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सरयू घटी पर कटान के तेवर तीखे
अंबेडकरनगर
Updated Sun, 24 Jul 2016 10:15 PM IST
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अंबेडकरनगर के टांडा में सरयू के जलस्तर में कमी के बाद कटान को चिंतित ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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लगभग एक पखवारे तक जलस्तर में हो रही वृद्घि के बाद अब सरयू नदी का जलस्तर कम होना शुरू हो गया है। नदी का पानी खतरे के लाल निशान 92.73 मीटर से सिर्फ एक सेमी ऊपर है। नदी के जलस्तर में तेजी से हो रही गिरावट के बाद अब कटान के खतरों ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
नदी के पानी की गति को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई ठोकरों के भी क्षतिग्रस्त होने की खबर है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाढ़ प्रखंड ने पर्याप्त सजगता न बरती, तो कटान से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इस बीच तहसील प्रशासन ने कहा है कि नदी के जलस्तर में कमी के बाद भी सभी कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्रों में बने रहेंगे और पूरी स्थिति पर नजर रखेंगे।
गौरतलब है कि सरयू नदी का पानी पिछले लगभग एक पखवारे से उफान पर था। नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान से 33 सेमी ऊपर तक पहुंच चला था, जिसके चलते माझा क्षेत्र के तीन गांव पूरी तरह बाढ़ से घिर गए थे, जबकि आधा दर्जन अन्य गांव भी बाढ़ की जद में थे।
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नदी का पानी 33 सेमी ऊपर पहुंचने के बाद से ग्रामीणों की चिंता यह थी कि नदी का पानी कभी भी घरों में पहुंच सकता है। हालांकि यह स्थिति उत्पन्न नहीं होने पाई। पानी शनिवार अपराहन बाद से घटना शुरू हो गया।
रविवार सुबह नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान 92.73 मीटर से सिर्फ एक सेमी ऊपर 92.74 मीटर पर था। इस बीच पिछले दो दिनों में जिस तरह नदी का जलस्तर तेजी से कम हुआ है, उससे कटान का खतरा बढ़ चला है। दरअसल नदी का पानी उफान पर होने के बाद जब लौटता है, तब उसके दबाव में कटान की संभावना बढ़ जाती है।
इसी के चलते माझा करमपुर, बरसावां, छज्जापुर, चिंतौरा, फूलपुर, माझा कला, उलटहवा, डुहिया, कटरिया, इस्माइलपुर बेलदहा, केवटला व ककराही आदि गांव के ग्रामीणों में कटान को लेकर चिंता साफ दिखाई पड़ रही है।
स्थानीय रमाशंकर व जितेंद्र ने कहा कि प्राय: ऐसी परिस्थिति में ही कटान का खतरा बढ़ता है। इससे नदी के किनारे लगे पेड़ों व खेतों को तो नुकसान पहुंचता ही है आबादी क्षेत्र के लिए भी खतरा उत्पन्न हो जाता है।
पानी कम होने के बीच कटान का खतरा इसलिए भी बढ़ चला है क्योंकि मुबारकपुर व एचटी इंटर कॉलेज के निकट बने दो ठोकर गत वर्ष से ही क्षतिग्रस्त हैं। इसके चलते यहां कटान का खतरा और ज्यादा बना है।
ग्रामीणों का कहना है कि कटान वाले संभावित क्षेत्रों में यदि प्रशासन व बाढ़ प्रखंड ने समुचित ध्यान नहीं दिया, तो कटान के खतरों से ग्रामीणों को मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। पूर्व के वर्षों में भी ग्रामीणों को इन्हीं परिस्थितियों में कटान का खतरा झेलना पड़ा था।
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नदी के पानी की गति को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई ठोकरों के भी क्षतिग्रस्त होने की खबर है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाढ़ प्रखंड ने पर्याप्त सजगता न बरती, तो कटान से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इस बीच तहसील प्रशासन ने कहा है कि नदी के जलस्तर में कमी के बाद भी सभी कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्रों में बने रहेंगे और पूरी स्थिति पर नजर रखेंगे।
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गौरतलब है कि सरयू नदी का पानी पिछले लगभग एक पखवारे से उफान पर था। नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान से 33 सेमी ऊपर तक पहुंच चला था, जिसके चलते माझा क्षेत्र के तीन गांव पूरी तरह बाढ़ से घिर गए थे, जबकि आधा दर्जन अन्य गांव भी बाढ़ की जद में थे।
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नदी का पानी 33 सेमी ऊपर पहुंचने के बाद से ग्रामीणों की चिंता यह थी कि नदी का पानी कभी भी घरों में पहुंच सकता है। हालांकि यह स्थिति उत्पन्न नहीं होने पाई। पानी शनिवार अपराहन बाद से घटना शुरू हो गया।
रविवार सुबह नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान 92.73 मीटर से सिर्फ एक सेमी ऊपर 92.74 मीटर पर था। इस बीच पिछले दो दिनों में जिस तरह नदी का जलस्तर तेजी से कम हुआ है, उससे कटान का खतरा बढ़ चला है। दरअसल नदी का पानी उफान पर होने के बाद जब लौटता है, तब उसके दबाव में कटान की संभावना बढ़ जाती है।
इसी के चलते माझा करमपुर, बरसावां, छज्जापुर, चिंतौरा, फूलपुर, माझा कला, उलटहवा, डुहिया, कटरिया, इस्माइलपुर बेलदहा, केवटला व ककराही आदि गांव के ग्रामीणों में कटान को लेकर चिंता साफ दिखाई पड़ रही है।
स्थानीय रमाशंकर व जितेंद्र ने कहा कि प्राय: ऐसी परिस्थिति में ही कटान का खतरा बढ़ता है। इससे नदी के किनारे लगे पेड़ों व खेतों को तो नुकसान पहुंचता ही है आबादी क्षेत्र के लिए भी खतरा उत्पन्न हो जाता है।
पानी कम होने के बीच कटान का खतरा इसलिए भी बढ़ चला है क्योंकि मुबारकपुर व एचटी इंटर कॉलेज के निकट बने दो ठोकर गत वर्ष से ही क्षतिग्रस्त हैं। इसके चलते यहां कटान का खतरा और ज्यादा बना है।
ग्रामीणों का कहना है कि कटान वाले संभावित क्षेत्रों में यदि प्रशासन व बाढ़ प्रखंड ने समुचित ध्यान नहीं दिया, तो कटान के खतरों से ग्रामीणों को मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। पूर्व के वर्षों में भी ग्रामीणों को इन्हीं परिस्थितियों में कटान का खतरा झेलना पड़ा था।