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यहां तो पढ़ाई कम, जान जोखिम में ज्यादा नजर आती

Mon, 08 Jul 2019 10:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2019 10:45 PM IST
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school
अंबेडकरनगर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की दुश्वारियों की कहानी कोई नई नहीं है। सरकार लगातार बच्चों को इन स्कूलों में पहुंचाने की कवायद कर रही है। कुछ परेशानियां सालभर इन स्कूलों के बच्चों को झेलनी होती हैं तो कुछ मौसम के साथ आती और जाती रहती हैं। कुछ इसी तरह बरसात के मौसम में भी बच्चों को बड़ी दिक्कत झेलनी पड़ती है। तमाम ऐसे स्कूल हैं जिनमें पानी भर जाता है या स्कूल पहुंचने के रास्ते जलमग्न हो जाते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। 250 से अधिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनके मुख्य मार्ग से लेकर परिसर के भीतर तक हद दर्जे तक जलभराव हो गया है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को पानी के बीच से होकर विद्यालय आने-जाने को विवश होना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि अब तक अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
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रविवार दिन से शुरू होकर बरसात का दौर सोमवार को भी जारी रहा। तमाम सार्वजनिक स्थानों, गलियों व बाजारों आदि में जलभराव को देखते हुए अमर उजाला ने तय किया कि परिषदीय स्कूलों में अध्यनरत बच्चों की मुश्किलों पर भी नजर दौड़ाई जाए। ऐसा इसलिए, जिससे उनकी समस्या को सबके सामने लाया जा सके। सामाजिक सरोकार व जनसामान्य के प्रति जिम्मेदारी महसूस करते हुए इसी मंशा के तहत अमर उजाला ने बरसात के बीच कई प्राथमिक विद्यालयों का रुख किया, तो हालात अत्यंत भयावह नजर आए।
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कई विद्यालय परिसर तो पूरी तरह तालाब में तब्दील हो गए हैं,जबकि कई विद्यालयों के मुख्य मार्ग पानी में डूब गए हैं। दर्जनों विद्यालय की चहारदीवारी के इर्दगिर्द भी पानी एकत्र होने की समस्या उत्पन्न हो गई है। नतीजा यह कि ऐसी चहारदीवारियों के कभी भी ढहने का खतरा उत्पन्न हो गया है, तो वहीं रास्तों व परिसर में भरे पानी में फंसकर बच्चों के साथ अनहोनी की आशंका भी लगातार बनी हुई है। कई विद्यालयों में मौके पर मिले हालात कुछ
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स्थान-प्राथमिक विद्यालय कटरिया बड़ागांव
विद्यालय तक जाने वाले मार्ग से लेकर परिसर में घुटने तक भरे पानी से होकर छात्र-छात्राएं शिक्षण कक्ष तक पहुंचने में मजबूर हुए। विद्यालय के दोनों तरफ गांव जाने वाला मार्ग ऊंचा होने के चलते परिसर में लगभग घुटने तक पानी भर गया। जलभराव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शौचालय के अंदर तक पानी भर गया। हैंडपंप के चारों तरफ भरा होने से छात्र-छात्राओं को पेयजल के लिए समस्या उठानी पड़ी। सबसे बड़ी मुश्किल विद्यालय तक आने जाने में छात्र-छात्राओं को हुई। बारिश के चलते दलदल हो चुकी मिट्टी वाले रास्ते से होकर छात्र-छात्राओं को गुजरना पड़ा। प्रधानाध्यापक दुखहरन प्रजापति ने बताया कि विद्यालय के चारों तरफ खतौनी की भूमि होने के चलते जलनिकासी की व्यवथा नहीं हो पा रही है। सोमवार को परिसर व रास्ते में पानी भरा होने से छात्र-छात्राओं की उपस्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। पंजीकृत 125 छात्र-छात्राओं के सापेक्ष 33 बच्चे किसी प्रकार विद्यालय पहुंचे। बताया कि जलभराव समस्या दूर करने के लिए बीएसए कार्यालय को पत्र भेजा जा रहा है।
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