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डॉक्टर नदारद तो कहीं फार्मासिस्ट ने किया इलाज
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अंबेडकरनगर के जहांगीरगंज सीएचसी पर रहा सन्नाटा।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। जिले के सरकारी अस्पतालों में अवकाश के दिनों में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे है। उपचार को लेकर चिकित्सकों व कर्मचारियों की ओर से बरती जाने वाली लापरवाही मरीजों का दर्द बढ़ा रही हैं।
अवकाश में भी मरीजों का उपचार बेहतर ढंग से हो सके, इसके लिए सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन प्रत्येक रविवार को किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आ पा रहा है।
इमरजेंसी सेवाओं से लेकर मेले तक के आयोजन में बरती जाने वाली लापरवाही का ही नतीजा है कि मरीजों की आमद सरकारी अस्पतालों की बजाय अवकाश में निजी अस्पतालों की तरफ ज्यादा होती है। इससे मरीजों को आर्थिक चपत भी लगती है। रविवार को टीम ने विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का जायजा लिया तो वहां मरीजों के हित को लेकर सजगता देखने को नहीं दिखी।
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फार्मासिस्ट ने किया उपचार
पीएचसी नरियांव
टीम मौके पर पहुंची तो वहां सीएम जन आरोग्य मेले का आयोजन तो हुआ, लेकिन निर्धारित समय दो बजे से आधा घंटा पहले ही बंद हो गया था। इससे इतर आने वाले मरीजों का इलाज फार्मासिस्ट इंद्राज यादव करते मिले। जानकारी हासिल करने पर बताया गया कि चिकित्सक डॉ. रंजीत चंद्रा किसी कार्य से सीएचसी जहांगीरगंज गए हुए हैं। तीमारदार जगदीश कुमार ने कहा कि वह अपनी पत्नी के इलाज के लिए आए थे। अब जबकि चिकित्सक नहीं हैं, तो फार्मासिस्ट को ही दिखा रहे हैं। कहा कि इससे पहले भी अक्सर फार्मासिस्ट के सहारे ही अस्पताल का संचालन होता है।
ओपीडी बंद, नहीं दिखे मरीज
सीएचसी जहांगीरगंज
इमरजेंसी में चिकित्सक डॉ. केके शर्मा व फार्मासिस्ट सतीशचंद्र मिश्र तो मौजूद थे, लेकिन यहां पूरी तरह सन्नाटा पसरा था। एक भी मरीज मौके पर नहीं मिला। ओपीडी पूरी तरह से बंद मिली। चिकित्सक ने बताया कि जो भी मरीज आता है, उसका बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है। हालांकि अस्पताल के बाहर मिले तीमारदार राजेंद्र व मजलूम ने कहा कि विलंब से चिकित्सकों का अस्पताल में आना व समय से पहले चले जाना आम बात हो गई है। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदारों से की भी गई, लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा सकी है।
पसरा रहा सन्नाटा
सीएचसी नगपुर
दोपहर एक बजे जब टीम अस्पताल पहुंची तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। इमरजेंसी में डॉ. किरीशचंद्र यादव व फार्मासिस्ट गुलाब गौतम मौजूद थे। चिकित्सक ने बताया कि दो मरीजों का इलाज हुआ है। इसमें कल्याणपुर निवासी रुचि पुत्री बाबराम व करीमपुर के वीरेंद्र कुमार शामिल रहेु। हालांकि परिसर में सफाई का अभाव दिखा। चिकित्सक के अनुसार नियमित सफाई की जाती है।
नहीं मिला एक भी मरीज
सीएचसी भीटी
सीएचसी में जब टीम पहुंची तो सीएम जन आरोग्य मेले का आयोजन तो होता मिला, लेकिन मरीज एक भी नहीं दिखा। पूरी तरह से सन्नाटे का माहौल था। हालांकि कागज पर 52 मरीजों का इलाज दिखाया गया था। इसमें एलोपैथ के 27, आयुर्वेद के 12 व होमियोपैथ के 13 मरीज शामिल रहे। सीएचसी प्रभारी डॉ. ओमप्रकाश मिश्र ने बताया कि मेले में आने वाले मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज किया गया।
जिम्मेदारों को दिए गए निर्देश
अवकाश के दिनों में सीएचसी व पीएचसी पर आने वाले मरीजों का इलाज सुचारु रूप से हो, इसके लिए जिम्मेदारों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। दिशा-निर्देशों का पालन भी हो रहा है।
डॉ. श्रीकांत शर्मा, सीएमओ
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अवकाश में भी मरीजों का उपचार बेहतर ढंग से हो सके, इसके लिए सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन प्रत्येक रविवार को किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आ पा रहा है।
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इमरजेंसी सेवाओं से लेकर मेले तक के आयोजन में बरती जाने वाली लापरवाही का ही नतीजा है कि मरीजों की आमद सरकारी अस्पतालों की बजाय अवकाश में निजी अस्पतालों की तरफ ज्यादा होती है। इससे मरीजों को आर्थिक चपत भी लगती है। रविवार को टीम ने विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का जायजा लिया तो वहां मरीजों के हित को लेकर सजगता देखने को नहीं दिखी।
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फार्मासिस्ट ने किया उपचार
पीएचसी नरियांव
टीम मौके पर पहुंची तो वहां सीएम जन आरोग्य मेले का आयोजन तो हुआ, लेकिन निर्धारित समय दो बजे से आधा घंटा पहले ही बंद हो गया था। इससे इतर आने वाले मरीजों का इलाज फार्मासिस्ट इंद्राज यादव करते मिले। जानकारी हासिल करने पर बताया गया कि चिकित्सक डॉ. रंजीत चंद्रा किसी कार्य से सीएचसी जहांगीरगंज गए हुए हैं। तीमारदार जगदीश कुमार ने कहा कि वह अपनी पत्नी के इलाज के लिए आए थे। अब जबकि चिकित्सक नहीं हैं, तो फार्मासिस्ट को ही दिखा रहे हैं। कहा कि इससे पहले भी अक्सर फार्मासिस्ट के सहारे ही अस्पताल का संचालन होता है।
ओपीडी बंद, नहीं दिखे मरीज
सीएचसी जहांगीरगंज
इमरजेंसी में चिकित्सक डॉ. केके शर्मा व फार्मासिस्ट सतीशचंद्र मिश्र तो मौजूद थे, लेकिन यहां पूरी तरह सन्नाटा पसरा था। एक भी मरीज मौके पर नहीं मिला। ओपीडी पूरी तरह से बंद मिली। चिकित्सक ने बताया कि जो भी मरीज आता है, उसका बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है। हालांकि अस्पताल के बाहर मिले तीमारदार राजेंद्र व मजलूम ने कहा कि विलंब से चिकित्सकों का अस्पताल में आना व समय से पहले चले जाना आम बात हो गई है। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदारों से की भी गई, लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा सकी है।
पसरा रहा सन्नाटा
सीएचसी नगपुर
दोपहर एक बजे जब टीम अस्पताल पहुंची तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। इमरजेंसी में डॉ. किरीशचंद्र यादव व फार्मासिस्ट गुलाब गौतम मौजूद थे। चिकित्सक ने बताया कि दो मरीजों का इलाज हुआ है। इसमें कल्याणपुर निवासी रुचि पुत्री बाबराम व करीमपुर के वीरेंद्र कुमार शामिल रहेु। हालांकि परिसर में सफाई का अभाव दिखा। चिकित्सक के अनुसार नियमित सफाई की जाती है।
नहीं मिला एक भी मरीज
सीएचसी भीटी
सीएचसी में जब टीम पहुंची तो सीएम जन आरोग्य मेले का आयोजन तो होता मिला, लेकिन मरीज एक भी नहीं दिखा। पूरी तरह से सन्नाटे का माहौल था। हालांकि कागज पर 52 मरीजों का इलाज दिखाया गया था। इसमें एलोपैथ के 27, आयुर्वेद के 12 व होमियोपैथ के 13 मरीज शामिल रहे। सीएचसी प्रभारी डॉ. ओमप्रकाश मिश्र ने बताया कि मेले में आने वाले मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज किया गया।
जिम्मेदारों को दिए गए निर्देश
अवकाश के दिनों में सीएचसी व पीएचसी पर आने वाले मरीजों का इलाज सुचारु रूप से हो, इसके लिए जिम्मेदारों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। दिशा-निर्देशों का पालन भी हो रहा है।
डॉ. श्रीकांत शर्मा, सीएमओ