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मदरसा शिक्षकों को 54 माह से मानदेय नहीं मिला
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अंबेडकरनगर। 54 माह का बकाया मानदेय भुगतान किए जाने, शिक्षक नियमावली बनाए जाने, प्रतिमाह मानदेय का भुगतान किए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को मॉडर्न मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट के निकट धरना दिया। कहा गया कि मदरसा शिक्षक लंबे समय से विभिन्न मुश्किलों से संघर्ष कर रहे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
मानदेय भुगतान न होने से उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का निस्तारण न हुआ तो जंतरमंतर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। बाद में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. जमाल अहमद अंसारी ने कहा कि 54 माह का लंबा समय बीत चुका है लेकिन अब तक मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है। मानदेय भुगतान न होने से मदरसा शिक्षकों के समक्ष विभिन्न आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। जब भी बकाया मानदेय की मांग की जाती है तो सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है।
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नतीजतन उनकी आर्थिक मुश्किलें जस की तस बनी हुई हैं। कहा कि मदरसा शिक्षकों की शिक्षक नियमावली बनाए जाने की मांग को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की भी सुध नहीं है।
शिक्षक नेता जियाउद्दीन ने कहा कि मदरसा शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी के साथ कर रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। माहे आलम, मोहम्मद मुस्तकीम, अब्दुल वदूद, गुलाम दस्तगीर, मोहममद याकूब व मोहम्मद अकबर ने कहा कि अब और उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यदि शीघ्र ही उनकी समस्याओं का निस्तारण न हुआ तो जंतरमंतर दिल्ली पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
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मानदेय भुगतान न होने से उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का निस्तारण न हुआ तो जंतरमंतर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। बाद में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
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अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. जमाल अहमद अंसारी ने कहा कि 54 माह का लंबा समय बीत चुका है लेकिन अब तक मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है। मानदेय भुगतान न होने से मदरसा शिक्षकों के समक्ष विभिन्न आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। जब भी बकाया मानदेय की मांग की जाती है तो सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है।
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नतीजतन उनकी आर्थिक मुश्किलें जस की तस बनी हुई हैं। कहा कि मदरसा शिक्षकों की शिक्षक नियमावली बनाए जाने की मांग को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की भी सुध नहीं है।
शिक्षक नेता जियाउद्दीन ने कहा कि मदरसा शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी के साथ कर रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। माहे आलम, मोहम्मद मुस्तकीम, अब्दुल वदूद, गुलाम दस्तगीर, मोहममद याकूब व मोहम्मद अकबर ने कहा कि अब और उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यदि शीघ्र ही उनकी समस्याओं का निस्तारण न हुआ तो जंतरमंतर दिल्ली पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।