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Ambedkar Nagar News: धमकी देकर वसूली करने की आरोपी को राहत
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अंबेडकरनगर। दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर रुपये और जेवर वसूलने के मामले में जेल में बंद लक्ष्मी दूबे को अदालत से जमानत मिल गई। अकबरपुर के काशीपुर भगौतीपुर निवासी लक्ष्मी आठ अक्तूबर से अपने पांच वर्षीय बेटे आर्यन के साथ जेल में बंद थी। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम पवन कुमार शुक्ला ने शिकायतकर्ता को फोन कर परेशान न करने की शर्त पर उसकी रिहाई का आदेश दिया है।
इब्राहिमपुर क्षेत्र के नसरुल्लाहपुर केदारनगर निवासी प्रमोद कुमार गुप्ता ने एसपी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि सितंबर 2024 में लक्ष्मी उनकी आभूषण की दुकान पर आई थी और मोबाइल नंबर ले लिया था। अक्टूबर में रामलीला के दौरान मुलाकात के बाद वह उन्हें चाय पिलाने के बहाने कमरे पर ले गई। वहां अश्लील हरकत का विरोध करने पर दिलीप दूबे और एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।
आरोप है कि मुकदमे की धमकी देकर तीन लाख रुपये और जेवर मांगे गए। डर के चलते उन्होंने डेढ़ लाख रुपये और कुछ जेवर दे दिए। 24 जनवरी 2025 को लिखित समझौता भी हुआ। इसके बाद दो लाख रुपये और मांगे गए, जिस पर उन्होंने 10 हजार रुपये दिए। आरोप है कि बाद में रोजाना 30-40 और फिर 70-80 फोन कॉल कर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी जाने लगी।
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एसपी के निर्देश पर पुलिस ने 12 जून 2025 को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताया। अदालत ने एफआईआर दर्ज कराने में पांच महीने की देरी और जांच के दौरान गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देकर वसूली के प्रयास से जुड़ी धारा जोड़े जाने के तथ्यों पर विचार किया। इस अपराध में दस साल तक की सजा का प्रावधान है।
अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर जमानत मंजूर कर ली।
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इब्राहिमपुर क्षेत्र के नसरुल्लाहपुर केदारनगर निवासी प्रमोद कुमार गुप्ता ने एसपी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि सितंबर 2024 में लक्ष्मी उनकी आभूषण की दुकान पर आई थी और मोबाइल नंबर ले लिया था। अक्टूबर में रामलीला के दौरान मुलाकात के बाद वह उन्हें चाय पिलाने के बहाने कमरे पर ले गई। वहां अश्लील हरकत का विरोध करने पर दिलीप दूबे और एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।
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आरोप है कि मुकदमे की धमकी देकर तीन लाख रुपये और जेवर मांगे गए। डर के चलते उन्होंने डेढ़ लाख रुपये और कुछ जेवर दे दिए। 24 जनवरी 2025 को लिखित समझौता भी हुआ। इसके बाद दो लाख रुपये और मांगे गए, जिस पर उन्होंने 10 हजार रुपये दिए। आरोप है कि बाद में रोजाना 30-40 और फिर 70-80 फोन कॉल कर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी जाने लगी।
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एसपी के निर्देश पर पुलिस ने 12 जून 2025 को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताया। अदालत ने एफआईआर दर्ज कराने में पांच महीने की देरी और जांच के दौरान गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देकर वसूली के प्रयास से जुड़ी धारा जोड़े जाने के तथ्यों पर विचार किया। इस अपराध में दस साल तक की सजा का प्रावधान है।
अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर जमानत मंजूर कर ली।