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निषाद पार्टी को सीट मिलती देख भाजपा दावेदारों की धड़कनें तेज
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अंबेडकरनगर। कटेहरी विधानसभा सीट निषाद पार्टी के खाते में जाना लगभग तय हो गया है। इससे अचानक कटेहरी विधानसभा सीट के समीकरणों में नई तस्वीर उभरने लगी है। गठबंधन के खाते में सीट जाते देख भाजपा के छह से अधिक दावेदारों तथा उनके सैकड़ों समर्थकों में निराशा का माहौल दिखने लगा है। हालांकि अंतिम कोशिश अभी दावेदारों व समर्थकों ने छोड़ी नहीं है। वे इस कोशिश में हैं कि निषाद पार्टी को गठबंधन के तहत कटेहरी सीट अंतिम दौर में न मिले।
विधानसभा चुनाव का दौर आगे बढ़ने के साथ ही परिस्थितियां अलग-अलग सीटों पर रोचक होती जा रही हैं। फिलहाल सबसे रोचक तस्वीर कटेहरी विधानसभा सीट को लेकर है। दरअसल यहां एक तरफ सत्तारूढ़ दल से टिकट हासिल करने के लिए तमाम दावेदार जुटे हुए हैं तो वहीं गठबंधन के घटक दल निषाद पार्टी ने तगड़ी दावेदारी कर रखी है। अमर उजाला ने बीते दिनों ही यह खबर ब्रेक की थी कि कटेहरी सीट निषाद पार्टी के खाते में जा सकती है। हालांकि तब बाहरी तौर पर तस्वीर बहुत साफ नहीं थी। लेकिन पिछले दो दिन में अवध क्षेत्र की सीटों पर प्रत्याशी व गठबंधन की सीट तय करने को लेकर हुई बैठक के बाद अब स्थिति बहुत कुछ स्पष्ट हो चुकी है।
कोई बड़ा उलटफेर न हुआ तो यह तय हो चुका है कि कटेहरी सीट से निषाद पार्टी का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा। इसे उस समय और भी बल मिल गया, जब निषाद पार्टी से टिकट हासिल करने के लिए लगे लखनऊ के एक बिल्डर ने कई वाहनों के साथ कटेहरी पहुंचकर दस्तक दे दी। हालांकि अभी निषाद पार्टी व भाजपा की तरफ से यह तय नहीं हुआ है कि कटेहरी से निषाद पार्टी का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा, लेकिन अब यह लगभग तय है कि कटेहरी की सीट निषाद पार्टी के खाते में जा रही है।
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यह स्थिति लगभग स्पष्ट होने के बाद भाजपा से टिकट हासिल करने के लिए लगे छह से अधिक वरिष्ठ नेताओं तथा सैकड़ों समर्थकों की धड़कनें बढ़ गई हैं। इनमें बीते दिनों बसपा छोड़कर आए एक पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी से टिकट इस बार मिला तो विधानसभा पहुंचने में आसानी होगी। कई अन्य दावेदार क्षेत्र में अपनी पकड़, लगातार क्षेत्र में काम करने तथा संगठन में मजबूत पैठ व जातीय समीकरणों के बूते अपनी दावेदारी को प्रबल मानकर चल रहे थे। अब निषाद पार्टी की तरफ सीट जाते देख इन सभी दावेदारों व समर्थकों को करारा झटका लगा है। हालांकि अभी यह दावेदार पूरी तरह निराश नहीं हैं। उनके द्वारा यह अंतिम कोशिश की जा रही है कि सीट किसी तरह निषाद पार्टी के कोटे से हटकर भाजपा की तरफ आ जाए।
समीकरणों की बदलती दिखेगी तस्वीर
कटेहरी की सीट अपने कोटे में जाने को लेकर निषाद पार्टी का तर्क है कि बीते चुनाव में उसके प्रत्याशी अजय सिंह सिपाही ने तब यहां जबरदस्त प्रदर्शन किया था, जब बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं था। 18 हजार से अधिक मत अजय सिपाही को मिले थे। पार्टी का तर्क है कि इन मतों के अलावा भाजपा के मतों को शामिल कर आसानी से जीत हासिल की जा सकती है। निषाद पार्टी को यह सीट देने का असर न सिर्फ अंबेडकरनगर जिले की अन्य चार सीटों पर पड़ेगा, वरन अयोध्या, सुल्तानपुर आदि जनपदों में भी सकारात्मक संदेश जाएगा। इन तर्कों के बूते निषाद पार्टी के कोटे में कटेहरी सीट जाने के बाद निश्चित रूप से चुनावी समीकरणों की नई तस्वीर बनती दिखेगी। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि निषाद पार्टी के लड़ने से जहां कई तरह के फायदे हैं तो वहीं कई तरह के नुकसान भी हैं। विपक्षी पार्टियां खासतौर पर सपा व बसपा भाजपा के खाते में सीट न जाने का लाभ उठाने की भरपूर कोशिश करेंगी।
अभी नहीं हैं कोई संकेत
सीटों को लेकर अभी हम सबको कोई संकेत या निर्देश नहीं मिले है। पार्टी जिस भी दावेदार को टिकट देगी या गठबंधन के कोटे पर सीट जाएगी तो उसके प्रत्याशी को मिलाकर हम सब सभी पांच सीटों पर जीत के लिए काम करेंगे। हमारा लक्ष्य सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज करने का है। संगठन इस दिशा में सभी प्रभावी प्रयास कर रहा है। हमारी भूमिका पूरी तरह स्पष्ट है। हम उस जिम्मेदारी का शत प्रतिशत निर्वहन करेंगे।
डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी, भाजपा जिलाध्यक्ष
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विधानसभा चुनाव का दौर आगे बढ़ने के साथ ही परिस्थितियां अलग-अलग सीटों पर रोचक होती जा रही हैं। फिलहाल सबसे रोचक तस्वीर कटेहरी विधानसभा सीट को लेकर है। दरअसल यहां एक तरफ सत्तारूढ़ दल से टिकट हासिल करने के लिए तमाम दावेदार जुटे हुए हैं तो वहीं गठबंधन के घटक दल निषाद पार्टी ने तगड़ी दावेदारी कर रखी है। अमर उजाला ने बीते दिनों ही यह खबर ब्रेक की थी कि कटेहरी सीट निषाद पार्टी के खाते में जा सकती है। हालांकि तब बाहरी तौर पर तस्वीर बहुत साफ नहीं थी। लेकिन पिछले दो दिन में अवध क्षेत्र की सीटों पर प्रत्याशी व गठबंधन की सीट तय करने को लेकर हुई बैठक के बाद अब स्थिति बहुत कुछ स्पष्ट हो चुकी है।
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कोई बड़ा उलटफेर न हुआ तो यह तय हो चुका है कि कटेहरी सीट से निषाद पार्टी का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा। इसे उस समय और भी बल मिल गया, जब निषाद पार्टी से टिकट हासिल करने के लिए लगे लखनऊ के एक बिल्डर ने कई वाहनों के साथ कटेहरी पहुंचकर दस्तक दे दी। हालांकि अभी निषाद पार्टी व भाजपा की तरफ से यह तय नहीं हुआ है कि कटेहरी से निषाद पार्टी का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा, लेकिन अब यह लगभग तय है कि कटेहरी की सीट निषाद पार्टी के खाते में जा रही है।
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यह स्थिति लगभग स्पष्ट होने के बाद भाजपा से टिकट हासिल करने के लिए लगे छह से अधिक वरिष्ठ नेताओं तथा सैकड़ों समर्थकों की धड़कनें बढ़ गई हैं। इनमें बीते दिनों बसपा छोड़कर आए एक पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी से टिकट इस बार मिला तो विधानसभा पहुंचने में आसानी होगी। कई अन्य दावेदार क्षेत्र में अपनी पकड़, लगातार क्षेत्र में काम करने तथा संगठन में मजबूत पैठ व जातीय समीकरणों के बूते अपनी दावेदारी को प्रबल मानकर चल रहे थे। अब निषाद पार्टी की तरफ सीट जाते देख इन सभी दावेदारों व समर्थकों को करारा झटका लगा है। हालांकि अभी यह दावेदार पूरी तरह निराश नहीं हैं। उनके द्वारा यह अंतिम कोशिश की जा रही है कि सीट किसी तरह निषाद पार्टी के कोटे से हटकर भाजपा की तरफ आ जाए।
समीकरणों की बदलती दिखेगी तस्वीर
कटेहरी की सीट अपने कोटे में जाने को लेकर निषाद पार्टी का तर्क है कि बीते चुनाव में उसके प्रत्याशी अजय सिंह सिपाही ने तब यहां जबरदस्त प्रदर्शन किया था, जब बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं था। 18 हजार से अधिक मत अजय सिपाही को मिले थे। पार्टी का तर्क है कि इन मतों के अलावा भाजपा के मतों को शामिल कर आसानी से जीत हासिल की जा सकती है। निषाद पार्टी को यह सीट देने का असर न सिर्फ अंबेडकरनगर जिले की अन्य चार सीटों पर पड़ेगा, वरन अयोध्या, सुल्तानपुर आदि जनपदों में भी सकारात्मक संदेश जाएगा। इन तर्कों के बूते निषाद पार्टी के कोटे में कटेहरी सीट जाने के बाद निश्चित रूप से चुनावी समीकरणों की नई तस्वीर बनती दिखेगी। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि निषाद पार्टी के लड़ने से जहां कई तरह के फायदे हैं तो वहीं कई तरह के नुकसान भी हैं। विपक्षी पार्टियां खासतौर पर सपा व बसपा भाजपा के खाते में सीट न जाने का लाभ उठाने की भरपूर कोशिश करेंगी।
अभी नहीं हैं कोई संकेत
सीटों को लेकर अभी हम सबको कोई संकेत या निर्देश नहीं मिले है। पार्टी जिस भी दावेदार को टिकट देगी या गठबंधन के कोटे पर सीट जाएगी तो उसके प्रत्याशी को मिलाकर हम सब सभी पांच सीटों पर जीत के लिए काम करेंगे। हमारा लक्ष्य सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज करने का है। संगठन इस दिशा में सभी प्रभावी प्रयास कर रहा है। हमारी भूमिका पूरी तरह स्पष्ट है। हम उस जिम्मेदारी का शत प्रतिशत निर्वहन करेंगे।
डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी, भाजपा जिलाध्यक्ष