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Ambedkar Nagar News: एक भी स्कूल ने नहीं वापस की कोरोना दौर की फीस
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अंबेडकरनगर। कोरोना संकट के दौरान विद्यालयों द्वारा ली गई फीस का 15 प्रतिशत वापस किए जाने संबंधी न्यायालय के आदेश का पालन यहां नहीं हो पा रहा। इसे लेकर पूरी तरह से बेफिक्री है। जिम्मेदारों ने इसे लेकर निर्देश तो जारी कर दिया लेकिन इसका पालन कराने की सुध नहीं ली जा रही। नतीजा यह है कि अभिभावकों को अभी भी फीस वापस होने या सत्र में समायोजित होने का इंतजार है।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच जब लॉकडाउन लगा था तो उस काल में भी विद्यालयों द्वारा छात्र-छात्राओं से फीस ली गई थी। इसमें यूपी बोर्ड के अलावा सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के विद्यालय भी शामिल रहे। उस समय अभिभावकों ने इसका विरोध जताया। कुछ अभिभावकों ने इसे लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
न्यायालय ने इसे लेकर ऐतिहासिक निर्णय दिया है। इसमें कहा गया कि कोरोना काल के दौरान ली गई फीस का 15 प्रतिशत अभिभावक को वापस कर दिया जाए या फिर नए सत्र में उसे समायोजित कर दिया जाए। मालूम हो कि जिले में सीबीएसई बोर्ड के 32, आईसीएसई बोर्ड के दो तथा यूपी बोर्ड के लगभग 75 विद्यालय इस श्रेणी में आते हैं। न्यायालय के निर्देश के बाद लगभग एक पखवाड़ा पहले डीआईओएस कार्यालय ने पत्र जारी किया। इसमें निर्देशित किया गया कि न्यायालय के निर्देश का शत-प्रतिशत पालन किया जाए। कुल फीस का 15 प्रतिशत वापस अभिभावकों को दिया जाए।
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नहीं सामने आए एक भी विद्यालय
न्यायालय के निर्देश का पालन करने को लेकर अब तक एक भी विद्यालय सामने नहीं आए हैं। दरअसल विभाग ने इसे लेकर पत्र तो जारी कर दिया लेकिन इसका पालन कराने को लेकर पूरी तरह से मौन हैं। नतीजा यह है कि संबंधित विद्यालय भी निर्देश का पालन करने को लेकर गंभीर नहीं है। अकबरपुर की वंदना सिंह ने कहा कि कोविड संकट में विद्यालय बंद थे। कुछ दिनों के बाद ऑनलाइन कक्षाएं चली थीं। हालांकि सिर्फ एक दो घंटे ही कक्षाएं चलती थीं। तब भी पूरी फीस ली गई। कोर्ट के आदेश के बाद भी अब फीस की वापसी नहीं हो सकी है। अकबरपुर की जूही ने कहा कि न्यायालय के निर्देश के बाद संबंधित विद्यालय प्रबंधन से संपर्क कर फीस वापसी की बात की लेकिन शीघ्र ही दिए जाने की बात कहकर टाल दिया गया।
जारी किया गया नोटिस
संबंधित विद्यालयों को नोटिस जारी कर निर्देशित किया गया है कि न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाए। जल्द से जल्द अभिभावकों को फीस वापस की जाए। आदेश का पालन कराया जाएगा। - अवधकिशोर सिंह, डीआईओएस
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कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच जब लॉकडाउन लगा था तो उस काल में भी विद्यालयों द्वारा छात्र-छात्राओं से फीस ली गई थी। इसमें यूपी बोर्ड के अलावा सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के विद्यालय भी शामिल रहे। उस समय अभिभावकों ने इसका विरोध जताया। कुछ अभिभावकों ने इसे लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
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न्यायालय ने इसे लेकर ऐतिहासिक निर्णय दिया है। इसमें कहा गया कि कोरोना काल के दौरान ली गई फीस का 15 प्रतिशत अभिभावक को वापस कर दिया जाए या फिर नए सत्र में उसे समायोजित कर दिया जाए। मालूम हो कि जिले में सीबीएसई बोर्ड के 32, आईसीएसई बोर्ड के दो तथा यूपी बोर्ड के लगभग 75 विद्यालय इस श्रेणी में आते हैं। न्यायालय के निर्देश के बाद लगभग एक पखवाड़ा पहले डीआईओएस कार्यालय ने पत्र जारी किया। इसमें निर्देशित किया गया कि न्यायालय के निर्देश का शत-प्रतिशत पालन किया जाए। कुल फीस का 15 प्रतिशत वापस अभिभावकों को दिया जाए।
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नहीं सामने आए एक भी विद्यालय
न्यायालय के निर्देश का पालन करने को लेकर अब तक एक भी विद्यालय सामने नहीं आए हैं। दरअसल विभाग ने इसे लेकर पत्र तो जारी कर दिया लेकिन इसका पालन कराने को लेकर पूरी तरह से मौन हैं। नतीजा यह है कि संबंधित विद्यालय भी निर्देश का पालन करने को लेकर गंभीर नहीं है। अकबरपुर की वंदना सिंह ने कहा कि कोविड संकट में विद्यालय बंद थे। कुछ दिनों के बाद ऑनलाइन कक्षाएं चली थीं। हालांकि सिर्फ एक दो घंटे ही कक्षाएं चलती थीं। तब भी पूरी फीस ली गई। कोर्ट के आदेश के बाद भी अब फीस की वापसी नहीं हो सकी है। अकबरपुर की जूही ने कहा कि न्यायालय के निर्देश के बाद संबंधित विद्यालय प्रबंधन से संपर्क कर फीस वापसी की बात की लेकिन शीघ्र ही दिए जाने की बात कहकर टाल दिया गया।
जारी किया गया नोटिस
संबंधित विद्यालयों को नोटिस जारी कर निर्देशित किया गया है कि न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाए। जल्द से जल्द अभिभावकों को फीस वापस की जाए। आदेश का पालन कराया जाएगा। - अवधकिशोर सिंह, डीआईओएस