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आर्थिक प्रगति के साथ सेहत सुधारने में जुटे सुभाष

Sun, 01 May 2022 11:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2022 11:57 PM IST
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Subhash engaged in improving health with economic progress
अंबेडकरनगर के बड़ागांव में की गई ड्रैगन फ्रूट की खेती। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
जलालपुर (अंबेडकरनगर)। औषधीय खेती के जरिये बड़ागांव निवासी किसान सुभाष आर्थिक प्रगति तो कर ही रहे, साथ में लोगों की सेहत सुधारने का माध्यम भी बन रहे हैं। खेतिहर पृष्ठभूमि से आने वाले सुभाष ड्रैगन फ्रूट के जरिये दो लाख रुपये की वार्षिक आय अन्य फसलों के साथ प्राप्त कर रहे हैं। दरअसल ड्रैगन फ्रूट के जरिये इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इसकी खपत तेजी से बढ़ रही है। सुभाष को उनकी प्रगतिशीलता के लिए जिला प्रशासन सम्मानित भी कर चुका है।
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आमतौर पर जब ज्यादातर किसान परंपरागत खेती से हटकर कुछ सोच नहीं पाते, तब ऐसे में लीक से हटकर खेती करने वाले बड़ागांव निवासी सुभाष वर्मा ने नई पहचान बनाई है। उन्होंने अपने खेतों में अन्य फसलों के साथ औषधीय खेती करने का निर्णय लिया। लगभग चार वर्ष पहले उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। प्रारंभिक चुनौतियों से जूझने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। पौधे सूखने लगे तो फल भी पर्याप्त नहीं लगे।
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इसके बावजूद वे विचलित नहीं हुए। बताया कि ड्रैगन फ्रूट के बारे में खेती का ख्याल आया, तो यू ट्यूब का सहारा लिया। इसके बाद गुजरात के जामनगर जाकर किसानों से संपर्क साधा और शुरू में लगभग 10 बिस्वा भूमि से खेती शुरू की। अटूट जज्बे के चलते शुरुआत के दिनों में कोई खास लाभ नहीं हुआ, लेकिन इसके बाद से फलों की बिक्री होने लगी। सुभाष बताते हैं कि उन्होंने बाकायदा एक एप भी बना रखा है, जिसके जरिए इसका प्रचार-प्रसार किया जाता है। फलों की बिक्री भी ऑनलाइन माध्यम से ही करते हैं।
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दो लाख रुपये तक हो रही आय
सुभाष ने इन दिनों लगभग 400 पौधे लगा रखे हैं। बताया कि 20 से 25 वर्ष तक इनसे फलों की प्राप्ति होती रहती है। जैसे-जैसे पौधे पुराने व बड़े होते हैं, फलों की संख्या बढ़ती जाती है। एक पौधे से लगभग 25 किग्रा. फल मिल जाते हैं। 200 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक के फल होते हैं। इनकी बिक्री कर सुभाष को अब लगभग दो लाख रुपये की वार्षिक आय हो रही है। बताया कि मौजूदा मई में लगभग एक पखवाड़े बाद फूलों का आना शुरू हो जाता है। लगभग एक माह बाद जून में इनमें फल आने लगते हैं। जुलाई तक फल पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। इसके बाद इनकी बिक्री स्थानीय व बाहरी मार्केट में होती है। शुरुआती दौर में लगभग 50 हजार रुपये की वार्षिक आय करने वाले सुभाष को अब लगभग चार गुना अधिक रकम प्राप्त हो रही है। खास बात यह है कि पूरे खेत में पौधे नहीं लगाए जाते हैं। अन्य फसलों के साथ इन पौधों को मेड़ के किनारे लगाया जाता है। इससे परंपरागत फसलों की खेती का नुकसान भी नहीं होता है।

शासन कर चुका है सम्मान
जागरूक किसान सुभाष को उनकी प्रगतिशीलता के लिए शासन-प्रशासन कई बार सम्मानित कर चुका है। दरअसल वे आर्थिक प्रगति के साथ ही लोगों की इम्यूनिटी मजबूत करने के अभियान का सबब भी बन रहे हैं। ड्रैगन फ्रूट का उपयोग संक्रमण को दूर करने तथा इम्यूनिटी मजबूत करने के काम आता है। इसका प्रयोग विभिन्न कंपनियां आयुर्वेदिक औषधियों के लिए करती हैं। ड्रैगन फ्रूट की खेती बेहतर ढंग से करने के लिए सुभाष को बीते वर्ष 21 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा जिला प्रशासन भी उन्हें बाकायदा सम्मानित कर चुका है। वे जिले के प्रगतिशील किसानों की सूची में शामिल हैं। उनके पिता आलोक वर्मा भी बेहतर खेती करते रहे हैं। उन्हें भी बेहतर चना उत्पादन के लिए शासन की ओर से सम्मानित किया जा चुका है।
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