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किसानों की आवाज दबाना चाहती है सरकार
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अंबेडकरनगर जिला मुख्यालय पर अधिकारी को ज्ञापन देने जाते भाकियू कार्यकर्ता।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट के निकट धरना दिया। इस दौरान उन्होेंने कहा कि केंद्र सरकार किसान आंदोलन को बदनाम कर उनकी आवाज को दबाना चाहती है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृषि कानूनों को वापस लेना ही होगा। कहा कि 18 फरवरी को कलेक्ट्रेट के निकट अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। यह तब तक जारी रहेगा, जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे।
जिलाध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि किसान अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनकी आवाज को केंद्र व प्रदेश सरकारें मिलकर दबाना चाहती हैं। इसके लिए किसानों के आंदोलन को विभिन्न प्रकार से बदनाम किया जा रहा है। किसान किसी का बंधुआ मजदूर नहीं बनना चाहता है। जो कृषि कानून लाए गए हैं, उससे किसान पूंजीपतियों के हाथों बंधुआ मजदूर बन जाएंगे। खेतों में खून पसीना बहाकर फसल तैयार करेगा किसान, लेकिन उसका दाम तय करेंगे पूंजीपति। यह कतई बर्दाश्त नहीं होगा।
वक्ताओं ने कहा कि यह देश कृषि प्रधान है। जब अन्नदाता ही खुश नहीं रहेगा, तो देश में खुशहाली कैसे आ सकेगी। किसानों व देश के हित को देखते हुए केंद्र सरकार को अपनी जिद छोड़नी होगी और कृषि कानून को वापस लेना होगा। तय किया गया कि कृषि कानून वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान अपने कदम पीछे नहीं हटाएंगे।
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किसानों सेे आह्वान किया कि वे कृषि कानून के विरोध में 18 फरवरी से कलेक्ट्रेट के निकट शुरू हो रहे अनिश्चितकालीन धरने में शामिल हों। कहा गया कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे, तब तक धरना जारी रहेगा। बाद में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया। इस मौके पर मुकेश, लल्लू, महमूद खां, मस्तराम, त्रिभुवन, मोहनलाल, रामकेवल, वीरेंद्र, रामबहाल आदि मौजूद रहे।
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जिलाध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि किसान अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनकी आवाज को केंद्र व प्रदेश सरकारें मिलकर दबाना चाहती हैं। इसके लिए किसानों के आंदोलन को विभिन्न प्रकार से बदनाम किया जा रहा है। किसान किसी का बंधुआ मजदूर नहीं बनना चाहता है। जो कृषि कानून लाए गए हैं, उससे किसान पूंजीपतियों के हाथों बंधुआ मजदूर बन जाएंगे। खेतों में खून पसीना बहाकर फसल तैयार करेगा किसान, लेकिन उसका दाम तय करेंगे पूंजीपति। यह कतई बर्दाश्त नहीं होगा।
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वक्ताओं ने कहा कि यह देश कृषि प्रधान है। जब अन्नदाता ही खुश नहीं रहेगा, तो देश में खुशहाली कैसे आ सकेगी। किसानों व देश के हित को देखते हुए केंद्र सरकार को अपनी जिद छोड़नी होगी और कृषि कानून को वापस लेना होगा। तय किया गया कि कृषि कानून वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान अपने कदम पीछे नहीं हटाएंगे।
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किसानों सेे आह्वान किया कि वे कृषि कानून के विरोध में 18 फरवरी से कलेक्ट्रेट के निकट शुरू हो रहे अनिश्चितकालीन धरने में शामिल हों। कहा गया कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे, तब तक धरना जारी रहेगा। बाद में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया। इस मौके पर मुकेश, लल्लू, महमूद खां, मस्तराम, त्रिभुवन, मोहनलाल, रामकेवल, वीरेंद्र, रामबहाल आदि मौजूद रहे।