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...बस तेरे देखने का तरीका अजीब है
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अंबेडकरनगर के हंसवर स्थित भूलेपुर में आयोजित मुशायरे में अतिथियों का होता स्वागत।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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हजपुरा (अंबेडकरनगर)। उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश के सहयोग से पयाम फाउंडेशन के तत्वावधान में मंगलवार की रात आल इंडिया मुशायरे का आयोजन हंसवर स्थित भूलेपुर बाजार में हुआ। जलाल सिद्दीकी के संरक्षण व नजीर अहमद अंसारी की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि सैय्यद सलाहुद्दीन किछौछवी एवं विशिष्ट अतिथि बसखारी ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र मोहन सिंह उर्फ संजय सिंह रहे। शायरों ने अपने-अपने अंदाज में शायरी पढ़कर लोगों का मन मोह लिया।
संरक्षक जलाल सिद्दीकी ने कहा कि शायरी उर्दू भाषा और साहित्य का दिल है। उर्दू भाषा में आकर्षण और सुंदरता है। इसके कारण हर कोई उसका दीवाना हो जाता है। मुख्य अतिथि सैयद सलाहुद्दीन किछौछवी एवं विशिष्ट अतिथि संजय सिंह ने कहा कि मुशायरे से आपसी मेलजोल और सौहार्द को बल मिलता है। देश की आजादी में शायरों ने क्रांतिकारी नज्मे लिखकर देश को गुलामी से आजाद कराया। शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि उर्दू भाषा ने विश्व शांति का संदेश दिया है। उसकी मिठास के सब दीवाने हैं। नजीर अहमद अंसारी ने अध्यक्षीय भाषण कहा कि उर्दू भाषा ने मोहब्बत का पैगाम दिया है।
अल्ताफ जिया मालेगांव महाराष्ट्र ने पढ़ा कि आइना है अजीब न चेहरा अजीब है, बस तेरे देखने का तरीका अजीब है। ताहिर फराज रामपुरी ने पढ़ा कि कहीं खुलूस की खुशबू मिले तो रुक जाऊं, मेरे लिए कोई आंसू खिले तो रुक जाऊं। शायर नासिर फराज उड़ीसा, शाइस्ता सना बरेली, हामिद भुसावली, तनवीर जलालपुरी, जमील खैराबादी, जमशेद फैजाबादी, अख्तर आजमी, अली बाराबंकवी, अचानक मऊ, डॉ. आनंद ओझा, मजहर जमाल, विभा शुक्ल, वसीम रामपुरी, आदि शायरों ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. शोएब अख्तर, नेता अच्छन सिद्दीकी, डॉ. फिरोज अख्तर, दानिश फिरोज, समीउल्लाह सिद्दीकी, जियाउलहक, इमदादुल्लाह अंसारी, वकील, मंजर सिद्दीकी, शमीम अहमद आदि ने विशेष सहयोग किया।
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संरक्षक जलाल सिद्दीकी ने कहा कि शायरी उर्दू भाषा और साहित्य का दिल है। उर्दू भाषा में आकर्षण और सुंदरता है। इसके कारण हर कोई उसका दीवाना हो जाता है। मुख्य अतिथि सैयद सलाहुद्दीन किछौछवी एवं विशिष्ट अतिथि संजय सिंह ने कहा कि मुशायरे से आपसी मेलजोल और सौहार्द को बल मिलता है। देश की आजादी में शायरों ने क्रांतिकारी नज्मे लिखकर देश को गुलामी से आजाद कराया। शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि उर्दू भाषा ने विश्व शांति का संदेश दिया है। उसकी मिठास के सब दीवाने हैं। नजीर अहमद अंसारी ने अध्यक्षीय भाषण कहा कि उर्दू भाषा ने मोहब्बत का पैगाम दिया है।
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अल्ताफ जिया मालेगांव महाराष्ट्र ने पढ़ा कि आइना है अजीब न चेहरा अजीब है, बस तेरे देखने का तरीका अजीब है। ताहिर फराज रामपुरी ने पढ़ा कि कहीं खुलूस की खुशबू मिले तो रुक जाऊं, मेरे लिए कोई आंसू खिले तो रुक जाऊं। शायर नासिर फराज उड़ीसा, शाइस्ता सना बरेली, हामिद भुसावली, तनवीर जलालपुरी, जमील खैराबादी, जमशेद फैजाबादी, अख्तर आजमी, अली बाराबंकवी, अचानक मऊ, डॉ. आनंद ओझा, मजहर जमाल, विभा शुक्ल, वसीम रामपुरी, आदि शायरों ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. शोएब अख्तर, नेता अच्छन सिद्दीकी, डॉ. फिरोज अख्तर, दानिश फिरोज, समीउल्लाह सिद्दीकी, जियाउलहक, इमदादुल्लाह अंसारी, वकील, मंजर सिद्दीकी, शमीम अहमद आदि ने विशेष सहयोग किया।
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