{"_id":"5d58314e8ebc3e89ef2cb877","slug":"light-ambedkar-nagar-news-lko476688624","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौरावां-त्रिपुला बिजली लाइन में फॉल्ट, 36 घंटे से बत्ती गुल, डेढ़ लाख आबादी बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौरावां-त्रिपुला बिजली लाइन में फॉल्ट, 36 घंटे से बत्ती गुल, डेढ़ लाख आबादी बेहाल
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डेढ़ लखीरों (रायबरेली)। पावर कॉर्पोरेशन के अफसरों की लापरवाही ग्रामीणों, किसानों और सरकारी संस्थाओं पर भारी पड़ रही है। खीरों और सेमरी विद्युत उपकेंद्रों से 36 घंटे से बिजली आपूर्ति ठप है। इससे डेढ़ लाख की आबादी बेहाल है। खीरों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सीडीपीओ कार्यालय, थाना, ब्लॉक और कल कारखानों का काम भी बाधित है। बिजली चालित नलकूप भी बंद हैं।
ये समस्या मौरावां और त्रिपुला से आने वाली बिजली की लाइन में फॉल्ट की वजह से है। 36 घंटे बीतने पर भी अधिकारी तकनीकी कमी नहीं खोज पाए हैं।
सेमरी और खीरों विद्युत उपकेंद्र को जिला मुख्यालय स्थित त्रिपुला ट्रांसमिशन से बिजली मिलती थी, लेकिन इसमें आए दिन फॉल्ट होता था। इस समस्या से निदान के लिए मौरावां लाइन बनाई गई। इस लाइन को बने हुए पखवारा भी नहीं बीता कि फॉल्ट शुरू हो गए। अफसरों की लापरवाही से दोनों लाइनों में फॉल्ट होने से आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। 10 अगस्त से मौरावां की लाइन चालू हुई थी। दोनों उपकेंद्र इसी लाइन से जोड़कर चलाए गए। इस दौरान त्रिपुला की लाइन में आए फॉल्ट को ठीक कराना जरूरी नहीं समझा। यदि दोनों में एक लाइन भी दुरुस्त होती तो इतनी परेशानी न होती।
खीरों विद्युत उपकेंद्र के अवर अभियंता रामनाथ ने बताया कि त्रिपुला लाइन में खराबी आ गई थी। इस वजह से खीरों और सेमरी जाने वाली लाइन को मौरावां लाइन से जोड़ दिया गया, ताकि उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली मिल सके। मगर मौरावां लाइन में भी खराबी आने से आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। मौरावां लाइन का फॉल्ट ठीक करके जल्दी ही आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। मौरावां लाइन से खीरों, सेमरी उपकेंद्र को जोड़ने का मकसद उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली देना था। त्रिपुला लाइन को इमरजेंसी के लिए रखा गया है। दोनों लाइनों में फॉल्ट आने से समस्या आई है।
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उन्नाव जिले के मौरावां ट्रांसमिशन से खीरों तक 32 किलोमीटर लाइन बिछाई गई। इस लाइन का बाकायदा ट्रायल हुआ। ट्रायल ओके होने के बाद 10 अगस्त को लाइन चालू कर दी गई। मगर आश्चर्य इस बात ये है कि यह लाइन छह दिन में ही ध्वस्त हो गई। लाइन के खंभे टेढ़े हो गए हैं, जो आंधी में गिर सकते हैं। तार भी ढीले पड़ गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लाइन को बनाने में धन का बंदरबांट जरूर किया गया होगा। इसी तरह जिला मुख्यालय त्रिपुला से खीरों को गई लाइन लगभग 75 किलोमीटर लंबी है। ये लाइन पुरानी है, जिसमें आए दिन फॉल्ट होता रहता है, मगर इसके सुधार के लिए अधिकारी कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं।
खीरों निवासी अशोक कुमार, डॉ. अमान अंजुम, मेड़ौली के संजय कुमार ने बताया कि मौरावां से नई लाइन चालू होने से भी लोगों को राहत नहीं मिली है। आए दिन कहीं न कहीं फॉल्ट बना रहता है। फिरोजाबाद के मन्नूलाल, छत्ता का पुरवा निवासी राममोहन, मथुराखेड़ा के रोहित शर्मा ने कहा कि बारिश नहीं होने और बिजली ठप होने से किसान धान की फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे फसलें सूख रहीं हैं। उपभोक्ताओं ने समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
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ये समस्या मौरावां और त्रिपुला से आने वाली बिजली की लाइन में फॉल्ट की वजह से है। 36 घंटे बीतने पर भी अधिकारी तकनीकी कमी नहीं खोज पाए हैं।
सेमरी और खीरों विद्युत उपकेंद्र को जिला मुख्यालय स्थित त्रिपुला ट्रांसमिशन से बिजली मिलती थी, लेकिन इसमें आए दिन फॉल्ट होता था। इस समस्या से निदान के लिए मौरावां लाइन बनाई गई। इस लाइन को बने हुए पखवारा भी नहीं बीता कि फॉल्ट शुरू हो गए। अफसरों की लापरवाही से दोनों लाइनों में फॉल्ट होने से आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। 10 अगस्त से मौरावां की लाइन चालू हुई थी। दोनों उपकेंद्र इसी लाइन से जोड़कर चलाए गए। इस दौरान त्रिपुला की लाइन में आए फॉल्ट को ठीक कराना जरूरी नहीं समझा। यदि दोनों में एक लाइन भी दुरुस्त होती तो इतनी परेशानी न होती।
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खीरों विद्युत उपकेंद्र के अवर अभियंता रामनाथ ने बताया कि त्रिपुला लाइन में खराबी आ गई थी। इस वजह से खीरों और सेमरी जाने वाली लाइन को मौरावां लाइन से जोड़ दिया गया, ताकि उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली मिल सके। मगर मौरावां लाइन में भी खराबी आने से आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। मौरावां लाइन का फॉल्ट ठीक करके जल्दी ही आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। मौरावां लाइन से खीरों, सेमरी उपकेंद्र को जोड़ने का मकसद उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली देना था। त्रिपुला लाइन को इमरजेंसी के लिए रखा गया है। दोनों लाइनों में फॉल्ट आने से समस्या आई है।
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उन्नाव जिले के मौरावां ट्रांसमिशन से खीरों तक 32 किलोमीटर लाइन बिछाई गई। इस लाइन का बाकायदा ट्रायल हुआ। ट्रायल ओके होने के बाद 10 अगस्त को लाइन चालू कर दी गई। मगर आश्चर्य इस बात ये है कि यह लाइन छह दिन में ही ध्वस्त हो गई। लाइन के खंभे टेढ़े हो गए हैं, जो आंधी में गिर सकते हैं। तार भी ढीले पड़ गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लाइन को बनाने में धन का बंदरबांट जरूर किया गया होगा। इसी तरह जिला मुख्यालय त्रिपुला से खीरों को गई लाइन लगभग 75 किलोमीटर लंबी है। ये लाइन पुरानी है, जिसमें आए दिन फॉल्ट होता रहता है, मगर इसके सुधार के लिए अधिकारी कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं।
खीरों निवासी अशोक कुमार, डॉ. अमान अंजुम, मेड़ौली के संजय कुमार ने बताया कि मौरावां से नई लाइन चालू होने से भी लोगों को राहत नहीं मिली है। आए दिन कहीं न कहीं फॉल्ट बना रहता है। फिरोजाबाद के मन्नूलाल, छत्ता का पुरवा निवासी राममोहन, मथुराखेड़ा के रोहित शर्मा ने कहा कि बारिश नहीं होने और बिजली ठप होने से किसान धान की फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे फसलें सूख रहीं हैं। उपभोक्ताओं ने समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।