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चार माह से टेली मेडिसिन सेवा ठप
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अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में टेली मेडिसिन सेवा ठप पड़ी है। लगभग चार माह से टेली मेडिसिन कक्ष नहीं खुल सका है। सेवा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए डॉ. मनोज कुमार व डॉ. मनोज शुक्ला को जिम्मेदारी सौंपी गई। जुलाई में डॉ. मनोज कुमार का दूसरे जनपद स्थानांतरण हो गया जबकि डॉ. मनोज शुक्ला की ड्यूटी ओपीडी में लगा दी गई। इससे सेवा ठप पड़ गई।
मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल के कक्ष संख्या 18 में टेली मेडिसिन सेंटर बीते दिनों बनाया गया। इस कक्ष में कम्यूटर आदि की व्यवस्था कर डॉ. मनोज कुमार व डॉ. मनोज शुक्ला की तैनाती कर दी गई। इस कक्ष को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बनाए गए 141 हेल्थ वेलनेस सेंटर से जोड़ दिया गया। प्रत्येक सेंटर पर एक प्रभारी की भी तैनाती कर दी गई थी।
इस सेवा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को संबंधित हेल्थ वेलनेस सेंटर पर पहुंचकर वहां वीडियो कॉलिंग द्वारा जिला अस्पताल में मौजूद चिकित्सक से संपर्क करने की सुविधा थी। जिला अस्पताल से चिकित्सक उन्हें दवाएं बताते थे। इससे लाभ यह हो रहा था कि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ रही थी।
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हालांकि यह सेवा बहुत अधिक दिन तक जारी नहीं रह सकी। जुलाई में जब स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू हुई तो इसमें डॉ. मनोज कुमार का तबादला बस्ती हो गया। ऐसे में मात्र एक चिकित्सक डॉ. मनोज शुक्ला बचे। इनकी भी ड्यूटी ओपीडी व इमरजेंसी में लगने लगी। नतीजा यह हुआ कि लगभग चार माह से टेली मेडिसिन सेवा पूरी तरह से ठप पड़ गई।
चिकित्सकों की कमी के चलते ही जिला अस्पताल में टेली मेडिसिन सेवा बंद है। इसके सुचारु रूप से संचालन के लिए चार नवंबर शुक्रवार से डॉ. रीता राजभर की तैनाती की जा रही है।
-डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस
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मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल के कक्ष संख्या 18 में टेली मेडिसिन सेंटर बीते दिनों बनाया गया। इस कक्ष में कम्यूटर आदि की व्यवस्था कर डॉ. मनोज कुमार व डॉ. मनोज शुक्ला की तैनाती कर दी गई। इस कक्ष को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बनाए गए 141 हेल्थ वेलनेस सेंटर से जोड़ दिया गया। प्रत्येक सेंटर पर एक प्रभारी की भी तैनाती कर दी गई थी।
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इस सेवा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को संबंधित हेल्थ वेलनेस सेंटर पर पहुंचकर वहां वीडियो कॉलिंग द्वारा जिला अस्पताल में मौजूद चिकित्सक से संपर्क करने की सुविधा थी। जिला अस्पताल से चिकित्सक उन्हें दवाएं बताते थे। इससे लाभ यह हो रहा था कि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ रही थी।
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हालांकि यह सेवा बहुत अधिक दिन तक जारी नहीं रह सकी। जुलाई में जब स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू हुई तो इसमें डॉ. मनोज कुमार का तबादला बस्ती हो गया। ऐसे में मात्र एक चिकित्सक डॉ. मनोज शुक्ला बचे। इनकी भी ड्यूटी ओपीडी व इमरजेंसी में लगने लगी। नतीजा यह हुआ कि लगभग चार माह से टेली मेडिसिन सेवा पूरी तरह से ठप पड़ गई।
चिकित्सकों की कमी के चलते ही जिला अस्पताल में टेली मेडिसिन सेवा बंद है। इसके सुचारु रूप से संचालन के लिए चार नवंबर शुक्रवार से डॉ. रीता राजभर की तैनाती की जा रही है।
-डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस