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मानकों की अनदेखी कर धड़ल्ले से चल रहे कारखाने
amar ujala
Updated Fri, 24 Feb 2017 09:58 PM IST
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जिले में भी प्रदूषण को लेकर मानकों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट भले ही प्रदूषण नियंत्रण को लेकर लगातार गंभीर व सख्त है, लेकिन सरकारी स्तर पर इसे लेकर जिले में सभी जिम्मेदार मशीनरी का रवैया शिथिल है। यूं तो जिले में औद्योगिक इकाइयों की लंबी शृंखला मौजूद नहीं है, लेकिन इक्कादुक्का बड़े औद्योगिक संयंत्रों के अलावा छोटे कल कारखानों में भी प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी अक्सर परेशानी पैदा करते हैं। इससे न सिर्फ गंदगी फैलती है, बल्कि कई तरह की बीमारी होने की आशंका भी बनी रहती है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे लेकर लोगों द्वारा लगातार आवाज उठाने के बावजूद सरकारें व जिलास्तर की मशीनरी इस मनमानी पर अंकुश लगाने को लेकर प्रत्यक्ष तौर पर गंभीर नजर नहीं आ रहीं। नतीजा यह कि सुप्रीम कोर्ट को लगातार इस पर दखल देना पड़ रहा है।
बीते दिनों ही उच्च न्यायालय ने निर्देश जारी कर कहा कि तीन महीने में प्राथमिक औद्योगिक प्रवाह शोधन संयंत्र (ईटीपी) लगना अनिवार्य किया जाए। सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती पूरी तरह वाजिब इसलिए भी है, क्योंकि औद्योगिक इकाइयों से पानी के साथ निकलने वाले अवशेष अक्सर घातक होते हैं। नालों या नालियों के माध्यम से यह अवशेष लगातार यहां वहां फैलते रहते हैं, जिनसे प्रदूषण बढ़ने के साथ साथ लोगों के लिए नुकसानदायक भी है।
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करीब चार साल पहले तमसा नदी का पानी अचानक काला पड़ने के साथ हजारों मछलियां मरकर सतह पर तैरती दिखी थीं। ऐसा चीनी मिल मिझौड़ा से आने वाले अवशेषयुक्त पानी के कारण हुआ था। इसे लेकर काफी हंगामा भी हुआ था। हालांकि चीनी मिल के गन्ना उपप्रबंधक अरविंद सिंह के मुताबिक मिल में ईटीपी लगी हुई है और शोधित करने के बाद ही पानी बाहर जा रहा हैै। कुछ ऐसा ही हाल टांडा स्थित जेपी सीमेंट का भी है।
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उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी अक्सर परेशानी पैदा करते हैं। इससे न सिर्फ गंदगी फैलती है, बल्कि कई तरह की बीमारी होने की आशंका भी बनी रहती है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे लेकर लोगों द्वारा लगातार आवाज उठाने के बावजूद सरकारें व जिलास्तर की मशीनरी इस मनमानी पर अंकुश लगाने को लेकर प्रत्यक्ष तौर पर गंभीर नजर नहीं आ रहीं। नतीजा यह कि सुप्रीम कोर्ट को लगातार इस पर दखल देना पड़ रहा है।
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बीते दिनों ही उच्च न्यायालय ने निर्देश जारी कर कहा कि तीन महीने में प्राथमिक औद्योगिक प्रवाह शोधन संयंत्र (ईटीपी) लगना अनिवार्य किया जाए। सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती पूरी तरह वाजिब इसलिए भी है, क्योंकि औद्योगिक इकाइयों से पानी के साथ निकलने वाले अवशेष अक्सर घातक होते हैं। नालों या नालियों के माध्यम से यह अवशेष लगातार यहां वहां फैलते रहते हैं, जिनसे प्रदूषण बढ़ने के साथ साथ लोगों के लिए नुकसानदायक भी है।
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करीब चार साल पहले तमसा नदी का पानी अचानक काला पड़ने के साथ हजारों मछलियां मरकर सतह पर तैरती दिखी थीं। ऐसा चीनी मिल मिझौड़ा से आने वाले अवशेषयुक्त पानी के कारण हुआ था। इसे लेकर काफी हंगामा भी हुआ था। हालांकि चीनी मिल के गन्ना उपप्रबंधक अरविंद सिंह के मुताबिक मिल में ईटीपी लगी हुई है और शोधित करने के बाद ही पानी बाहर जा रहा हैै। कुछ ऐसा ही हाल टांडा स्थित जेपी सीमेंट का भी है।