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Ambedkar Nagar News: सात साल पुराने बहुचर्चित अब्दुल बारी हत्याकांड में छह आरोपी बरी
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अंबेडकरनगर। बसखारी के अब्दुल बारी उर्फ सोनू हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राम विलास सिंह की अदालत ने छह आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। विचारण के दौरान दो आरोपियों जवाहिर और शेर बहादुर यादव की मृत्यु हो जाने से उनके विरुद्ध कार्रवाई पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
अभियोजन के अनुसार 29 नवंबर 2019 की रात करीब 11 बजे आलापुर क्षेत्र के हथिनाराज निवासी अब्दुल बारी उर्फ सोनू अपने कर्मचारी अभिषेक के साथ बसखारी के ग्राम मरौचा में रोजी नाम की युवती से मिलने गया था। आरोप था कि इसी दौरान गांव के कई लोगों ने उसे घेरकर डंडों से पीटकर हत्या कर दी और उसकी बाइक में आग लगा दी थी। इस मामले में इसरार अहमद की तहरीर पर हत्या, बलवा और आगजनी की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें मरौचा गांव के आठ लोगों को नामजद किया गया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने वादी इसरार अहमद, कथित प्रत्यक्षदर्शी अभिषेक, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक समेत अन्य गवाहों को अदालत में पेश किया। हालांकि न्यायालय में वादी ने स्वीकार किया कि उसने घटना अपनी आंखों से नहीं देखी थी और आरोपियों के नाम उसे अभिषेक से मिले थे।
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वहीं, सबसे महत्वपूर्ण गवाह अभिषेक ने अदालत में अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। उसने स्पष्ट कहा कि उसने किसी भी आरोपी को अब्दुल बारी पर हमला करते नहीं देखा। बताया कि शोर सुनने के बाद वह मौके पर पहुंचा, जहां अब्दुल बारी घायल अवस्था में पड़ा था, जबकि हमलावर पहले ही जा चुके थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई और डॉक्टर ने मृत्यु का कारण अत्यधिक रक्तस्राव व सदमा बताया। अदालत ने कहा कि केवल चिकित्सीय साक्ष्य से यह साबित नहीं होता कि वारदात को किन लोगों ने अंजाम दिया।
निर्णय में न्यायालय ने विवेचक के बयान का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि यह प्रमाण नहीं मिला कि मृतक का युवती से प्रेम संबंध था या घटना वाले दिन उससे उसकी कोई बातचीत हुई थी। अदालत ने माना कि अभियोजन का पूरा घटनाक्रम इसी कथित प्रेम प्रसंग पर आधारित था लेकिन उसका भी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए बुद्धिराम, रामकेवल, रघुवीर, अंकित, सिकन्दर और धर्मवीर को दोषमुक्त कर दिया गया।
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अभियोजन के अनुसार 29 नवंबर 2019 की रात करीब 11 बजे आलापुर क्षेत्र के हथिनाराज निवासी अब्दुल बारी उर्फ सोनू अपने कर्मचारी अभिषेक के साथ बसखारी के ग्राम मरौचा में रोजी नाम की युवती से मिलने गया था। आरोप था कि इसी दौरान गांव के कई लोगों ने उसे घेरकर डंडों से पीटकर हत्या कर दी और उसकी बाइक में आग लगा दी थी। इस मामले में इसरार अहमद की तहरीर पर हत्या, बलवा और आगजनी की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें मरौचा गांव के आठ लोगों को नामजद किया गया था।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन ने वादी इसरार अहमद, कथित प्रत्यक्षदर्शी अभिषेक, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक समेत अन्य गवाहों को अदालत में पेश किया। हालांकि न्यायालय में वादी ने स्वीकार किया कि उसने घटना अपनी आंखों से नहीं देखी थी और आरोपियों के नाम उसे अभिषेक से मिले थे।
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वहीं, सबसे महत्वपूर्ण गवाह अभिषेक ने अदालत में अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। उसने स्पष्ट कहा कि उसने किसी भी आरोपी को अब्दुल बारी पर हमला करते नहीं देखा। बताया कि शोर सुनने के बाद वह मौके पर पहुंचा, जहां अब्दुल बारी घायल अवस्था में पड़ा था, जबकि हमलावर पहले ही जा चुके थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई और डॉक्टर ने मृत्यु का कारण अत्यधिक रक्तस्राव व सदमा बताया। अदालत ने कहा कि केवल चिकित्सीय साक्ष्य से यह साबित नहीं होता कि वारदात को किन लोगों ने अंजाम दिया।
निर्णय में न्यायालय ने विवेचक के बयान का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि यह प्रमाण नहीं मिला कि मृतक का युवती से प्रेम संबंध था या घटना वाले दिन उससे उसकी कोई बातचीत हुई थी। अदालत ने माना कि अभियोजन का पूरा घटनाक्रम इसी कथित प्रेम प्रसंग पर आधारित था लेकिन उसका भी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए बुद्धिराम, रामकेवल, रघुवीर, अंकित, सिकन्दर और धर्मवीर को दोषमुक्त कर दिया गया।