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कम पैदावार ने आसमान पर पहुंचाए आलू के दाम

Thu, 17 Sep 2020 10:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 10:39 PM IST
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Potato
फोटो 19, अंबेडकरनगर में लगातार आलू का दाम छू रहा आसमान। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। जिले में आलू की पैदावार कम होने व एकमात्र सहकारी शीतगृह की क्षमता कम होने के चलते आलू के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। आलू किसानों का कहना है कि बीते साल आलू की लागत न निकलने के चलते इस बार बोआई कम की गई। इसी का नतीजा है कि आलू अब आर्थिक रूप से कमजोरों का भोजन नहीं रह गया।
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बीते कुछ दिनों से आलू के दाम में तेजी से उछाल आ रहा है। कभी आठ से दस रुपये प्रति किलो बिकने वाला आलू मौजूदा समय में 35 से 40 रुपये में बिक रहा है। ऐसे में आलू आर्थिक रूप से कमजोरों की थाली से दूर होता जा रहा है। आलू के दाम में हो रही वृद्धि का कारण जिले के किसान बोआई कम किया जाना बता रहे हैं। उनका कहना है कि पूर्व में आलू किसानों को लागत नहीं मिल पा रही थी। इसके चलते किसान अब आलू खुद के खाने के लिए ही बो रहा है। इसके अलावा आलू के भंडारण को लेकर भी जिले में मुश्किल है।
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कारण यह कि मात्र एक सहकारी शीतगृह है, जिसकी क्षमता वैसे तो 20 हजार क्विंटल की है, लेकिन लंबे समय से 10 हजार क्ंिवटल क्षमता वाला फेज खराब होने के चलते मात्र एक फेज में भंडारण हो रहा है। ऐसे में किसानों को आलू के भंडारण के लिए निजी शीतगृह का सहारा लेना पड़ता है। महंगा होने के चलते किसान निजी शीतगृह का रुख करने से घबराते हैं। इसी का नतीजा है कि जिले में आलू की खेती धीरे-धीरे कम होती जा रही है। उद्यान निरीक्षक कमलेश कुमार गौड़ ने बताया कि जिले में 1600 हेक्टेअर क्षेत्रफल में आलू की बोआई की गई। बीते सालों में आलू की बोआई लगभग 2500 हेक्टेअर क्षेत्रफल में होती थी।
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अकबरपुर सहकारी क्रय विक्रय द्वारा संचालित जिला मुख्यालय पर एकमात्र सहकारी शीतगृह में मौजूदा समय में 1041 किसानों ने 12336 बोरी आलू का भंडारण कर रखा है। स्टोर कीपर राधेश्याम ने बताया कि आलू की खेती जिले में कम हुई है। इसका मुख्य कारण लागत का न निकलना है। खेती कम होने के चलते ही शीतगृह में भंडारण कम हो रहा है। कहा कि सरकार को चाहिए कि आलू की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को न सिर्फ अनुदान दे बल्कि मूल्य का भी निर्धारण करे।
अकबरपुर नगर के मीरानपुर मोहल्ला निवासी राधेश्याम यादव ने बताया कि पूर्व में दाम कम होने से लागत नहीं निकल पा रही थी। इसी के चलते उसने इस बार बोआई कम की। मौजूदा समय में उसने मात्र 10 बोरी आलू शीतगृह में जमा किया है। वह इसे बेचेंगे नहीं। सिर्फ खाने व बोआई में ही इसका प्रयोग करेंगे। अटंगी के अच्छेलाल ने कहा कि उन्होंने 57 बोरी शीतगृह में जमा किया है। इसमें से 25 बोरी बेचेंगे जबकि शेष को खाने व बुआई के लिए रखेंगे।

कहा कि दाम चढ़ने के चलते इस बार लाभ मिलने की उम्मीद है अन्यथा पूर्व के वर्षों में लागत भी नहीं निकल पाती थी। जगदीशपुर के शौकीराम ने कहा कि मौजूदा समय में आलू फुटकर में 35 से 40 रुपये में बिक रहा है। उन्होंने बोआई कम की है। ऐसे में मात्र 17 बोरी ही शीतगृह में जमा किया है। वह इसे बेचेंगे नहीं बल्कि खाने व बोआई में प्रयोग करेंगे। कहा कि विगत वर्ष दाम बहुत कम था। इसके चलते बोआई कम की थी। यदि पता होता कि दाम इतना अधिक चढ़ेगा तो अधिक क्षेत्रफल में बोआई करते।
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