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चिकित्सकों ने इलाज से किया मना, रात भर तड़पती रही गर्भवती
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अंबेडकरनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की मनमानी फिर सामने आई है। दिव्यांग गर्भवती महिला ने कॉलेज के चिकित्सकों पर इलाज न करने का आरोप लगाया। कहा कि वह रातभर बरामदे में दर्द से कराहती रही, लेकिन किसी चिकित्सक ने उपचार करने की जरूरत नहीं महसूस की। पति ने इमरजेंसी वार्ड में मौजूद कर्मचारियों से गुहार लगाई पर उन्होंने बाहर कर दिया। बताया जाता है कि सुबह प्राचार्य से लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद भर्ती तो किया गया पर इलाज करने के बजाय रेफर कर दिया गया। बाद में उसे टांडा के एक निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। महिला के मुताबिक, तबीयत सुधारने पर वह डीएम से मिलकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराएगी।
मामला टांडा कोतवाली क्षेत्र एकडल्ला निवासी विनीता (28) पत्नी श्यामलाल से जुड़ा है। दिव्यांग विनीता के मुताबिक, वह गर्भवती है। सोमवार रात उसे पेट में दर्द होने लगा। इस पर वह पति व एक अन्य परिवारवालों के साथ बेहतर उपचार की उम्मीद में राजकीय मेडिकल कॉलेज, सद्दरपुर पहुंची। महिला का आरोप है कि पति ने गुहार लगाई पर इमरजेंसी वार्ड में मौजूद कर्मचारियों से सुनवाई नहीं की।
इसके बाद उसे जबरन वार्ड से बाहर कर दिया गया। वह रातभर बरामदे में पड़ी दर्द से कराहती रही। सोमवार सुबह प्राचार्य से शिकायत दर्ज कराई गई तो भर्ती कर लिया गया। आरोप है कि चिकित्सकों ने उपचार करने के बजाए रेफर कर दिया। इस पर उसे मजबूर होकर टांडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। महिला ने बताया कि तबीयत सही होने पर वह डीएम से मिलकर शिकायत दर्ज कराएगी। उधर, प्राचार्य डॉ. पीके सिंह का कहना है कि एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी तो उसे भर्ती कराया था। चिकित्सकों के उपचार से मना करने जैसे कोई शिकायत नहीं थी।
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मामला टांडा कोतवाली क्षेत्र एकडल्ला निवासी विनीता (28) पत्नी श्यामलाल से जुड़ा है। दिव्यांग विनीता के मुताबिक, वह गर्भवती है। सोमवार रात उसे पेट में दर्द होने लगा। इस पर वह पति व एक अन्य परिवारवालों के साथ बेहतर उपचार की उम्मीद में राजकीय मेडिकल कॉलेज, सद्दरपुर पहुंची। महिला का आरोप है कि पति ने गुहार लगाई पर इमरजेंसी वार्ड में मौजूद कर्मचारियों से सुनवाई नहीं की।
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इसके बाद उसे जबरन वार्ड से बाहर कर दिया गया। वह रातभर बरामदे में पड़ी दर्द से कराहती रही। सोमवार सुबह प्राचार्य से शिकायत दर्ज कराई गई तो भर्ती कर लिया गया। आरोप है कि चिकित्सकों ने उपचार करने के बजाए रेफर कर दिया। इस पर उसे मजबूर होकर टांडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। महिला ने बताया कि तबीयत सही होने पर वह डीएम से मिलकर शिकायत दर्ज कराएगी। उधर, प्राचार्य डॉ. पीके सिंह का कहना है कि एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी तो उसे भर्ती कराया था। चिकित्सकों के उपचार से मना करने जैसे कोई शिकायत नहीं थी।
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