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एनटीपीसी विस्तीकरण हादसे में युवक की मौत से मजदूरों में आक्रो
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अंबेडकरनगर। एनटीपीसी विस्तारीकरण में शुक्रवार को शटरिंग गिरने से हुए हादसे में मजदूर की मौत को लेकर शनिवार को श्रमिकों व उनके परिवारीजनों में गुस्सा दिखा। मजदूरों ने कहा कि उनकी सुरक्षा को लेकर पुख्ता प्रबंध नहीं हो पा रहे हैं। उधर, मजदूर की मौत के बाद परिवारीजनों ने शनिवार को शव का अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि एनटीपीसी प्रशासन लगातार दूसरे दिन भी मामले की लीपापोती में जुटा रहा। अधिकारियों ने या तो फोन रिसीव नहीं किया या फिर स्विच ऑफ कर दिया। इस रवैए को लेकर भी स्थानीय स्तर पर कड़ी आलोचना शनिवार को हुई।
गौरतलब है कि एनटीपीसी टांडा में इन दिनों विस्तारीकरण का काम चल रहा है। बड़ी तादाद में मजदूरों व अन्य कर्मचारियों के काम करने के बावजूद सुरक्षा मानकों को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही के चलते अक्सर यहां हादसे होते आ रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को विस्तारीकरण स्थल पर एक शटरिंग अचानक उस समय ढह गई, जब उसे खोलने का काम किया जा रहा था।
हादसे में मलबे में दबकर टांडा तहसील क्षेत्र के माझा उल्टहवा निवासी बाबूराम (40) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनकी कुछ देर बाद मौत हो गई। हादसे के बाद घटना को छिपाने की कोशिश में पूरा एनटीपीसी प्रशासन जुट गया। हालांकि, सिर्फ अमर उजाला ने शनिवार के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस बीच मजदूर की मौत के बाद परिवारीजनों ने शव का शनिवार सुबह सरयू नदी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया।
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काम से हटाए जाने की आशंका के चलते मजदूरों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्लांट व विस्तारीकरण क्षेत्र मिलाकर पिछले पांच वर्षों में कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए न तो कोई मास्टर प्लान तैयार किया गया और न ही सुरक्षा के जरूरी मानकों का पालन कराया जा रहा है।
नतीजा यह है कि इसी तरह या तो मजदूरों की जानें जा रही हैं या उन्हें अन्य तरह के हादसों का शिकार होना पड़ रहा है। मजदूरों के इस गुस्से को भांपते हुए सामने आने के बजाए एनटीपीसी प्रशासन दूसरे दिन भी मामले से बचने की कोशिश करता नजर आया। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने फिर से फोन रिसीव नहीं किया, जबकि विभिन्न उपलब्धियों के लिए लगातार फोन पर उपलब्ध रहने वाले जनसंपर्क अधिकारी संतोष श्रीवास्तव का मोबाइल फोन लगभग पूरे दिन स्विच ऑफ रहा।
एनटीपीसी के अधिकारी इस मुद्दे पर किसी से बात करने के लिए साहस नहीं जुटा सके। एनटीपीसी प्रशासन के इस रवैए की स्थानीय स्तर पर और भी कड़ी आलोचना हुई। लोगों का कहना था कि अक्सर हादसों के समय सही स्थिति लाने की बजाए एनटीपीसी के अधिकारी मामले से भागते नजर आते हैं। उधर एनटीपीसी के जनसंपर्क कार्यालय से जुड़े विवेक ने बताया कि एनटीपीसी को इस तरह की किसी घटना की जानकारी नहीं है। एनटीपीसी परिसर में किसी प्रकार का कोई हादसा नहीं हुआ है। परिसर में सुरक्षा के सभी मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाता है। परिसर में कार्यरत सभी श्रमिक व कर्मचारी इन मानकों से पूरी तरह संतुष्ट भी हैं।
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गौरतलब है कि एनटीपीसी टांडा में इन दिनों विस्तारीकरण का काम चल रहा है। बड़ी तादाद में मजदूरों व अन्य कर्मचारियों के काम करने के बावजूद सुरक्षा मानकों को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही के चलते अक्सर यहां हादसे होते आ रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को विस्तारीकरण स्थल पर एक शटरिंग अचानक उस समय ढह गई, जब उसे खोलने का काम किया जा रहा था।
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हादसे में मलबे में दबकर टांडा तहसील क्षेत्र के माझा उल्टहवा निवासी बाबूराम (40) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनकी कुछ देर बाद मौत हो गई। हादसे के बाद घटना को छिपाने की कोशिश में पूरा एनटीपीसी प्रशासन जुट गया। हालांकि, सिर्फ अमर उजाला ने शनिवार के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस बीच मजदूर की मौत के बाद परिवारीजनों ने शव का शनिवार सुबह सरयू नदी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया।
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काम से हटाए जाने की आशंका के चलते मजदूरों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्लांट व विस्तारीकरण क्षेत्र मिलाकर पिछले पांच वर्षों में कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए न तो कोई मास्टर प्लान तैयार किया गया और न ही सुरक्षा के जरूरी मानकों का पालन कराया जा रहा है।
नतीजा यह है कि इसी तरह या तो मजदूरों की जानें जा रही हैं या उन्हें अन्य तरह के हादसों का शिकार होना पड़ रहा है। मजदूरों के इस गुस्से को भांपते हुए सामने आने के बजाए एनटीपीसी प्रशासन दूसरे दिन भी मामले से बचने की कोशिश करता नजर आया। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने फिर से फोन रिसीव नहीं किया, जबकि विभिन्न उपलब्धियों के लिए लगातार फोन पर उपलब्ध रहने वाले जनसंपर्क अधिकारी संतोष श्रीवास्तव का मोबाइल फोन लगभग पूरे दिन स्विच ऑफ रहा।
एनटीपीसी के अधिकारी इस मुद्दे पर किसी से बात करने के लिए साहस नहीं जुटा सके। एनटीपीसी प्रशासन के इस रवैए की स्थानीय स्तर पर और भी कड़ी आलोचना हुई। लोगों का कहना था कि अक्सर हादसों के समय सही स्थिति लाने की बजाए एनटीपीसी के अधिकारी मामले से भागते नजर आते हैं। उधर एनटीपीसी के जनसंपर्क कार्यालय से जुड़े विवेक ने बताया कि एनटीपीसी को इस तरह की किसी घटना की जानकारी नहीं है। एनटीपीसी परिसर में किसी प्रकार का कोई हादसा नहीं हुआ है। परिसर में सुरक्षा के सभी मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाता है। परिसर में कार्यरत सभी श्रमिक व कर्मचारी इन मानकों से पूरी तरह संतुष्ट भी हैं।