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Ambedkar Nagar News: बिना जांच कोलेस्ट्रॉल की दवा लेने से बढ़ रहे मरीज
Fri, 13 Mar 2026 12:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 13 Mar 2026 12:03 AM IST
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जिला अस्पताल की ओपीडी में बृहस्पतिवार को मरीजों को उपचार संबंधी परामर्श देते फिजीशियन डॉ. डीपी
अंबेडकरनगर। जिले में कोलेस्ट्रॉल के प्रति जागरूकता तो बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही एक लापरवाही भी सामने आ रही है। लोग बिना चिकित्सकीय परामर्श के खुद ही कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाओं का सेवन शुरू कर रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए नई मुसीबतें खड़ी कर रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना ऐसे 15 से 20 मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें बिना सलाह दवा लेने के कारण शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मरीजों में मुख्य रूप से कमजोरी, शरीर में दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. डीपी वर्मा के अनुसार, बिना डॉक्टरी निगरानी के लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन करने से शरीर में विटामिन-डी का स्तर कम होने की आशंका बढ़ जाती है। जिसका सीधा असर हड्डियों पर पड़ता है, वे कमजोर होने लगती हैं और जोड़ों में दर्द बढ़ जाता है। स्थिति बिगड़ने पर मरीजों को चलने-फिरने में भी कठिनाई महसूस होने लगती है।
अक्सर लोग बाजार से सीधे दवा खरीदकर खाना शुरू कर देते हैं और दुष्प्रभाव दिखने पर अस्पताल भागते हैं। कोलेस्ट्रॉल की समस्या की सही पहचान के लिए सबसे पहले लैब टेस्ट जरूरी है। मरीज की उम्र, स्वास्थ्य की स्थिति और अन्य बीमारियों को ध्यान में रखकर ही डॉक्टर दवा की खुराक तय करते हैं। खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए केवल दवा ही एकमात्र रास्ता नहीं है, संतुलित खान-पान और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर भी इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।
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मरीजों में मुख्य रूप से कमजोरी, शरीर में दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. डीपी वर्मा के अनुसार, बिना डॉक्टरी निगरानी के लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन करने से शरीर में विटामिन-डी का स्तर कम होने की आशंका बढ़ जाती है। जिसका सीधा असर हड्डियों पर पड़ता है, वे कमजोर होने लगती हैं और जोड़ों में दर्द बढ़ जाता है। स्थिति बिगड़ने पर मरीजों को चलने-फिरने में भी कठिनाई महसूस होने लगती है।
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अक्सर लोग बाजार से सीधे दवा खरीदकर खाना शुरू कर देते हैं और दुष्प्रभाव दिखने पर अस्पताल भागते हैं। कोलेस्ट्रॉल की समस्या की सही पहचान के लिए सबसे पहले लैब टेस्ट जरूरी है। मरीज की उम्र, स्वास्थ्य की स्थिति और अन्य बीमारियों को ध्यान में रखकर ही डॉक्टर दवा की खुराक तय करते हैं। खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए केवल दवा ही एकमात्र रास्ता नहीं है, संतुलित खान-पान और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर भी इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।
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