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Ambedkar Nagar News: पत्नी-बच्चों की हत्या करने वाले बंदी की रिहाई याचिका खारिज
Sat, 10 May 2025 10:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 10 May 2025 10:44 PM IST
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अंबेडकरनगर। सम्मनपुर थाना क्षेत्र के तुलसीपुर गांव में वर्ष 2007 में पत्नी व दो बच्चों की हत्या के मामले में दोषसिद्ध बंदी इन्द्रबली की समयपूर्व रिहाई याचिका राज्यपाल ने अस्वीकार कर दी है। शासन स्तर पर सम्यक परीक्षण के बाद राज्यपाल ने फार्म-ए के अंतर्गत रिहाई अस्वीकार कर दी है।
सम्मनपुर के तुलसीपुर निवासी इन्द्रबली को अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने हत्या का दोषी ठहराते हुए 28 फरवरी 2011 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में अभियुक्त केंद्रीय कारागार लखनऊ में सजा काट रहा है। अभियुक्त ने 28 दिसंबर 2007 को पत्नी शीला, पुत्री दीपांक्षी और पुत्र गोलू पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी, जिससे तीनों की मृत्यु हो गई थी। बंदी समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन किया था।
जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी ने उच्चतम न्यायालय ने निर्धारित बिंदुओं पर संस्तुतियां दी थीं। प्रोबेशन बोर्ड ने इस प्रकरण पर परीक्षण के बाद यह स्पष्ट किया गया कि बंदियों का अपराध अत्यंत गंभीर व जघन्य है। पत्नी व बच्चों को आग लगाकर मारना पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों के विरुद्ध है।
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बोर्ड ने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रकरणों में दोषियों की समयपूर्व रिहाई समाज में न्यायिक व्यवस्था की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न उत्पन्न कर सकती है। प्रोबेशन बोर्ड की आपत्ति को दृष्टिगत रखते हुए राज्यपाल ने फार्म-ए के अंतर्गत बंदी की रिहाई अस्वीकार कर दी है। संयुक्त सचिव शिव गोपाल सिंह ने आदेश जारी कर दिया है।
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सम्मनपुर के तुलसीपुर निवासी इन्द्रबली को अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने हत्या का दोषी ठहराते हुए 28 फरवरी 2011 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में अभियुक्त केंद्रीय कारागार लखनऊ में सजा काट रहा है। अभियुक्त ने 28 दिसंबर 2007 को पत्नी शीला, पुत्री दीपांक्षी और पुत्र गोलू पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी, जिससे तीनों की मृत्यु हो गई थी। बंदी समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन किया था।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी ने उच्चतम न्यायालय ने निर्धारित बिंदुओं पर संस्तुतियां दी थीं। प्रोबेशन बोर्ड ने इस प्रकरण पर परीक्षण के बाद यह स्पष्ट किया गया कि बंदियों का अपराध अत्यंत गंभीर व जघन्य है। पत्नी व बच्चों को आग लगाकर मारना पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों के विरुद्ध है।
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बोर्ड ने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रकरणों में दोषियों की समयपूर्व रिहाई समाज में न्यायिक व्यवस्था की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न उत्पन्न कर सकती है। प्रोबेशन बोर्ड की आपत्ति को दृष्टिगत रखते हुए राज्यपाल ने फार्म-ए के अंतर्गत बंदी की रिहाई अस्वीकार कर दी है। संयुक्त सचिव शिव गोपाल सिंह ने आदेश जारी कर दिया है।