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Ambedkar Nagar News: श्रीकृष्ण–सुदामा की मैत्री लीला सुन भावविभोर हुए भक्त
Sat, 13 Dec 2025 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 13 Dec 2025 12:07 AM IST
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कटेहरी (अंबेडकरनगर)। कटेहरी विकासखंड के शुकुल पट्टी में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को समापन हुआ। प्रवाचक आचार्य स्वामी घराचार्य महाराज ने विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और मित्रता की गहराई से परिचित कराया।
स्वामी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मां देवकी के छह पुत्रों को वापस लाने, सुभद्रा हरण, सुदामा चरित्र, तथा परीक्षित मोक्ष जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। स्वामी घराचार्य महाराज ने कहा कि सच्ची मित्रता कैसी होती है, यह श्रीकृष्ण और सुदामा से सीखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि जब सुदामा, पत्नी के आग्रह पर कृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे, तो द्वारपाल ने उन्हें भिक्षुक समझकर रोक दिया।सभा में उपस्थित लोग कृष्ण-सुदामा के दिव्य मिलन को देखकर भाव-विभोर हो उठे। कृष्ण ने सुदामा को सिंहासन पर बैठाकर उनका सत्कार किया और उन्हें कुबेर सा धन देकर उनका कष्ट दूर किया।
सात दिवसीय कथा का समापन शांतिपूर्ण और भक्तिमय वातावरण में हुआ। कथा के अंत में भागवत भगवान की आरती की गई और उसके बाद प्रसाद वितरण हुआ, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। इस अवसर पर हृदय नारायण शुक्ला, श्रीमती ललित मोहन शुक्ला, मदन मोहन शुक्ला, नरसिंह नारायण शुक्ला, शैलेंद्र तिवारी, अनुरोध शुक्ला, कपिलदेव तिवारी सहित अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।
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स्वामी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मां देवकी के छह पुत्रों को वापस लाने, सुभद्रा हरण, सुदामा चरित्र, तथा परीक्षित मोक्ष जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। स्वामी घराचार्य महाराज ने कहा कि सच्ची मित्रता कैसी होती है, यह श्रीकृष्ण और सुदामा से सीखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि जब सुदामा, पत्नी के आग्रह पर कृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे, तो द्वारपाल ने उन्हें भिक्षुक समझकर रोक दिया।सभा में उपस्थित लोग कृष्ण-सुदामा के दिव्य मिलन को देखकर भाव-विभोर हो उठे। कृष्ण ने सुदामा को सिंहासन पर बैठाकर उनका सत्कार किया और उन्हें कुबेर सा धन देकर उनका कष्ट दूर किया।
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सात दिवसीय कथा का समापन शांतिपूर्ण और भक्तिमय वातावरण में हुआ। कथा के अंत में भागवत भगवान की आरती की गई और उसके बाद प्रसाद वितरण हुआ, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। इस अवसर पर हृदय नारायण शुक्ला, श्रीमती ललित मोहन शुक्ला, मदन मोहन शुक्ला, नरसिंह नारायण शुक्ला, शैलेंद्र तिवारी, अनुरोध शुक्ला, कपिलदेव तिवारी सहित अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।
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