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Ambedkar Nagar News: विवाहिता को जिंदा जलाने वाले पति व देवर को उम्रकैद
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अंबेडकरनगर। अहिरौली क्षेत्र में विवाहिता को जिंदा जलाकर मार डालने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राम विलास सिंह की अदालत ने पति और देवर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 17-17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मामला वर्ष 2016 का है। रोहनापारा गांव निवासी प्रेमशंकर राजभर ने अहिरौली थाने में प्राथमिकी दर्ज कर आरोप लगाया था कि उनकी बहन मीरा की शादी करीब 10 वर्ष पहले केवारी श्रीपाल गांव निवासी अमरनाथ राजभर से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष पांच लाख रुपये नकद की मांग को लेकर मीरा को प्रताड़ित करता था। संतान न होने से भी उसे परेशान किया जाता था।अभियोजन के अनुसार 6 फरवरी 2016 की रात पति अमरनाथ राजभर, ससुर राधेश्याम और देवर जगन्नाथ राजभर ने मिलकर मीरा को जिंदा जलाकर मार डाला था। मामले में पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए थे। वहीं बचाव पक्ष ने इसे आत्महत्या का मामला बताते हुए मृतका के मानसिक अवसाद में होने की दलील दी थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पति अमरनाथ राजभर और देवर जगन्नाथ राजभर को हत्या और क्रूरता का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 17-17 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। मामले में सह आरोपी राधेश्याम की मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ वाद समाप्त कर दिया गया था।
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मामला वर्ष 2016 का है। रोहनापारा गांव निवासी प्रेमशंकर राजभर ने अहिरौली थाने में प्राथमिकी दर्ज कर आरोप लगाया था कि उनकी बहन मीरा की शादी करीब 10 वर्ष पहले केवारी श्रीपाल गांव निवासी अमरनाथ राजभर से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष पांच लाख रुपये नकद की मांग को लेकर मीरा को प्रताड़ित करता था। संतान न होने से भी उसे परेशान किया जाता था।अभियोजन के अनुसार 6 फरवरी 2016 की रात पति अमरनाथ राजभर, ससुर राधेश्याम और देवर जगन्नाथ राजभर ने मिलकर मीरा को जिंदा जलाकर मार डाला था। मामले में पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए थे। वहीं बचाव पक्ष ने इसे आत्महत्या का मामला बताते हुए मृतका के मानसिक अवसाद में होने की दलील दी थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पति अमरनाथ राजभर और देवर जगन्नाथ राजभर को हत्या और क्रूरता का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 17-17 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। मामले में सह आरोपी राधेश्याम की मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ वाद समाप्त कर दिया गया था।
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