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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Misappropriation of public funds in the Social Welfare Department

समाज कल्याण विभाग में सरकारी धन में हेराफेरी

Wed, 09 Sep 2015 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर Updated Wed, 09 Sep 2015 11:06 PM IST
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इस तरह लगभग 8 लाख रुपए की धांधली का मामला सामने आया है। डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि यह धनराशि एक करोड़ से भी ऊपर हो सकती है। फिलहाल चार बैंकों से वापस आने वाले चेक तथा उसके निस्तारण पर जांच केंद्रित की गई है।

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यह मामला हाल ही में जिलाधिकारी विवेक के संज्ञान में लाया गया था। शिकायत में कहा गया था कि  बैंकों व समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से विभिन्न योजनाओं के चेक को लेकर हेराफेरी की जा रही है। डीएम ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया।
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समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के खाते में भुगतान के लिए चेक के माध्यम से जो राशि अलग अलग बैंकों को भेजी जाती है, उनमें से कई बार अलग अलग कारणों से संबंधित पात्रों के सापेक्ष भुगतान नहीं हो पाता। ऐसे लोगों की जो राशि होती है उसे एक तय सीमा के बाद संबंधित बैंक द्वारा समाज कल्याण विभाग को भेज दी जाती है।
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नियमानुसार इस राशि को विभाग के कागजात में दर्ज कर इसके बाद उसका सदुपयोग चाहिए। पर ऐसा न करके समाज कल्याण विभाग के दो कर्मचारियों ने बैंकों से वापस आने वाले चेक को विभाग के रजिस्टर में दर्ज नहीं किया। समाज कल्याण अधिकारी का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर दो बैंकों को चेक वापस कर दिए गए।

खास बात यह कि इस बार भुगतान का आदेश नए खाता संख्या में करने का था। नए खाता संख्या से जुड़े लोग आमतौर पर लाभार्थी नहीं थे।

डीएम के निर्देश पर समाज कल्याण अधिकारी ने जांच की, तो ऐसे चेक को लेकर लगभग आठ लाख रुपये का गबन कर लेने का मामला सामने आया। लीपापोती करने के लिए आननफानन में विभाग के दो कर्मचारियों को दोषी मानते हुए उनके विरुद्घ केस दर्ज कराने की संस्तुति की गई।

डीएम ने इस पर मामले को और ज्यादा गंभीर प्रकृति का माना और कहा कि कम से कम चार बैंकों की गहन छानबीन की जाए, जिससे यह पता चल सके कि वास्तव में कितने चेकों के सापेक्ष धनराशि की हेराफेरी की गई है। गड़बड़ी का पता लगाने के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में वरिष्ठ कोषाधिकारी, एसडीएम सदर व अग्रणी जिला प्रबंधक की संयुक्त जांच टीम गठित कर दी है।

माना जा रहा है कि इस जांच में बड़ी धांधली का खुलासा हो सकता है, जिसमें समाज कल्याण विभाग के कई अधिकारी व अन्य कर्मचारी भी निश्चित तौर पर नपेंगे। अभी जिस आठ लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है, वह रानी लक्ष्मीबाई योजना से जुड़ा था। इस बीच डीएम के निर्देश पर हुई प्रारंभिक जांच के बाद लगभग सवा चार लाख रुपये अलग अलग खातों से वापस लेकर समाज कल्याण विभाग को प्राप्त हो गए हैं, लेकिन शेष रकम का अभी भी कोई पता नहीं है।

डीएम विवेक ने बताया कि प्रथम चरण में एक साथ सभी बैंकों की जांच संभव नहीं थी। गड़बड़ी का पता लगाने के लिए चार अलग अलग बैंक शाखाओं  की जांच करने का निर्देश दिया गया है।


इसमें यह पता लगाया जाएगा कि बैंकों ने पिछले चार-पांच वर्षों में कुल कितने चेक समाज कल्याण विभाग को वापस किए और इन सभी चेक का अंकन विभाग के कागजात में हुआ या नहीं। अंकन हुआ भी, तो संबंधित धनराशि का लाभ किसे मिला और क्या वह इसका पात्र था या नहीं।

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