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Ambedkar Nagar News: हमारे जीवन के हर पहलू में मौजूद भगवान
Tue, 09 Dec 2025 11:01 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 09 Dec 2025 11:01 PM IST
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अंबेडकरनगर। कटेहरी के शुकुल पट्टी में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। प्रवाचक आचार्य स्वामी घराचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण का जन्म और उनके बाल्यकाल की लीलाएं केवल मनोरंजन के लिए नहीं हैं। ये जीवन के मूल्यों, नैतिकता और भक्ति का संदेश देती हैं।
भगवान हमारे जीवन के हर पहलू में मौजूद हैं। जब हमारी वृत्ति भगवान में स्थिर होगी, तो संसार के मोह और भ्रम स्वयं कम हो जाएंगे। संसार में भगवान का अस्तित्व आकाश और बादल की तरह है। आकाश में जैसे बादल होते हैं और बादल गायब होने पर भी आकाश समाप्त नहीं होता, उसी तरह संसार के विनाश के बाद भी परमात्मा का अस्तित्व हमेशा बना रहता है। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है। चाहे वह जीव हो, निर्जीव हो, जल हो या पृथ्वी सबमें भगवान का ही स्वरूप समाहित है। प्रवाचक ने बताया कि परमात्मा संसार से जुड़े हुए हैं, लेकिन वे संसार से स्वतंत्र भी हैं। यही जीवन की सबसे बड़ी सीख है। भक्ति केवल पूजा या मंत्र पढ़ने तक सीमित नहीं है। जीवन में धर्म, सत्य, दया और सहिष्णुता के मार्ग पर चलकर ही वास्तविक भक्ति पूरी होती है। इस दौरान हृदय नारायण शुक्ला, ललित मोहन शुक्ला, मदन मोहन, नरसिंह नारायण, अनुरोध शुक्ला, कपिलदेव तिवारी व अन्य उपस्थित रहे।
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भगवान हमारे जीवन के हर पहलू में मौजूद हैं। जब हमारी वृत्ति भगवान में स्थिर होगी, तो संसार के मोह और भ्रम स्वयं कम हो जाएंगे। संसार में भगवान का अस्तित्व आकाश और बादल की तरह है। आकाश में जैसे बादल होते हैं और बादल गायब होने पर भी आकाश समाप्त नहीं होता, उसी तरह संसार के विनाश के बाद भी परमात्मा का अस्तित्व हमेशा बना रहता है। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है। चाहे वह जीव हो, निर्जीव हो, जल हो या पृथ्वी सबमें भगवान का ही स्वरूप समाहित है। प्रवाचक ने बताया कि परमात्मा संसार से जुड़े हुए हैं, लेकिन वे संसार से स्वतंत्र भी हैं। यही जीवन की सबसे बड़ी सीख है। भक्ति केवल पूजा या मंत्र पढ़ने तक सीमित नहीं है। जीवन में धर्म, सत्य, दया और सहिष्णुता के मार्ग पर चलकर ही वास्तविक भक्ति पूरी होती है। इस दौरान हृदय नारायण शुक्ला, ललित मोहन शुक्ला, मदन मोहन, नरसिंह नारायण, अनुरोध शुक्ला, कपिलदेव तिवारी व अन्य उपस्थित रहे।
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