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मूल्यांकन के बाद पारिश्रमिक भुगतान के लिए भटक रहे शिक्षक
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अंबेडकरनगर। बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन करने के बाद शिक्षक पारिश्रमिक भुगतान के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते शिक्षकों का न सिर्फ 2022 का 17 लाख 60 हजार रुपये का पारिश्रमिक भुगतान बकाया है, बल्कि वर्ष 2019 में बोर्ड परीक्षा की जांची गई काॅिपयों का करीब 16 लाख रुपये पारिश्रमिक भुगतान किया जाना बाकी है। ऐसे में विभाग पर शिक्षकों का करीब साढ़े 33 लाख रुपये का बकाया बना हुआ है। शिक्षक संगठनों ने कई बार विभाग पर भुगतान का दबाव बनाया, लेकिन अधिकारी शासन से निर्णय होने का हवाला देकर टरकाते आ रहे हैं। इससे शिक्षकों में आक्रोश है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों से यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन कराने के बाद पारिश्रमिक भुगतान में हीलाहवाली की जा रही है। इसके चलते शिक्षकों का उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के करीब साढ़े 33 लाख रुपये लंबित हैं। वर्ष 2022 में शिक्षकों की ओर से जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं का 17 लाख 60 हजार रुपये बकाया है तो तीन वर्ष पहले वर्ष 2019 में जांची गई कॉपियों का 15 लाख 85 हजार रुपये का भुगतान अब तक नहीं मिल पाया है। शिक्षक विभागीय कार्रवाई के भय से खुलकर आवाज तो नही उठा पाते, लेकिन बीच-बीच में अपने संगठन पदाधिकारियों के माध्यम से बकाया भुगतान की आवाज बुलंद करते रहते हैं।
विभागीय अधिकारी धनाभाव व शासन स्तर का मामला होने की बात कहकर अपना पल्ला छुड़ा लेते हैं। इस उदासीनता के चलते शिक्षक संगठन पदाधिकारियों ने नाराजगी जतायी है। कहा कि शिक्षकों से काम कराने के बाद पारिश्रमिक भुगतान के लिए दौड़ाना अनुचित है। विभागीय अधिकारियों को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। उधर, डीआईओएस प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि बकाया भुगतान शासन स्तर से किया जाएगा। स्थानीय स्तर से जरूरी पत्राचार किया जा चुका है। धन आवंटन होने पर प्राथमिकता के आधार पर मूल्यांकन के पारिश्रमिक का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
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माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों से यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन कराने के बाद पारिश्रमिक भुगतान में हीलाहवाली की जा रही है। इसके चलते शिक्षकों का उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के करीब साढ़े 33 लाख रुपये लंबित हैं। वर्ष 2022 में शिक्षकों की ओर से जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं का 17 लाख 60 हजार रुपये बकाया है तो तीन वर्ष पहले वर्ष 2019 में जांची गई कॉपियों का 15 लाख 85 हजार रुपये का भुगतान अब तक नहीं मिल पाया है। शिक्षक विभागीय कार्रवाई के भय से खुलकर आवाज तो नही उठा पाते, लेकिन बीच-बीच में अपने संगठन पदाधिकारियों के माध्यम से बकाया भुगतान की आवाज बुलंद करते रहते हैं।
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विभागीय अधिकारी धनाभाव व शासन स्तर का मामला होने की बात कहकर अपना पल्ला छुड़ा लेते हैं। इस उदासीनता के चलते शिक्षक संगठन पदाधिकारियों ने नाराजगी जतायी है। कहा कि शिक्षकों से काम कराने के बाद पारिश्रमिक भुगतान के लिए दौड़ाना अनुचित है। विभागीय अधिकारियों को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। उधर, डीआईओएस प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि बकाया भुगतान शासन स्तर से किया जाएगा। स्थानीय स्तर से जरूरी पत्राचार किया जा चुका है। धन आवंटन होने पर प्राथमिकता के आधार पर मूल्यांकन के पारिश्रमिक का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
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