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आरक्षण ने ब्लॉकों में दिग्गजों में जगाई वापसी की उम्मीद
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फोटो 12, अंबेडकरनगर के जिला पंचायत कार्यालय में आरक्षण सूची देखते नागरिक।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। जिले के नौ ब्लॉक प्रमुख के चुनाव के लिए घोषित हुए आरक्षण ने कई ब्लॉकों में दिग्गजों की फिर से वापसी की राह आसान कर दी है। ऐसे तमाम दिग्गज स्वयं या फिर अपने परिवारीजनों को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी में हैं। हालांकि, इसके साथ ही आरक्षण क्रम ने तमाम दिग्गजों की उम्मीदों पर पानी फेरने का भी काम किया है।
जिले में नौ ब्लॉक प्रमुखों के लिए चुनाव को लेकर मंगलवार देर शाम जारी हुई आरक्षण सूची ने तमाम दिग्गजों की बाछें खिला दी हैं। प्रमुख पद के लिए पिछले चुनाव में भी लगभग सभी ब्लाकों में रोचक संघर्ष देखने को मिला था। कई दिग्गज ऐसे थे जो खुद चुनाव नहीं लड़ पाए, लेकिन अपने करीबियों को विजयी बनाने में सफल रहे। इस बार ऐसे दिग्गजों ने आरक्षण सूची पर निगाह जमा रखी थी। सूची सार्वजनिक हुई तो उनकी उम्मीदें परवान चढ़ गईं। इसके चलते अलग अलग ब्लाकों में दिग्गजों को फिर से वापसी करने की राह दिखाई पडने लगी। इसमें भीटी ब्लॉक का स्थान सबसे पहले आता है।
यहां 1983 में भीटी के राजा उदयप्रताप सिंह को पराजित कर अंबिका सिंह पहली बार ब्लॉक प्रमुख बने थे। वे 1988 में दोबारा प्रमुख चुने गए। वर्ष 1996 में उनके पुत्र अनिल सिंह ब्लॉक प्रमुख बनने में सफल रहे। 2001 में वे बसपा नेता सुभाष सिंह के हाथों पराजित हो गए। वर्ष 5006 में आरक्षण के चलते अनिल सिंह की देखरेख में धर्मराजी ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुईं। 2011 में एक बार फिर से अनिल सिंह ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए। 2016 में आरक्षण के चलते अनिल सिंह खुद तो नहीं लड़ पाए, लेकिन अपने करीबी शिवप्रसाद यादव को ब्लॉक प्रमुख बनवाने में कामयाब रहे। अब यह सीट अनारक्षित हो गई है। परिवार से जुड़े वरिष्ठ सपा नेता मलखान सिंह ने बताया कि परिवार की बहू पूजा को ब्लाक प्रमुख बनाने के मैदान में उतारा जाएगा। ऐसे में साफ है कि इस सीट पर एक बार फिर से अनिल सिंह का परिवार वापसी करने को लेकर उत्सुक्त है।
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उधर बसखारी ब्लॉक प्रमुख की सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के चलते पूर्व एमएलसी विशाल वर्मा व उनके परिवारीजनों की उम्मीद बढ़ गई है। दरअसल इस सीट से पहले विशाल के भाई विजय वर्मा ब्लॉक प्रमुख रह चुके हें। बीते चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई थी।
इस बार पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के चलते फिर से परिवार के ही किसी सदस्य के मैदान में उतरने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। जहांगीरगंज ब्लॉक प्रमुख रहे अरविंद सिंह को नए आरक्षण क्रम ने संजीवनी प्रदान की है। एक बार स्वयं अरविंद सिंह तथा एक बार उनकी पत्नी प्रभा सिंह प्रमुख रह चुकी हैं। वर्ष 2010 में अनुसूचित सीट पर अरविंद सिंह अपनी करीबी विनीता कन्नौजिया को ब्लॉक प्रमुख बनवाने में सफल रहे थे। अब सामान्य सीट होने के चलते अरविंद सिंह के फिर से मैदान में उतरने की संभावना बढ़ गई है। उधर कटेहरी के ब्लाक प्रमुख अजय सिंह सिपाही समेत कई अन्य ब्लाकों के प्रमुखों को नए आरक्षण क्रम ने निराश भी किया है।
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जिले में नौ ब्लॉक प्रमुखों के लिए चुनाव को लेकर मंगलवार देर शाम जारी हुई आरक्षण सूची ने तमाम दिग्गजों की बाछें खिला दी हैं। प्रमुख पद के लिए पिछले चुनाव में भी लगभग सभी ब्लाकों में रोचक संघर्ष देखने को मिला था। कई दिग्गज ऐसे थे जो खुद चुनाव नहीं लड़ पाए, लेकिन अपने करीबियों को विजयी बनाने में सफल रहे। इस बार ऐसे दिग्गजों ने आरक्षण सूची पर निगाह जमा रखी थी। सूची सार्वजनिक हुई तो उनकी उम्मीदें परवान चढ़ गईं। इसके चलते अलग अलग ब्लाकों में दिग्गजों को फिर से वापसी करने की राह दिखाई पडने लगी। इसमें भीटी ब्लॉक का स्थान सबसे पहले आता है।
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यहां 1983 में भीटी के राजा उदयप्रताप सिंह को पराजित कर अंबिका सिंह पहली बार ब्लॉक प्रमुख बने थे। वे 1988 में दोबारा प्रमुख चुने गए। वर्ष 1996 में उनके पुत्र अनिल सिंह ब्लॉक प्रमुख बनने में सफल रहे। 2001 में वे बसपा नेता सुभाष सिंह के हाथों पराजित हो गए। वर्ष 5006 में आरक्षण के चलते अनिल सिंह की देखरेख में धर्मराजी ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुईं। 2011 में एक बार फिर से अनिल सिंह ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए। 2016 में आरक्षण के चलते अनिल सिंह खुद तो नहीं लड़ पाए, लेकिन अपने करीबी शिवप्रसाद यादव को ब्लॉक प्रमुख बनवाने में कामयाब रहे। अब यह सीट अनारक्षित हो गई है। परिवार से जुड़े वरिष्ठ सपा नेता मलखान सिंह ने बताया कि परिवार की बहू पूजा को ब्लाक प्रमुख बनाने के मैदान में उतारा जाएगा। ऐसे में साफ है कि इस सीट पर एक बार फिर से अनिल सिंह का परिवार वापसी करने को लेकर उत्सुक्त है।
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उधर बसखारी ब्लॉक प्रमुख की सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के चलते पूर्व एमएलसी विशाल वर्मा व उनके परिवारीजनों की उम्मीद बढ़ गई है। दरअसल इस सीट से पहले विशाल के भाई विजय वर्मा ब्लॉक प्रमुख रह चुके हें। बीते चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई थी।
इस बार पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के चलते फिर से परिवार के ही किसी सदस्य के मैदान में उतरने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। जहांगीरगंज ब्लॉक प्रमुख रहे अरविंद सिंह को नए आरक्षण क्रम ने संजीवनी प्रदान की है। एक बार स्वयं अरविंद सिंह तथा एक बार उनकी पत्नी प्रभा सिंह प्रमुख रह चुकी हैं। वर्ष 2010 में अनुसूचित सीट पर अरविंद सिंह अपनी करीबी विनीता कन्नौजिया को ब्लॉक प्रमुख बनवाने में सफल रहे थे। अब सामान्य सीट होने के चलते अरविंद सिंह के फिर से मैदान में उतरने की संभावना बढ़ गई है। उधर कटेहरी के ब्लाक प्रमुख अजय सिंह सिपाही समेत कई अन्य ब्लाकों के प्रमुखों को नए आरक्षण क्रम ने निराश भी किया है।