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Ambedkar Nagar News: प्राचार्य गए अवकाश पर, छात्रों ने टाला लखनऊ जाना
Fri, 03 Feb 2023 09:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 03 Feb 2023 09:24 AM IST
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टांडा (अंबेडकरनगर)। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर के प्राचार्य डॉ. संदीप कौशिक अवकाश पर चले गए। लगभग तीन पखवाड़े पहले यहां पहुंचीं डीजी चिकित्सा शिक्षा ने तेजी से बदले घटनाक्रम के बाद अब आननफानन अपनी जांच रिपोर्ट प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को सौंप दी। इसकी जानकारी होते ही छात्र-छात्राओं ने लखनऊ तक पदमार्च का कार्यक्रम पांच दिन के लिए स्थगित कर दिया।
महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में यूं तो गुरुवार को माहौल शांतिपूर्ण बना रहा लेकिन अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं था। छात्र-छात्राओं ने दो फरवरी को लखनऊ कूच की चेतावनी दे रखी थी। इससे समूचे परिसर में तो तनाव का माहौल था ही, पुलिस व प्रशासन में भी लखनऊ कूच को लेकर अनहोनी की आशंका बनी हुई थी।
प्रशासन बल प्रयोग कर छात्र-छात्राओं को रोकने के मूड में नही था। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे आंदोलन अंबेडकरनगर से निकलकर अन्य जनपदों के मेडिकल छात्र-छात्राओं के बीच भी पहुंच सकता था।
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जिला प्रशासन ने इस स्थिति से शासन को पत्र के अलावा फोन पर भी अवगत कराया। नतीजा यह हुआ कि कई घटनाक्रम तेजी से हुए। प्राचार्य डॉ. संदीप कौशिक बुधवार के बाद गुरुवार को भी परिसर में नहीं दिखे।
ज्यादातर चिकित्सक भी चूंकि प्राचार्य से नाराज हैं, इसलिए समय से जानकारी सामने नहीं आ सकी। गुरुवार को पता चला कि प्राचार्य दो दिन पहले ही अवकाश पर चले गए हैं। प्राचार्य के अवकाश पर जाने को भी छात्र-छात्राओं ने सकारात्मक तौर पर लिया।
इस बीच छात्र-छात्राओं को यह जानकारी दी गई कि महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा श्रुति सिंह ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को सौंप दी। मेडिकोज इसी बात को लेकर नाराज थे कि जब चार जनवरी को डीजी मेडिकल कॉलेज आकर जा चुकी थीं तो फिर आखिर जांच रिपोर्ट देने में विलंब क्यों हो रहा है।
मेडिकोज का कहना था कि शासन का एक वरिष्ठ अफसर ही प्राचार्य को बचाने की कोशिश कर रहा है। इन सबके चलते ही कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है। अब छात्रों को जब जांच रिपोर्ट सौंप दिए जाने की जानकारी हुई तो उन्होंने गुरुवार को लखनऊ तक का पदमार्च स्थगित कर दिया।
छात्रों ने कहा कि पांच दिन के भीतर कोई निर्णय न हुआ तो वे प्रशासन को सूचित किए बिना ही सीधे लखनऊ कूच कर जाएंगे।
मेडिकल छात्र-छात्राओं के लखनऊ पदमार्च को देखते हुए एसडीएम व सीओ टांडा के अलावा कई थानाध्यक्ष तथा एक प्लाटून पीएसी के जवान मेडिकल कॉलेज के आसपास मौजूद रहे। बड़ी तादाद में महिला व पुरुष सिपाहियों की भी तैनाती की गई थी।
अग्निशमन दस्ते के अलावा खुफिया पुलिस ने भी लगातार निगाह बनाए रखा। डीएम सैमुअल पॉल एन व एसपी अजीत कुमार सिन्हा फोन पर ही थोड़ी-थोड़ी देर में स्थिति की जानकारी लेते रहे। छात्र-छात्राओं ने लखनऊ पदमार्च को स्थगित करने की जानकारी दी, तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
मेडिकल कॉलेज में छात्र-छात्राओं के लखनऊ पदमार्च की घोषणा के बीच गुरुवार को ओपीडी सामान्य ढंग से चली। मरीजों व तीमारदारों के बीच कोई भी असर देखने को नहीं मिला।
पर्चा कटाने से लेकर दवा लेने और चिकित्सकों को दिखाने व जांच कराने का दौर सुचारू ढंग से चलता रहा। मरीजों व तीमारदारों को इस घटनाक्रम के चलते कोई असुविधा नहीं होने पाई।
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महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में यूं तो गुरुवार को माहौल शांतिपूर्ण बना रहा लेकिन अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं था। छात्र-छात्राओं ने दो फरवरी को लखनऊ कूच की चेतावनी दे रखी थी। इससे समूचे परिसर में तो तनाव का माहौल था ही, पुलिस व प्रशासन में भी लखनऊ कूच को लेकर अनहोनी की आशंका बनी हुई थी।
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प्रशासन बल प्रयोग कर छात्र-छात्राओं को रोकने के मूड में नही था। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे आंदोलन अंबेडकरनगर से निकलकर अन्य जनपदों के मेडिकल छात्र-छात्राओं के बीच भी पहुंच सकता था।
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जिला प्रशासन ने इस स्थिति से शासन को पत्र के अलावा फोन पर भी अवगत कराया। नतीजा यह हुआ कि कई घटनाक्रम तेजी से हुए। प्राचार्य डॉ. संदीप कौशिक बुधवार के बाद गुरुवार को भी परिसर में नहीं दिखे।
ज्यादातर चिकित्सक भी चूंकि प्राचार्य से नाराज हैं, इसलिए समय से जानकारी सामने नहीं आ सकी। गुरुवार को पता चला कि प्राचार्य दो दिन पहले ही अवकाश पर चले गए हैं। प्राचार्य के अवकाश पर जाने को भी छात्र-छात्राओं ने सकारात्मक तौर पर लिया।
इस बीच छात्र-छात्राओं को यह जानकारी दी गई कि महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा श्रुति सिंह ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को सौंप दी। मेडिकोज इसी बात को लेकर नाराज थे कि जब चार जनवरी को डीजी मेडिकल कॉलेज आकर जा चुकी थीं तो फिर आखिर जांच रिपोर्ट देने में विलंब क्यों हो रहा है।
मेडिकोज का कहना था कि शासन का एक वरिष्ठ अफसर ही प्राचार्य को बचाने की कोशिश कर रहा है। इन सबके चलते ही कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है। अब छात्रों को जब जांच रिपोर्ट सौंप दिए जाने की जानकारी हुई तो उन्होंने गुरुवार को लखनऊ तक का पदमार्च स्थगित कर दिया।
छात्रों ने कहा कि पांच दिन के भीतर कोई निर्णय न हुआ तो वे प्रशासन को सूचित किए बिना ही सीधे लखनऊ कूच कर जाएंगे।
मेडिकल छात्र-छात्राओं के लखनऊ पदमार्च को देखते हुए एसडीएम व सीओ टांडा के अलावा कई थानाध्यक्ष तथा एक प्लाटून पीएसी के जवान मेडिकल कॉलेज के आसपास मौजूद रहे। बड़ी तादाद में महिला व पुरुष सिपाहियों की भी तैनाती की गई थी।
अग्निशमन दस्ते के अलावा खुफिया पुलिस ने भी लगातार निगाह बनाए रखा। डीएम सैमुअल पॉल एन व एसपी अजीत कुमार सिन्हा फोन पर ही थोड़ी-थोड़ी देर में स्थिति की जानकारी लेते रहे। छात्र-छात्राओं ने लखनऊ पदमार्च को स्थगित करने की जानकारी दी, तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
मेडिकल कॉलेज में छात्र-छात्राओं के लखनऊ पदमार्च की घोषणा के बीच गुरुवार को ओपीडी सामान्य ढंग से चली। मरीजों व तीमारदारों के बीच कोई भी असर देखने को नहीं मिला।
पर्चा कटाने से लेकर दवा लेने और चिकित्सकों को दिखाने व जांच कराने का दौर सुचारू ढंग से चलता रहा। मरीजों व तीमारदारों को इस घटनाक्रम के चलते कोई असुविधा नहीं होने पाई।