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खुले बाजार में खरीद जोरों पर, सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा
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अंबेडकरनगर। खुले बाजार में जोरों पर चल रही गेहूं की खरीद से सरकारी खरीद पर ग्रहण लगा है। इसके चलते ही खरीद कार्य शुरू होने के डेढ़ माह बाद भी सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। जिले में अब तक तय लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 4.86 फीसदी गेहूं की ही सरकारी खरीद हो पाई है। इसे लेकर क्रय केंद्रों के प्रभारियों के साथ ही खरीद कार्य से जुड़े विपणन इकाई के अन्य अधिकारी परेशानहाल हैं।
जिले में एक अप्रैल से गेहूं खरीद का कार्य विभिन्न क्षेत्रों में संचालित 4 एजेंसियों के 69 क्रय केंद्रों पर शुरू हुआ था। इस दौरान किसानों को खरीद कार्य में किसी भी तरह की परेशानी न होने देने के लिए भी जरूरी इंतजाम किए गए थे। इसके बावजूद गेहूं की सरकारी खरीद जिले में स्पीडअप नहीं हो पा रही है।
खाद्य एवं विपणन विभाग के अनुसार एक अप्रैल से शुरू हुई खरीद के दौरान 12 मई तक खरीद के तय लक्ष्य 65 हजार एमटी के इतर अब तक मात्र 3159.59 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो पायी है। यह कुल लक्ष्य का 4.86 फीसदी है। गेहूं खरीद में तेजी लाने के लिए ही क्रय केंद्र प्रभारी ग्राम प्रधान व कोटेदार से के माध्यम से गांवों में पहुंचकर किसानों से सीधी खरीद का भी निर्देश दिया गया था। ऐसे में फील्ड वर्करों के सक्रिय होने के बाद भी क्रय केंद्रों पर सरकारी खरीद जोर नहीं पकड़ पा रही है।
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आढ़तियों के हाथों बेचने में फायदा
ज्यादातर किसान आढ़तियों के हाथों उपज की बिक्री कर रहे हैं। अकबरपुर के किसान मंगल व प्रकाश राय ने कहा कि एक समय था कि उपज की बिक्री करने के लिए किसानों को क्रय केंद्र पर लंबे समय तक लाइन लगानी पड़ती थी। अब सबकुछ उल्टा हो गया है। अब साहब लोगों को ही गांव का चक्कर लगाना पड़ रहा है। भीटी के किसान संतोष व सेवाराम ने बताया कि सरकारी खरीद के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य 2015 रुपया प्रति कुंतल रखा गया जबकि खुले बाजार में गेहूं का वर्तमान खरीद भाव करीब 22 सौ रुपया प्रति कुंतल तक पहुंच गया है। बाजार भाव समर्थन मूल्य से ऊपर पहुंचने के कारण ही अब किसान अपना गेहूं सरकारी केंद्रों की बजाए खुले बाजार में आढ़तियों को बेचना ज्यादा फायदे का सौदा मान रहे हैं।
सरकारी खरीद बढ़ाने की हरसंभव कोशिश
खाद्य एवं विपणन अधिकारी राजेश कुमार का भी मानना है कि आढ़तियों द्वारा उपज की खरीदारी करने पर किसानों को घर बैठे ही भुगतान की नकद राशि मिल जाती है। इसी कारण वह क्रय केंद्रों पर उपज बेचने की जगह आढ़तियों को ज्यादा गेहूं बेचा जा रहा है। सरकारी खरीद को बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक बनाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है ताकि खरीद के तय लक्ष्य को पूरा किया जा सके।
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जिले में एक अप्रैल से गेहूं खरीद का कार्य विभिन्न क्षेत्रों में संचालित 4 एजेंसियों के 69 क्रय केंद्रों पर शुरू हुआ था। इस दौरान किसानों को खरीद कार्य में किसी भी तरह की परेशानी न होने देने के लिए भी जरूरी इंतजाम किए गए थे। इसके बावजूद गेहूं की सरकारी खरीद जिले में स्पीडअप नहीं हो पा रही है।
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खाद्य एवं विपणन विभाग के अनुसार एक अप्रैल से शुरू हुई खरीद के दौरान 12 मई तक खरीद के तय लक्ष्य 65 हजार एमटी के इतर अब तक मात्र 3159.59 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो पायी है। यह कुल लक्ष्य का 4.86 फीसदी है। गेहूं खरीद में तेजी लाने के लिए ही क्रय केंद्र प्रभारी ग्राम प्रधान व कोटेदार से के माध्यम से गांवों में पहुंचकर किसानों से सीधी खरीद का भी निर्देश दिया गया था। ऐसे में फील्ड वर्करों के सक्रिय होने के बाद भी क्रय केंद्रों पर सरकारी खरीद जोर नहीं पकड़ पा रही है।
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आढ़तियों के हाथों बेचने में फायदा
ज्यादातर किसान आढ़तियों के हाथों उपज की बिक्री कर रहे हैं। अकबरपुर के किसान मंगल व प्रकाश राय ने कहा कि एक समय था कि उपज की बिक्री करने के लिए किसानों को क्रय केंद्र पर लंबे समय तक लाइन लगानी पड़ती थी। अब सबकुछ उल्टा हो गया है। अब साहब लोगों को ही गांव का चक्कर लगाना पड़ रहा है। भीटी के किसान संतोष व सेवाराम ने बताया कि सरकारी खरीद के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य 2015 रुपया प्रति कुंतल रखा गया जबकि खुले बाजार में गेहूं का वर्तमान खरीद भाव करीब 22 सौ रुपया प्रति कुंतल तक पहुंच गया है। बाजार भाव समर्थन मूल्य से ऊपर पहुंचने के कारण ही अब किसान अपना गेहूं सरकारी केंद्रों की बजाए खुले बाजार में आढ़तियों को बेचना ज्यादा फायदे का सौदा मान रहे हैं।
सरकारी खरीद बढ़ाने की हरसंभव कोशिश
खाद्य एवं विपणन अधिकारी राजेश कुमार का भी मानना है कि आढ़तियों द्वारा उपज की खरीदारी करने पर किसानों को घर बैठे ही भुगतान की नकद राशि मिल जाती है। इसी कारण वह क्रय केंद्रों पर उपज बेचने की जगह आढ़तियों को ज्यादा गेहूं बेचा जा रहा है। सरकारी खरीद को बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक बनाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है ताकि खरीद के तय लक्ष्य को पूरा किया जा सके।