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जिला अस्पताल में दवाओं का संकट, मरीज परेशान
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अंबेडकरनगर। 200 बेड वाला जिला अस्पताल महज 100 बेड के हिसाब से मिलने वाली दवाओं के भरोसे चल रहा है। इससे प्रत्येक तीन माह के लिए मिलने वाली तमाम दवा महज एक महीने में ही खत्म हो जा रही है। इसके चलते चिकित्सकों को बाहर से दवाएं लिखने पड़ती हैं। जरूरी दवाओं की बात तो दूर, डीएनएस बोतल तक का संकट जिला अस्पताल में अक्सर उत्पन्न होता रहा है। पिछले दिनों ही इमरजेंसी में लखनऊ वाहन भेजकर डीएनएस बोतल मंगानी पड़ी। मौजूदा समय में भी जिला अस्पताल दवाओं के संकट से जूझ रहा है, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को समुचित उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ देने के लिए शासन भले ही तमाम दावे कर रहा हो, लेकिन जिला अस्पताल में इसका पोल खुलती नजर आ रही है। लगभग 24 लाख की आबादी वाले जिले को बेहतर इलाज की सुविधा देने के लिए स्थापित जिला अस्पताल मौजूदा समय में दवाओं के संकट से जूझ रहा है।
जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार शासन ने भले ही जिला अस्पताल को 200 बेड की हरी झंडी दे दी है, लेकिन यहां दवाएं महज 100 बेड के मरीजों के हिसाब से ही दी जा रही हैं। इसके चलते हालत यह है कि तीन माह के लिए एक साथ मिलने वाली दवाओं में से कई दवाएं महज एक महीने में ही खत्म हो जा रही हैं। इससे जिला अस्पताल प्रशासन को मरीजों को समुचित दवाएं उपलब्ध करा पाने में काफी मुश्किल हो रही है। अक्सर चिकित्सकों को बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत भी सामने आती रहती है।
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जिला अस्पताल प्रशासन के कई बार पत्राचार के बावजूद अब तक दवाओं की मात्रा नहीं बढ़ायी जा रही है। जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक प्रतिदिन करीब 170 से 180 मरीज भर्ती होते हैं। ऐसे में जब उन्हें समुचित दवाइयां नहीं उपलब्ध होंगी तो वह कैसे मरीजों को उपलब्ध कराएंगे। मौजूदा समय में भी जिला अस्पताल में सर्जिकल सामानों के साथ ही दवाओं का बड़ा संकट है।
एमडी को दिलानी पड़ी दवा
बीते दिनों जिला अस्पताल में बढ़ी दवाओं के संकट की समस्या जिला अस्पताल प्रशासन को दवा आपूर्ति करने वाले कॉर्पोरेशन के एमडी तक पहुंचानी पड़ी। जिले में बने स्टोर में दवाएं खत्म होने की जानकारी मिलने पर 14 जून को एमडी ने जिला अस्पताल टीम को लखनऊ बुलवाया। इसके बाद सीधे वहां से 60 पेटी डीएनएस बोतल, 270 वायल एंटीरैबीज इंजेक्शन, 19 हजार वायल एंटी बायोटिक दवा उपलब्ध कराई गई।
डिप्टी सीएम के समक्ष रखेंगे बात
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में दवाओं का संकट लंबे समय से चल रहा है। इस समस्या को स्टाफ सोमवार को जनपद में पहुंच रहे डिप्टी सीएम/स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के समक्ष रखेगा। कहा कि कई बार निदेशालय से पत्राचार किया गया, लेकिन दवाओं का स्टॉक बढ़ाया नहीं जा रहा है। इससे एक तरफ जहां जिले के मरीजों को समुचित दवाइयां नहीं उपलब्ध हो रही हैं, वहीं अस्पताल से दवाएं न मिलने पर मरीज व तीमारदार हंगामा करते रहते हैं। इसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है।
निदेशालय को लिखा पत्र
जिला अस्पताल में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। प्रतिदिन करीब 200 मरीज भर्ती होते हैं, जबकि जिला अस्पताल को महज 100 बेड के हिसाब से ही प्रति माह दवाएं उपलब्ध हो रही हैं। निदेशालय को इस बाबत पत्र लिखा गया है।
डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को समुचित उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ देने के लिए शासन भले ही तमाम दावे कर रहा हो, लेकिन जिला अस्पताल में इसका पोल खुलती नजर आ रही है। लगभग 24 लाख की आबादी वाले जिले को बेहतर इलाज की सुविधा देने के लिए स्थापित जिला अस्पताल मौजूदा समय में दवाओं के संकट से जूझ रहा है।
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जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार शासन ने भले ही जिला अस्पताल को 200 बेड की हरी झंडी दे दी है, लेकिन यहां दवाएं महज 100 बेड के मरीजों के हिसाब से ही दी जा रही हैं। इसके चलते हालत यह है कि तीन माह के लिए एक साथ मिलने वाली दवाओं में से कई दवाएं महज एक महीने में ही खत्म हो जा रही हैं। इससे जिला अस्पताल प्रशासन को मरीजों को समुचित दवाएं उपलब्ध करा पाने में काफी मुश्किल हो रही है। अक्सर चिकित्सकों को बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत भी सामने आती रहती है।
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जिला अस्पताल प्रशासन के कई बार पत्राचार के बावजूद अब तक दवाओं की मात्रा नहीं बढ़ायी जा रही है। जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक प्रतिदिन करीब 170 से 180 मरीज भर्ती होते हैं। ऐसे में जब उन्हें समुचित दवाइयां नहीं उपलब्ध होंगी तो वह कैसे मरीजों को उपलब्ध कराएंगे। मौजूदा समय में भी जिला अस्पताल में सर्जिकल सामानों के साथ ही दवाओं का बड़ा संकट है।
एमडी को दिलानी पड़ी दवा
बीते दिनों जिला अस्पताल में बढ़ी दवाओं के संकट की समस्या जिला अस्पताल प्रशासन को दवा आपूर्ति करने वाले कॉर्पोरेशन के एमडी तक पहुंचानी पड़ी। जिले में बने स्टोर में दवाएं खत्म होने की जानकारी मिलने पर 14 जून को एमडी ने जिला अस्पताल टीम को लखनऊ बुलवाया। इसके बाद सीधे वहां से 60 पेटी डीएनएस बोतल, 270 वायल एंटीरैबीज इंजेक्शन, 19 हजार वायल एंटी बायोटिक दवा उपलब्ध कराई गई।
डिप्टी सीएम के समक्ष रखेंगे बात
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में दवाओं का संकट लंबे समय से चल रहा है। इस समस्या को स्टाफ सोमवार को जनपद में पहुंच रहे डिप्टी सीएम/स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के समक्ष रखेगा। कहा कि कई बार निदेशालय से पत्राचार किया गया, लेकिन दवाओं का स्टॉक बढ़ाया नहीं जा रहा है। इससे एक तरफ जहां जिले के मरीजों को समुचित दवाइयां नहीं उपलब्ध हो रही हैं, वहीं अस्पताल से दवाएं न मिलने पर मरीज व तीमारदार हंगामा करते रहते हैं। इसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है।
निदेशालय को लिखा पत्र
जिला अस्पताल में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। प्रतिदिन करीब 200 मरीज भर्ती होते हैं, जबकि जिला अस्पताल को महज 100 बेड के हिसाब से ही प्रति माह दवाएं उपलब्ध हो रही हैं। निदेशालय को इस बाबत पत्र लिखा गया है।
डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल