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Ambedkar Nagar News: दो माह में सिर्फ दो प्रतिशत हो सकी गेहूं की खरीद

Thu, 25 May 2023 10:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 25 May 2023 10:30 PM IST
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Only two percent of wheat could be procured in two months
अंबेडकरनगर। जिले में गेहूं खरीद पूरी तरह से धराशायी हो गई है। खरीद शुरू हुए दो माह का समय बीत चुका लेकिन अब तक 65 हजार मीट्रिक टन की तुलना में महज दो प्रतिशत ही खरीद हो सकी है। पांच एजेंसियों के 67 क्रय केंद्र नामित किए गए लेकिन इनमें से अब तक 64 क्रय केंद्रों पर ही 469 किसानों का 1291.03 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा जा सका है। पीसीएफ के एक व भारतीय खाद्य निगम के दो केंद्रों पर अब तक एक भी किसान की उपज की खरीद नहीं हो सकी है।
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क्रय केंद्रों पर उपज की बिक्री के लिए किसानों की कम आवक के चलते जिले में गेहूं खरीद गति नहीं पकड़ रही है। वैसे तो क्रय केंद्रों पर किसानों की सुविधाओं को लेकर सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गईं हैं लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी किसान उपज लेकर क्रय केंद्र पर नहीं पहुंच रहे हैं। दरअसल आढ़ती किसानों के घर पहुंचकर ही उपज की खरीदारी कर रहे हैं और सरकारी दाम से अधिक की राशि का भुगतान नगद कर रहे हैं।
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इसी का नतीजा है कि खरीद शुरू हुए लगभग दो माह होने को हैं लेकिन अब तक लक्ष्य 65 हजार की तुलना में 1.99 प्रतिशत गेहूं की ही खरीद हो सकी है। खरीद के लिए जिन पांच एजेंसियों के 67 क्रय केंद्रों को नामित किया गया है उसमें पीसीएफ के एक व भारतीय खाद्य निगम के दो क्रय केंद्र पर एक छटांक गेहूं की खरीद नहीं की जा सकी है।
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यहां हुई इतनी खरीद
खाद्य एवं विपणन विभाग कार्यालय के अनुसार खाद्य विभाग के 12 केंद्रों पर 28 हजार एमटी लक्ष्य की तुलना में 632.60 एमटी, पीसीएफ के 45 केंद्रों पर 30 हजार एमटी में 573.08 एमटी, यूपीएसएस के पांच क्रय केंद्रों पर पांच हजार एमटी लक्ष्य की तुलना में 45.25 एमटी, मंडी समिति के एक केंद्र पर एक हजार की तुलना में 16.10 एमटी व भारतीय खाद्य निगम के चार केंद्रों पर एक हजार एमटी लक्ष्य की तुलना में 24 एमटी की खरीद की गई।

आढ़तियों से मिल रहा अधिक दाम
सतरही गांव निवासी गयादीन पांडेय ने कहा कि जब आढ़ती घर पर ही पहुंचकर सरकारी रेट से अधिक राशि देकर खरीदारी कर रहे हैं तो फिर क्रय केंद्र पर जाने की क्या जरूरत है। आढ़तियों के हाथों उपज की बिक्री करने से क्रय केंद्र तक की दौड़ लगाने से राहत मिलती है। साथ ही ढुलाई आदि से भी छुटकारा मिल जाता है। उकरा के किसान दिलीप कुमार सिंह व राजप्रताप सिंह ने कहा कि गेहूं का समर्थन मूल्य सरकार को अधिक रखना चाहिए था। आढ़ती सरकारी मूल्य से अधिक राशि देते हैं।


किसानों को किया जा रहा प्रेरित
क्रय केंद्रों पर खरीद की सभी जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद हैंं। सभी तहसीलों में एसडीएम व तहसीलदार के अलावा अन्य अधिकारी लगातार निरीक्षण कर गेहूं की बिक्री के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। - राजेश कुमार, खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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