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उमसभरी गर्मी से दिनभर रहा हाल बेहाल
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अंबेडकरनगर। रविवार को भीषण गर्मी से राहत के बाद सोमवार का दिन एक बार फिर से लोगों के लिए मुसीबत भरा रहा। सुबह से ही निकली तेज धूप से लोगों को भीषण गर्मी से दो चार होना पड़ा। उमस भरी गर्मी से बेहाल लोग घरों व प्रतिष्ठानों में कैद रहे। जिनको बहुत जरूरी काम था वे ही घर से बाहर निकलने की हिम्मत जुटा पाए। दोपहर में एक बार बादल छाए तो लोगों को बारिश की उम्मीद हुई पर कुछ ही देर में बिन बरसे ये बादल आगे बढ़ गए। बारिश न होने से किसान चिंता में डूब गए है, धान की रोपाई का काम पिछड़ता ही जा रहा है। किसानों का मानना है ऐसे मौसम का सीधा असर उपज पर पड़ेगा।
भीषण उमस भरी गर्मी का प्रकोप सोमवार को भी जारी रहा। रविवार को पूरे दिन छाए काले मेघा व चली हवा से भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिली थी। इसके बाद सोमवार को एक बार फिर से भीषण गर्मी से जूझने को मजबूर होना पड़ा। सुबह से ही तपिश भरी धूप निकली, जिससे तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। दोपहर करीब एक बार आसमान पर काले मेघा छाए, लेकिन कुछ देर बाद बिन बरसे निकल गए। उमस भरी गर्मी का ही नतीजा रहा कि लोग घरों व प्रतिष्ठानों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
उधर, बिना बरसे बादल के चले जाने से धान किसान चिंता में डूब गए हैं। किसान रामबख्श सिंह व भगवती प्रसाद दुबे ने कहा कि बारिश न होने से धान की रोपाई का काम पिछड़ रहा है। अगर शीघ्र बारिश नहीं हुई, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव धान की फसल पर पड़ सकता है। किसान राममगन व जगदीश ने कहा कि जुलाई शुरू हो चुका है, लेकिन बारिश का दूर-दूर तक पता नहीं। ऐसा लगता है कि इस बार मानसून आएगा ही नहीं। यदि ऐसा हुआ, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव फसलों पर पड़ेगा।
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भीषण उमस भरी गर्मी का प्रकोप सोमवार को भी जारी रहा। रविवार को पूरे दिन छाए काले मेघा व चली हवा से भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिली थी। इसके बाद सोमवार को एक बार फिर से भीषण गर्मी से जूझने को मजबूर होना पड़ा। सुबह से ही तपिश भरी धूप निकली, जिससे तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। दोपहर करीब एक बार आसमान पर काले मेघा छाए, लेकिन कुछ देर बाद बिन बरसे निकल गए। उमस भरी गर्मी का ही नतीजा रहा कि लोग घरों व प्रतिष्ठानों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
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उधर, बिना बरसे बादल के चले जाने से धान किसान चिंता में डूब गए हैं। किसान रामबख्श सिंह व भगवती प्रसाद दुबे ने कहा कि बारिश न होने से धान की रोपाई का काम पिछड़ रहा है। अगर शीघ्र बारिश नहीं हुई, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव धान की फसल पर पड़ सकता है। किसान राममगन व जगदीश ने कहा कि जुलाई शुरू हो चुका है, लेकिन बारिश का दूर-दूर तक पता नहीं। ऐसा लगता है कि इस बार मानसून आएगा ही नहीं। यदि ऐसा हुआ, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव फसलों पर पड़ेगा।
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