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Ambedkar Nagar News: सुदामा चरित्र की सीख जीवन में उतारें, तभी सार्थक होगी भक्ति

Sat, 21 Feb 2026 11:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Sat, 21 Feb 2026 11:52 PM IST
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Implement the teachings of Sudama's character in your life, only then will devotion be meaningful
आलापुर (अंबेडकरनगर)। आलापुर क्षेत्र के बड़की पड़ौली, बनकटा बुजुर्ग में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भक्ति गीतों व हरिनाम संकीर्तन से गूंज उठा।
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प्रवाचक चंद्रेश कुमार महाराज ने सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का मार्मिक चित्रण करते हुए कहा कि यह प्रसंग केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र हमें सिखाता है कि विपन्नता में भी श्रद्धा और विश्वास अडिग रहना चाहिए। सुदामा के चरण धोने के प्रसंग पर अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। मधुर भक्ति गीतों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। महाराज जी ने कहा कि आज की मित्रता प्रायः स्वार्थ पर आधारित हो गई है, जबकि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता त्याग, समर्पण और सच्चे प्रेम की मिसाल है। प्रवाचक ने श्रद्धालुओं से लोभ, अहंकार और ईर्ष्या त्यागकर प्रेम, सेवा और सहयोग का मार्ग अपनाने का आह्वान किया। डॉ. श्रीराम पाण्डेय व सूर्यनाथ पाण्डेय के सहयोग से आयोजित कथा में आलोक त्रिपाठी, शैलेश व ऋषि कुमार समेत तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे।
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परीक्षित प्रसंग से प्रायश्चित का संदेश
कटेहरी। आदमपुर तिंदौली में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को प्रवाचक आचार्य मुकेशानंद ने राजा परीक्षित के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कथा में परीक्षित के जन्म, उनके द्वारा हुई भूल और एक ब्राह्मण के श्राप की घटना जीवन को दिशा देने वाली सीख देती है। मनुष्य से गलती हो जाना असामान्य नहीं, किंतु समय रहते सुधार और प्रायश्चित आवश्यक है। अन्यथा वही गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। इस मौके पर जयप्रकाश चतुर्वेदी, लालजी चतुर्वेदी, रामजी चतुर्वेदी, ललित चतुर्वेदी, शैलेश चतुर्वेदी, बद्रीप्रसाद सिंह, महेंद्र यादव, छोटे लाल यादव (प्रधान) सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।
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