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Ambedkar Nagar News: फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के मामले में संविदाकर्मी से पूछताछ
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अंबेडकरनगर। नगर पालिका परिषद टांडा से जुड़े फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में पुलिस ने मंगलवार को एक नगर पालिका कर्मचारी को पूछताछ के लिए बुलाया। इसकी भनक अन्य कर्मियों को लगने के बाद सभी कोतवाली पहुंच गए। बाद में पुलिस ने पूछताछ के बाद निकायकर्मी को छोड़ दिया।
टांडा के मीरानपुर निवासी शचींद्र जायसवाल के पिता उमाशंकर जायसवाल का निधन सात सितंबर 2017 को किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ में हुआ था। चार अक्तूबर 2017 को उन्होंने पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। बीते माह उनको पता चला कि उनके पिता का एक और मृत्यु प्रमाणपत्र सात नवंबर 2022 को नगर पालिका परिषद टांडा से जारी कराकर उनकी संपत्ति हड़पने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच में सामने आया कि फर्जी प्रमाणपत्र रविशंकर जायसवाल ने बनवाया था। जिसमें उसने झूठा शपथ पत्र लगाकर दावा किया कि उसके चाचा उमाशंकर जायसवाल की मौत छह सितंबर 2017 को उसके घर पर हुई थी। जबकि उनके पिता 35-36 वर्ष पूर्व अपने भाइयों और पट्टीदारों से अलग रहते थे। इसके बाद पुलिस ने रविशंकर जायसवाल, एक निकाय कर्मी सहित अन्य पर धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी प्रकरण की विवेचना में निकाय कर्मी को पुलिस ने बुलाया था। सीओ शुभम कुमार ने बताया कि निकाय कर्मी को एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। बाद में उसे छोड़ दिया गया। संवाद
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टांडा के मीरानपुर निवासी शचींद्र जायसवाल के पिता उमाशंकर जायसवाल का निधन सात सितंबर 2017 को किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ में हुआ था। चार अक्तूबर 2017 को उन्होंने पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। बीते माह उनको पता चला कि उनके पिता का एक और मृत्यु प्रमाणपत्र सात नवंबर 2022 को नगर पालिका परिषद टांडा से जारी कराकर उनकी संपत्ति हड़पने का प्रयास किया जा रहा है।
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जांच में सामने आया कि फर्जी प्रमाणपत्र रविशंकर जायसवाल ने बनवाया था। जिसमें उसने झूठा शपथ पत्र लगाकर दावा किया कि उसके चाचा उमाशंकर जायसवाल की मौत छह सितंबर 2017 को उसके घर पर हुई थी। जबकि उनके पिता 35-36 वर्ष पूर्व अपने भाइयों और पट्टीदारों से अलग रहते थे। इसके बाद पुलिस ने रविशंकर जायसवाल, एक निकाय कर्मी सहित अन्य पर धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी प्रकरण की विवेचना में निकाय कर्मी को पुलिस ने बुलाया था। सीओ शुभम कुमार ने बताया कि निकाय कर्मी को एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। बाद में उसे छोड़ दिया गया। संवाद
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