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फुलवारी लीला व धनुष यज्ञ का कलाकारों ने किया सजीव मंचन
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अंबेडकरनगर के बसखारी में चल रही रामलीला में मंचन करते कलाकार
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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बसखारी। स्थानीय बाजार में चल रही 11 दिवसीय रामलीला के पांचवें दिन की शुरुआत कलाकारों ने बुधवार रात भगवान श्रीकृष्ण की आरती के साथ की। मंचन में कलाकारों ने फुलवारी लीला, जनक बाजार और धनुष यज्ञ का मनमोहक मंचन किया। मंचन देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ जुट रही है। शिव धनुष टूटते ही समूचा पंडाल सियावर रामचंद्र के जयकारों से गूंज उठा। कलाकारों ने विवाह गीत का भी मंचन किया।
पांचवें दिन बुधवार को रामलीला समिति के कलाकारों ने मंचन से पहले भगवान श्रीकृष्ण की झांकी निकाली, और समिति सदस्य अनिल विश्वकर्मा, प्रदीप कुमार आदि ने आरती उतारी। इसके बाद मंचन की शुरुआत हुई। कलाकारों ने पहले दृश्य में फुलवारी लीला का मंचन दिखाया। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से राम छोटे भाई लक्ष्मण के साथ फुलवारी में पूजा के लिए फूल लेने जाते हैं।
माली भगवान राम व लक्ष्मण को फूल तोड़ने से रोकते हुए कहता है कि वह स्वयं फूलों को चुन कर दे रहा है। माली फूलों को तोड़ने के साथ राम व लक्ष्मण को उसकी खूबियों के बारे में भी बतलाता है। इसी बीच जनक नंदिनी सीता अपने सहेलियों के साथ गौरी पूजन के लिए फुलवारी में पहुंचते हैं।
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श्याम व गौर वर्ण शरीर वाले राम व लक्ष्मण की सुंदरता को देखकर जनकनंदिनी सीता की सहेलियां अपना सुध बुध खो बैठती हैं। सहेलियों की यह दशा देखकर सीता अचंभित हो जाती हैं और पूछती हैं कि तुम लोगों ने ऐसा क्या देख लिया है। जनकनंदिनी सीता की नजर श्रीराम पर पड़ती है, तो वह भी खुश हो जाती हैं। मन ही मन राम को अपने वर के रूप में चुनने का प्रण कर लेती हैं।
अगले दृश्य में सीता माता गौरी की आराधना करती हैं, और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। अगले दृश्य में सीता स्वयंवर के आयोजन को लेकर राजा जनक के संदेश पर जनक दरबार में दूरदराज के राजा व राजकुमार पहुंचते हैं। गुरु विश्वामित्र के साथ राम व लक्ष्मण भी पहुंचते हैं। स्वयंवर सभा में भगवान राम के शिव धनुष तोड़ते ही समूचा माहौल जयकारों से गूंजने लगा।
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पांचवें दिन बुधवार को रामलीला समिति के कलाकारों ने मंचन से पहले भगवान श्रीकृष्ण की झांकी निकाली, और समिति सदस्य अनिल विश्वकर्मा, प्रदीप कुमार आदि ने आरती उतारी। इसके बाद मंचन की शुरुआत हुई। कलाकारों ने पहले दृश्य में फुलवारी लीला का मंचन दिखाया। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से राम छोटे भाई लक्ष्मण के साथ फुलवारी में पूजा के लिए फूल लेने जाते हैं।
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माली भगवान राम व लक्ष्मण को फूल तोड़ने से रोकते हुए कहता है कि वह स्वयं फूलों को चुन कर दे रहा है। माली फूलों को तोड़ने के साथ राम व लक्ष्मण को उसकी खूबियों के बारे में भी बतलाता है। इसी बीच जनक नंदिनी सीता अपने सहेलियों के साथ गौरी पूजन के लिए फुलवारी में पहुंचते हैं।
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श्याम व गौर वर्ण शरीर वाले राम व लक्ष्मण की सुंदरता को देखकर जनकनंदिनी सीता की सहेलियां अपना सुध बुध खो बैठती हैं। सहेलियों की यह दशा देखकर सीता अचंभित हो जाती हैं और पूछती हैं कि तुम लोगों ने ऐसा क्या देख लिया है। जनकनंदिनी सीता की नजर श्रीराम पर पड़ती है, तो वह भी खुश हो जाती हैं। मन ही मन राम को अपने वर के रूप में चुनने का प्रण कर लेती हैं।
अगले दृश्य में सीता माता गौरी की आराधना करती हैं, और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। अगले दृश्य में सीता स्वयंवर के आयोजन को लेकर राजा जनक के संदेश पर जनक दरबार में दूरदराज के राजा व राजकुमार पहुंचते हैं। गुरु विश्वामित्र के साथ राम व लक्ष्मण भी पहुंचते हैं। स्वयंवर सभा में भगवान राम के शिव धनुष तोड़ते ही समूचा माहौल जयकारों से गूंजने लगा।