{"_id":"674c9a21c7ebe5d67902ed5b","slug":"the-color-of-the-accident-is-becoming-brighter-due-to-blurred-white-stripes-ambedkar-nagar-news-c-13-1-lko1082-975122-2024-12-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: धुंधली सफेद पट्टियों से चटख हो रहा हादसे का रंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: धुंधली सफेद पट्टियों से चटख हो रहा हादसे का रंग
विज्ञापन
एनएच 233 पर बसखारी के निकट नही लग सका संकेतांक
अंबेडकरनगर।
दिसंबर की शुरुआत हो गई है। ठंड भी बढ़ने लगी है। आने वाले दिनों में कोहरा घना होगा। मौसम में बदलाव से हादसे की आशंका भी रहेगी। ऐसे में सुरक्षित सफर के लिए सड़कों पर बनाई जाने वाली सफेद पट्टी और संकेतकों की भूमिका अहम होगी। लेकिन जिले के तीन राष्ट्रीय राजमार्ग व छह से अधिक राज्य मार्गों की सफेद पट्टियां धुंधली हो गई हैं। कुछ जगहों पर तो बनाई ही नहीं गई हैं। हाईवे से सौभाग्य की सफेदी मिटने से हादसे का रंग चटख हो रहा है।
अभी जिले में चार ब्लैक स्पॉट और आठ हॉट स्पॉट हैं, जहां नवंबर 2022 से फरवरी 2023 के बीच 140 हादसे हुए थे। इस वर्ष एक जनवरी से 15 अक्तूबर तक 248 दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें 164 लोगों की मौत हुई है और 143 घायल हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 128 पर महरुआ व पहितीपुर चौराहे पर सर्वाधिक हादसे होते हैं। अयोध्या-वाराणसी मार्ग पर अन्नावां बाजार के निकट, टांडा से सेवागंज मार्ग पर इल्तिफातगंज चौराहे के निकट भी अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। इन सब के बीच महरुआ से टांडा, टांडा से बसखारी मार्ग पर अभी तक सफेद व पीली पट्टियां ही नहीं बनाई गईं हैं। पुराने संकेतक भी धुंधले हो गए हैं। ऐसे में चालकों को मोड़, कट और रफ्तार की जानकारी नहीं मिल पा रही है। रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है। आगे कोहरा बढ़ने पर तो राह चलना मुश्किल होगा।
कुछ मार्गों लग रहीं पट्टियां
जिन मार्गाें पर सफेद पट्टियां नहीं लगी थीं उनपर लगाने का कार्य चल रहा है। कुछ दिनों में सभी प्रमुख मार्गों के संकेतक भी साफ करा दिए जाएंगे।
अजय जयसवाल, अवर अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग
कोहरे में वाहन चलाते समय ये सावधानियां जरूरी हैं
-वाहनों में आगे और पीछे रिफ्लेक्टिव टेप लगवाएं।
-वाहन धीमी गति से चलाएं। अचानक ब्रेक न लगाएं।
-सड़क किनारे वाहन न खड़ा करें।
-कोहरे में इंडिकेटर और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।
-जहां तक संभव हो रात में वाहन चलाने से बचें।
-पैदल चलने वाले भी सड़क पार करते समय सतर्क रहें।
(नोट : यातायात प्रभारी जय बहादुर यादव ने बताया।)
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
विज्ञापन
आपको जानना जरूरी है...
-हाईवे पर सफेद पट्टी न होना सड़क सुरक्षा कानून का उल्लंघन है। हादसा होने पर आप संबंधित प्राधिकरण पर मुकदमा भी कर सकते हैं।
-सफेद पट्टी की मदद से कोहरे में भी 10 मीटर तक स्पष्ट देख सकते हैं
-सफ़ेद पट्टी के बीच में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कट का मतलब है कि लेन बदल सकते हैं। लेकिन ऐसा करते समय सावधानी जरूरी है।
-सड़क पर दो सफेद पट्टी होने का मतलब है कि यहां ओवरटेक न करें।
(नोट : एनएच के सेवानिवृत्त एक्सईएन प्रवीण सिंह के अनुसार।)
-- -- -- -- -- -- --
मील के पत्थर के रंग भी कुछ कहते हैं
हरा : सड़क पर हरे रंग के मील के पत्थर दिखें तो समझ लें कि स्टेट हाईवे पर हैं और सड़क राज्य सरकार के अधीन है।
पीला : यह दर्शाता है कि आप नेशनल हाईवे पर हैं और हादसे के समय तत्काल मदद मिलेगी।
नीला या काला: किसी बड़े शहर या फिर जिले की तरफ बढ़ रहे हैं। सड़क जिले के अधीन आती है।
विज्ञापन
दिसंबर की शुरुआत हो गई है। ठंड भी बढ़ने लगी है। आने वाले दिनों में कोहरा घना होगा। मौसम में बदलाव से हादसे की आशंका भी रहेगी। ऐसे में सुरक्षित सफर के लिए सड़कों पर बनाई जाने वाली सफेद पट्टी और संकेतकों की भूमिका अहम होगी। लेकिन जिले के तीन राष्ट्रीय राजमार्ग व छह से अधिक राज्य मार्गों की सफेद पट्टियां धुंधली हो गई हैं। कुछ जगहों पर तो बनाई ही नहीं गई हैं। हाईवे से सौभाग्य की सफेदी मिटने से हादसे का रंग चटख हो रहा है।
अभी जिले में चार ब्लैक स्पॉट और आठ हॉट स्पॉट हैं, जहां नवंबर 2022 से फरवरी 2023 के बीच 140 हादसे हुए थे। इस वर्ष एक जनवरी से 15 अक्तूबर तक 248 दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें 164 लोगों की मौत हुई है और 143 घायल हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 128 पर महरुआ व पहितीपुर चौराहे पर सर्वाधिक हादसे होते हैं। अयोध्या-वाराणसी मार्ग पर अन्नावां बाजार के निकट, टांडा से सेवागंज मार्ग पर इल्तिफातगंज चौराहे के निकट भी अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। इन सब के बीच महरुआ से टांडा, टांडा से बसखारी मार्ग पर अभी तक सफेद व पीली पट्टियां ही नहीं बनाई गईं हैं। पुराने संकेतक भी धुंधले हो गए हैं। ऐसे में चालकों को मोड़, कट और रफ्तार की जानकारी नहीं मिल पा रही है। रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है। आगे कोहरा बढ़ने पर तो राह चलना मुश्किल होगा।
विज्ञापन
कुछ मार्गों लग रहीं पट्टियां
जिन मार्गाें पर सफेद पट्टियां नहीं लगी थीं उनपर लगाने का कार्य चल रहा है। कुछ दिनों में सभी प्रमुख मार्गों के संकेतक भी साफ करा दिए जाएंगे।
अजय जयसवाल, अवर अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग
कोहरे में वाहन चलाते समय ये सावधानियां जरूरी हैं
-वाहनों में आगे और पीछे रिफ्लेक्टिव टेप लगवाएं।
-वाहन धीमी गति से चलाएं। अचानक ब्रेक न लगाएं।
-सड़क किनारे वाहन न खड़ा करें।
-कोहरे में इंडिकेटर और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।
-जहां तक संभव हो रात में वाहन चलाने से बचें।
-पैदल चलने वाले भी सड़क पार करते समय सतर्क रहें।
(नोट : यातायात प्रभारी जय बहादुर यादव ने बताया।)
विज्ञापन
आपको जानना जरूरी है...
-हाईवे पर सफेद पट्टी न होना सड़क सुरक्षा कानून का उल्लंघन है। हादसा होने पर आप संबंधित प्राधिकरण पर मुकदमा भी कर सकते हैं।
-सफेद पट्टी की मदद से कोहरे में भी 10 मीटर तक स्पष्ट देख सकते हैं
-सफ़ेद पट्टी के बीच में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कट का मतलब है कि लेन बदल सकते हैं। लेकिन ऐसा करते समय सावधानी जरूरी है।
-सड़क पर दो सफेद पट्टी होने का मतलब है कि यहां ओवरटेक न करें।
(नोट : एनएच के सेवानिवृत्त एक्सईएन प्रवीण सिंह के अनुसार।)
मील के पत्थर के रंग भी कुछ कहते हैं
हरा : सड़क पर हरे रंग के मील के पत्थर दिखें तो समझ लें कि स्टेट हाईवे पर हैं और सड़क राज्य सरकार के अधीन है।
पीला : यह दर्शाता है कि आप नेशनल हाईवे पर हैं और हादसे के समय तत्काल मदद मिलेगी।
नीला या काला: किसी बड़े शहर या फिर जिले की तरफ बढ़ रहे हैं। सड़क जिले के अधीन आती है।