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जैविक खेती के जरिए आय को बढ़ाएं किसान
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महरुआ (अंबेडकरनगर)। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत कृषि विज्ञान केंद्र पांती में आयोजित तीन दिवसीय व्यावसायिक जैविक खेती के प्रशिक्षण का समापन हो गया। इसमें प्रशिक्षणार्थियों को जैविक खेती की विधि तथा उसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि जैविक खेती हर नजरिए से लाभप्रद है। उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ज्यादा लाभ कमाया जा सकता है।
केंद्र अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामजीत ने कहा कि जैविक पद्धति अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर किया जा सकता है। यदि मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर है तो फसल उत्पादन भी ठीक होगा। इससे किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। कहा कि जैविक खेती को तेजी से अपनाया जा रहा है। इसका मुख्य कारण फसलों का बेहतर उत्पादन है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. प्रवीण कुमार मौर्य ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसका लाभ किसानों को उठाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि रासायनिक खादों के चलते तमाम प्रकार की दिक्कतें उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे में किसानों को गोबर की खाद का प्रयोग खेतों में ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है। साथ ही फसलें स्वस्थ होती हैं। उत्पादन क्षमता बढ़ती है।
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल कुल 35 प्रगतिशील किसानों को प्रमाण पत्र दिया गया। इस मौके पर डॉ. वीणा सचान, डॉ. विद्यासागर, डॉ. प्रदीप कुमार, शिवपूजन सिंह, हरिवंश सिंह, रामजीत वर्मा व रामशंकर सिंह आदि मौजूद रहे।
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केंद्र अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामजीत ने कहा कि जैविक पद्धति अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर किया जा सकता है। यदि मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर है तो फसल उत्पादन भी ठीक होगा। इससे किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। कहा कि जैविक खेती को तेजी से अपनाया जा रहा है। इसका मुख्य कारण फसलों का बेहतर उत्पादन है।
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कार्यक्रम समन्वयक डॉ. प्रवीण कुमार मौर्य ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसका लाभ किसानों को उठाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि रासायनिक खादों के चलते तमाम प्रकार की दिक्कतें उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे में किसानों को गोबर की खाद का प्रयोग खेतों में ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है। साथ ही फसलें स्वस्थ होती हैं। उत्पादन क्षमता बढ़ती है।
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल कुल 35 प्रगतिशील किसानों को प्रमाण पत्र दिया गया। इस मौके पर डॉ. वीणा सचान, डॉ. विद्यासागर, डॉ. प्रदीप कुमार, शिवपूजन सिंह, हरिवंश सिंह, रामजीत वर्मा व रामशंकर सिंह आदि मौजूद रहे।