बड़ेपुर अस्पताल में मरीजों का इंतजार करते चिकित्सक।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। सरकारी अस्पतालों में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला सिर्फ रस्मी बनकर रह गया है। नौ माह के लंबे अंतराल के बाद जब से दोबारा अस्पतालों में मेले का आयोजन शुरू हुआ, तब से आयोजन के उद्देश्य सफल होते नहीं दिख रहे हैं। इस रविवार को भी आयोजित जन आरोग्य मेले में आम तौर पर सन्नाटा ही पसरा रहा। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद जांच आदि के कार्य परवान नहीं चढ़ पा रहे हैं तो वहीं मरीजों की भी समुचित आमद नहीं हो पा रही है।
अमर उजाला ने कई अस्पतालों का जायजा लिया तो मनमानी का आलम दिखा। मेेले में खून की जांच के लिए पहुंचे मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। गर्भवती समेत बच्चों की जांच भी इन मेलों में नहीं हो सकी। मनमानी यह कि मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए आशाओं व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मरीज के तौर पर इलाज किया गया। एक मेले में मरीज को एक ही मर्ज के लिए एलोपैथिक व होम्योपैथिक दोनों तरह की दवाएं थमा दी गई। उसका नाम दोनों जगह दर्ज कर लिया गया। जाहिर तौर पर इसी तरह का काम अन्य जगहों पर भी किया जाता होगा।
मेलों में इन मनमानी को रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व वरिष्ठ अफसरों का स्पष्ट निर्देश है कि शिविर का अनिवार्य रूप से जायजा अपर मुख्य चिकित्साधिकारी व उपमुख्य चिकित्साधिकारियों द्वारा लिया जाए। इसके बावजूद रविवार को किसी भी अस्पताल में इन अधिकारियों की ओर से कोई औचक निरीक्षण करने की खबर सामने नहीं आ सकी। इन्हीं सब के चलते इलाज के नाम पर मनमानी का बोलबाला दिखा। भीटी प्रतिनिधि के अनुसार स्थानीय सीएचसी में 72 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। पेश है अमर उजाला टीम द्वारा अस्पतालों के किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट।
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जांच को पहुंचे मरीज हुए निराश
जलालपुर में अरबन सेंटर में आयोजित मेले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से मरीजों में निराशा दिखाई पड़ी। अपरान्ह एक बजे तक यहां एलोपैथ के 58, आयुर्वेद के 36 व होम्योपैथ के 25 मरीज पहुंचे थे। इनका उपचार चिकित्सकों ने सुनिश्चित किया। हालांकि उपचार सिर्फ परामर्श व चंद दवाओं के वितरण तक ही सीमित रहा। ब्लड टेस्ट कराने पहुंचे मरीजों को निराशा हाथ लगी, जबकि ऐसे शिविर में तमाम तरह की जांच प्राथमिकता के साथ कराने के निर्देश हैं। इसके बावजूद सामान्य किस्म की जांच कराने की सुध नहीं दिखी। हजपुरा क्षेत्र के बड़ेपुर अस्पताल में कुल 83 मरीज देखे गए। यहां भी जांच कराने पहुंचे मरीजों को निराशा ही हाथ लगी।
डॉक्टर थे छह, मरीज सिर्फ 20
जिला मुख्यालय स्थित अकबरपुर संयुक्त चिकित्सालय में लगे मेले में सन्नाटे का माहौल रहा। यहां मरीजों की उपस्थिति तय करने की चिंता नहीं दिखी। मौके पर 6 डॉक्टर मौजूद थे। दोपहर सवा बारह बजे तक सिर्फ 20 मरीज यहां पहुुंच सके थे। स्थानीय दिलीप ने कहा कि यहां इसी तरह का माहौल रहता है। चिकित्सक औपचारिकता निभाने के लिए आते हैं। इसके बाद वे वापस लौट जाया करते हैं। इलाज की बजाए सिर्फ टाइम पास किया जाता है।
पहले एलोपैथ फिर थमाई होम्योपैथी दवा
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नरियांव का जायजा लेने टीम पहुंची तो वहां अजीब की तरह मनमानी पकड़ में आई। गैस्ट्रो से संबंधित मरीज रमाकांत पांडेय मिले। उन्हें पहले एलोपैथ का पर्चा बनाकर दवा दी गई। इसके बाद होम्योपैथ कर्मियों ने भी रजिस्टर में नाम दर्ज कर दवा थमा दी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए किस तरह का काम इन शिविरों में किया जा रहा है। यहां मरीजों की कतार में कई स्वास्थ्य कर्मचारी दिखाई दिए। आशा बहू से लेकर एएनएम तक मरीज के तौर पर उपचार कराती दिखीं। दोपहर साढ़े बारह बजे तक होम्योपैथ के 7, आयुर्वेद के 8 तथा एलोपैथ के 17 मरीज अपना उपचार करा चुके थे। कई स्थानीय नागरिकों ने कहा कि पर्याप्त प्रचार प्रसार हो और बेहतर ढंग से इलाज सुनिश्चित किया जाए तो निश्चित रूप से मरीजों की संख्या यहां बढ़ेगी।
न पर्याप्त दवाएं थीं और न ही स्टाफ
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अशरफपुर बरवां, औरंगनगर व नसीरपुर में आरोग्य मेले का आयोजन तो हुआ, लेकिन हर मर्ज का इलाज चंद दवाओं के भरोसे होता दिखा। न तो पर्याप्त दवाएं थीं और न ही समुचित स्टाफ। मरीज रमेश कुमार, राकेश, शिवशंकर व कुसुम आदि ने बताया कि पर्याप्त दवाएं कैंप में नहीं थीं। किसी तरह की जांच की सुविधा भी मुहैया नहीं कराई गई। सिर्फ इलाज के नाम पर रस्म अदायगी की गई। मरीजों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार का जो निर्देश है, उसके अनुरूप आयोजन न कर सिर्फ लकीर पीटी जा रही है।
रामनगर पहुंचे सिर्फ 25 मरीज
आलापुर के लखनी पट्टी में 170 मरीज पहुंचे। यहां चिकित्सक चेतन शर्मा व अन्य ने मरीजों का उपचार किया। उन्हें दवाएं दीं। हालांकि जांच का कार्य यहां भी नहीं हो पाया। रामनगर स्वास्थ्य केंद्र पर सिर्फ 25 मरीज पहुंच सके। बड़ा अस्पताल होने के बावजूद यहां मरीजों की पर्याप्त उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी कोई प्रयास करते नहीं दिखे। ऐसे में महिलाओं, बच्चों व सामान्य किस्म के मरीजों के लिए आयोजित यह कैंप अपने उद्देश्यों को सफल करता नहीं दिखा।
मरीजों को मुहैया कराई जाएंगी सुविधाएं
जिले में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में प्रदेश के अन्य जनपदों के सापेक्ष ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। औसतन तीन हजार से अधिक मरीजों का उपचार इन मेलों में प्रत्येक रविवार को किया जा रहा है। शिविरों का निरीक्षण भी होगा। मरीजों का आगे और सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
- डॉ, अशोक कुमार, सीएमओ
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अमर उजाला ने कई अस्पतालों का जायजा लिया तो मनमानी का आलम दिखा। मेेले में खून की जांच के लिए पहुंचे मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। गर्भवती समेत बच्चों की जांच भी इन मेलों में नहीं हो सकी। मनमानी यह कि मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए आशाओं व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मरीज के तौर पर इलाज किया गया। एक मेले में मरीज को एक ही मर्ज के लिए एलोपैथिक व होम्योपैथिक दोनों तरह की दवाएं थमा दी गई। उसका नाम दोनों जगह दर्ज कर लिया गया। जाहिर तौर पर इसी तरह का काम अन्य जगहों पर भी किया जाता होगा।
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मेलों में इन मनमानी को रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व वरिष्ठ अफसरों का स्पष्ट निर्देश है कि शिविर का अनिवार्य रूप से जायजा अपर मुख्य चिकित्साधिकारी व उपमुख्य चिकित्साधिकारियों द्वारा लिया जाए। इसके बावजूद रविवार को किसी भी अस्पताल में इन अधिकारियों की ओर से कोई औचक निरीक्षण करने की खबर सामने नहीं आ सकी। इन्हीं सब के चलते इलाज के नाम पर मनमानी का बोलबाला दिखा। भीटी प्रतिनिधि के अनुसार स्थानीय सीएचसी में 72 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। पेश है अमर उजाला टीम द्वारा अस्पतालों के किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट।
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जांच को पहुंचे मरीज हुए निराश
जलालपुर में अरबन सेंटर में आयोजित मेले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से मरीजों में निराशा दिखाई पड़ी। अपरान्ह एक बजे तक यहां एलोपैथ के 58, आयुर्वेद के 36 व होम्योपैथ के 25 मरीज पहुंचे थे। इनका उपचार चिकित्सकों ने सुनिश्चित किया। हालांकि उपचार सिर्फ परामर्श व चंद दवाओं के वितरण तक ही सीमित रहा। ब्लड टेस्ट कराने पहुंचे मरीजों को निराशा हाथ लगी, जबकि ऐसे शिविर में तमाम तरह की जांच प्राथमिकता के साथ कराने के निर्देश हैं। इसके बावजूद सामान्य किस्म की जांच कराने की सुध नहीं दिखी। हजपुरा क्षेत्र के बड़ेपुर अस्पताल में कुल 83 मरीज देखे गए। यहां भी जांच कराने पहुंचे मरीजों को निराशा ही हाथ लगी।
डॉक्टर थे छह, मरीज सिर्फ 20
जिला मुख्यालय स्थित अकबरपुर संयुक्त चिकित्सालय में लगे मेले में सन्नाटे का माहौल रहा। यहां मरीजों की उपस्थिति तय करने की चिंता नहीं दिखी। मौके पर 6 डॉक्टर मौजूद थे। दोपहर सवा बारह बजे तक सिर्फ 20 मरीज यहां पहुुंच सके थे। स्थानीय दिलीप ने कहा कि यहां इसी तरह का माहौल रहता है। चिकित्सक औपचारिकता निभाने के लिए आते हैं। इसके बाद वे वापस लौट जाया करते हैं। इलाज की बजाए सिर्फ टाइम पास किया जाता है।
पहले एलोपैथ फिर थमाई होम्योपैथी दवा
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नरियांव का जायजा लेने टीम पहुंची तो वहां अजीब की तरह मनमानी पकड़ में आई। गैस्ट्रो से संबंधित मरीज रमाकांत पांडेय मिले। उन्हें पहले एलोपैथ का पर्चा बनाकर दवा दी गई। इसके बाद होम्योपैथ कर्मियों ने भी रजिस्टर में नाम दर्ज कर दवा थमा दी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए किस तरह का काम इन शिविरों में किया जा रहा है। यहां मरीजों की कतार में कई स्वास्थ्य कर्मचारी दिखाई दिए। आशा बहू से लेकर एएनएम तक मरीज के तौर पर उपचार कराती दिखीं। दोपहर साढ़े बारह बजे तक होम्योपैथ के 7, आयुर्वेद के 8 तथा एलोपैथ के 17 मरीज अपना उपचार करा चुके थे। कई स्थानीय नागरिकों ने कहा कि पर्याप्त प्रचार प्रसार हो और बेहतर ढंग से इलाज सुनिश्चित किया जाए तो निश्चित रूप से मरीजों की संख्या यहां बढ़ेगी।
न पर्याप्त दवाएं थीं और न ही स्टाफ
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अशरफपुर बरवां, औरंगनगर व नसीरपुर में आरोग्य मेले का आयोजन तो हुआ, लेकिन हर मर्ज का इलाज चंद दवाओं के भरोसे होता दिखा। न तो पर्याप्त दवाएं थीं और न ही समुचित स्टाफ। मरीज रमेश कुमार, राकेश, शिवशंकर व कुसुम आदि ने बताया कि पर्याप्त दवाएं कैंप में नहीं थीं। किसी तरह की जांच की सुविधा भी मुहैया नहीं कराई गई। सिर्फ इलाज के नाम पर रस्म अदायगी की गई। मरीजों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार का जो निर्देश है, उसके अनुरूप आयोजन न कर सिर्फ लकीर पीटी जा रही है।
रामनगर पहुंचे सिर्फ 25 मरीज
आलापुर के लखनी पट्टी में 170 मरीज पहुंचे। यहां चिकित्सक चेतन शर्मा व अन्य ने मरीजों का उपचार किया। उन्हें दवाएं दीं। हालांकि जांच का कार्य यहां भी नहीं हो पाया। रामनगर स्वास्थ्य केंद्र पर सिर्फ 25 मरीज पहुंच सके। बड़ा अस्पताल होने के बावजूद यहां मरीजों की पर्याप्त उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी कोई प्रयास करते नहीं दिखे। ऐसे में महिलाओं, बच्चों व सामान्य किस्म के मरीजों के लिए आयोजित यह कैंप अपने उद्देश्यों को सफल करता नहीं दिखा।
मरीजों को मुहैया कराई जाएंगी सुविधाएं
जिले में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में प्रदेश के अन्य जनपदों के सापेक्ष ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। औसतन तीन हजार से अधिक मरीजों का उपचार इन मेलों में प्रत्येक रविवार को किया जा रहा है। शिविरों का निरीक्षण भी होगा। मरीजों का आगे और सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
- डॉ, अशोक कुमार, सीएमओ