{"_id":"e7920bb70ca856b636b12afc817461d8","slug":"insurence-company-has-to-pay-clame-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमा कंपनी को क्लेम देने के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमा कंपनी को क्लेम देने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Sat, 20 Jun 2015 11:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भीटी थाना क्षेत्र के चंदापुर रामबाबा निवासिनी श्याम देवी ने अधिवक्ता संतोष कुमार विश्वकर्मा के माध्यम से बीते दिनों जिला उपभोक्ता विवाद परितोश फोरम में एक वाद दायर किया। बताया कि वह बीते दिनों अपने परिवार के साथ एक कार से यात्रा कर रही थीं। इसमें चालक सहित कुल आठ लोग सवार थे।
इसमें 3 वर्ष व 5 वर्ष के दो बच्चे भी शामिल थे। अचानक कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उनके कार का बीमा था। इस आधार पर उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शाखा कार्यालय शाखा प्रबंधक से बीमा का लाभ दिलाने की मांग की।
बीमा कंपनी के शाखा प्रबंधक ने यह तर्क देकर बीमा का लाभ दिलाने में असमर्थता जता दिया कि कार में क्षमता से अधिक सवारी बैठी थी। कार की क्षमता 6 लोगों की हैं। इस पर उन्होंने न्यायालय का शरण लिया। अधिवक्ता श्री विश्वकर्मा ने बताया कि मामला फोरम अध्यक्ष विजय प्रकाश मिश्र के समक्ष उठाया गया।
विज्ञापन
अधिवक्ता ने बच्चों की उम्र का तर्क दिया कि बच्चे काफी छोटे थे। ऐसे में वह सवारी की श्रेणी में नहीं आते। अध्यक्ष ने अधिवक्ता के तर्क पर सहमति जतायी। बीमा कंपनी को निर्देशित किया कि परिवादी को बीमा पॉलिसी का एक लाख रुपए 6 प्रतिशत ब्याज सहित आदेश के 45 दिन के अंदर मुहैया कराए।
साथ ही परिवादी विपक्षी से हुई मानसिक पीड़ा एवं शारीरिक कष्ट के रूप में पाच हजार तथा परिवाद व्यय के रूप में दो हजार रुपए पाने का भी हकदार है। ऐसे में बगैर विलंब किए यह भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
विज्ञापन
इसमें 3 वर्ष व 5 वर्ष के दो बच्चे भी शामिल थे। अचानक कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उनके कार का बीमा था। इस आधार पर उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शाखा कार्यालय शाखा प्रबंधक से बीमा का लाभ दिलाने की मांग की।
विज्ञापन
बीमा कंपनी के शाखा प्रबंधक ने यह तर्क देकर बीमा का लाभ दिलाने में असमर्थता जता दिया कि कार में क्षमता से अधिक सवारी बैठी थी। कार की क्षमता 6 लोगों की हैं। इस पर उन्होंने न्यायालय का शरण लिया। अधिवक्ता श्री विश्वकर्मा ने बताया कि मामला फोरम अध्यक्ष विजय प्रकाश मिश्र के समक्ष उठाया गया।
विज्ञापन
अधिवक्ता ने बच्चों की उम्र का तर्क दिया कि बच्चे काफी छोटे थे। ऐसे में वह सवारी की श्रेणी में नहीं आते। अध्यक्ष ने अधिवक्ता के तर्क पर सहमति जतायी। बीमा कंपनी को निर्देशित किया कि परिवादी को बीमा पॉलिसी का एक लाख रुपए 6 प्रतिशत ब्याज सहित आदेश के 45 दिन के अंदर मुहैया कराए।
साथ ही परिवादी विपक्षी से हुई मानसिक पीड़ा एवं शारीरिक कष्ट के रूप में पाच हजार तथा परिवाद व्यय के रूप में दो हजार रुपए पाने का भी हकदार है। ऐसे में बगैर विलंब किए यह भुगतान सुनिश्चित किया जाए।