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Ambedkar Nagar News: पॉक्सो आरोपी बाल अपचारी की अर्जी खारिज
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अंबेडकरनगर। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मोहन कुमार की अदालत ने हत्या समेत गंभीर धाराओं में आरोपी बाल अपचारी रमजान की ओर से दाखिल अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि किशोर न्याय बोर्ड की प्रारंभिक मूल्यांकन रिपोर्ट में आरोपी को अपराध की प्रकृति और उसके परिणामों को समझने में सक्षम पाया गया था।
अर्जी में आरोपी की ओर से कहा गया था कि घटना एक जुलाई 2020 को हुई थी। उस समय हाईस्कूल की अंकतालिका के अनुसार उसकी उम्र 16 वर्ष 11 माह 24 दिन थी। दलील दी गई कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत बाल न्यायालय को स्वतंत्र रूप से तय करना जरूरी है कि किशोर का वयस्क की तरह विचारण किया जाए या नहीं। इसी आधार पर मामला किशोर न्याय बोर्ड को वापस भेजने की मांग की गई थी।
अभियोजन ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है। किशोर न्याय बोर्ड ने नियमानुसार प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद पत्रावली बाल न्यायालय को भेजी थी।
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अदालत ने पत्रावली के अवलोकन में पाया कि बोर्ड ने मनोवैज्ञानिक अथवा मनोसामाजिक विशेषज्ञों की सहायता और परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर प्रारंभिक मूल्यांकन कराया था। इसमें रमजान को अपराध और उसके परिणामों को समझने में सक्षम पाया गया। परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में उसके कक्षा 10 पास कर लखनऊ में अध्ययनरत होने और घटना के समय उम्र 16 वर्ष 11 माह 24 दिन होने का उल्लेख था।
अदालत ने गंभीर धाराओं में आरोपों को देखते हुए अर्जी को बलहीन मानकर निरस्त कर दिया। पत्रावली साक्ष्य के लिए 14 अक्तूबर 2026 को पेश करने और गवाहों को समन से तलब करने का आदेश दिया गया है।
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अर्जी में आरोपी की ओर से कहा गया था कि घटना एक जुलाई 2020 को हुई थी। उस समय हाईस्कूल की अंकतालिका के अनुसार उसकी उम्र 16 वर्ष 11 माह 24 दिन थी। दलील दी गई कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत बाल न्यायालय को स्वतंत्र रूप से तय करना जरूरी है कि किशोर का वयस्क की तरह विचारण किया जाए या नहीं। इसी आधार पर मामला किशोर न्याय बोर्ड को वापस भेजने की मांग की गई थी।
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अभियोजन ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है। किशोर न्याय बोर्ड ने नियमानुसार प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद पत्रावली बाल न्यायालय को भेजी थी।
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अदालत ने पत्रावली के अवलोकन में पाया कि बोर्ड ने मनोवैज्ञानिक अथवा मनोसामाजिक विशेषज्ञों की सहायता और परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर प्रारंभिक मूल्यांकन कराया था। इसमें रमजान को अपराध और उसके परिणामों को समझने में सक्षम पाया गया। परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में उसके कक्षा 10 पास कर लखनऊ में अध्ययनरत होने और घटना के समय उम्र 16 वर्ष 11 माह 24 दिन होने का उल्लेख था।
अदालत ने गंभीर धाराओं में आरोपों को देखते हुए अर्जी को बलहीन मानकर निरस्त कर दिया। पत्रावली साक्ष्य के लिए 14 अक्तूबर 2026 को पेश करने और गवाहों को समन से तलब करने का आदेश दिया गया है।