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Ambedkar Nagar News: ड्रोन ने वंदना के जीवन में भरे रंग तो हौंसलों को लगे पंख
Sat, 13 Dec 2025 12:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 13 Dec 2025 12:09 AM IST
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कटेहरी में ड्रोन चलाती ड्रोन दीदी वंदना।
अंबेडकरनगर। कटेहरी के यरकी सुबेदारपुर निवासी वंदना पटेल ने महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया बदलने के साथ उदाहरण भी प्रस्तुत किया। पति की हार्ट अटैक और फिर बीमारी से सास की मौत के बाद अपने हौसले के बल पर दो बेटों सहित पूरे परिवार की जिम्मेदारी निभा अन्य महिलाओं को लिए प्रेरणा बनी हैं।
एमए उत्तीर्ण वंदना का विवाह वर्ष 2007 में यरकी सुबेदारपुर निवासी पवन वर्मा के साथ हुआ। छोटे बेटे के जन्म के चार साल बाद वर्ष 2019 में उनके पति की हार्ट अटैक में मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा थी। इससे अभी उबर नहीं पाईं थी कि सास लीलावती कैंसर से पीड़ित हो गई। इसके बाद भी उन्होंने हौसला नहीं हारा। 3.50 बीघा खेती को अपनी आय का स्रोत बनाया। इफको की मदद से वर्ष 2022 में उन्हें ड्रोन दीदी का खिताब मिला। अब गांव गांव जाकर ड्रोन से खेतों में कीटनाशक, नैनो यूरिया व डीएपी का छिड़काव कर साल में लाखों रुपये की आमदनी कर आत्मनिर्भर बन महिलाओं के लिए नजीर बन गई हैं।
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हर साल दो लाख की कर रही कमाई
अब हर साल 500 एकड़ खेत में नैनो यूरिया व नैनो डीएपी के साथ ही कीटनाशक का छिड़काव कर कर रही हैं। एक एकड़ में 400 रुपये के हिसाब से हर साल दो लाख की कमाई कर आत्मनिर्भर बन औरों के लिए मिसाल बनी है।
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गांव की महिलाओं को कर रहीं जागरूक
खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ ही गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए गांव में चौपाल लगाकर जागरूक करने में जुटी है। कृषि विभाग के अलावा अन्य विभाग की योजनाओं के साथ ही महिलाओं के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही लाभकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करने में जुटी हैं।
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एमए उत्तीर्ण वंदना का विवाह वर्ष 2007 में यरकी सुबेदारपुर निवासी पवन वर्मा के साथ हुआ। छोटे बेटे के जन्म के चार साल बाद वर्ष 2019 में उनके पति की हार्ट अटैक में मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा थी। इससे अभी उबर नहीं पाईं थी कि सास लीलावती कैंसर से पीड़ित हो गई। इसके बाद भी उन्होंने हौसला नहीं हारा। 3.50 बीघा खेती को अपनी आय का स्रोत बनाया। इफको की मदद से वर्ष 2022 में उन्हें ड्रोन दीदी का खिताब मिला। अब गांव गांव जाकर ड्रोन से खेतों में कीटनाशक, नैनो यूरिया व डीएपी का छिड़काव कर साल में लाखों रुपये की आमदनी कर आत्मनिर्भर बन महिलाओं के लिए नजीर बन गई हैं।
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हर साल दो लाख की कर रही कमाई
अब हर साल 500 एकड़ खेत में नैनो यूरिया व नैनो डीएपी के साथ ही कीटनाशक का छिड़काव कर कर रही हैं। एक एकड़ में 400 रुपये के हिसाब से हर साल दो लाख की कमाई कर आत्मनिर्भर बन औरों के लिए मिसाल बनी है।
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गांव की महिलाओं को कर रहीं जागरूक
खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ ही गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए गांव में चौपाल लगाकर जागरूक करने में जुटी है। कृषि विभाग के अलावा अन्य विभाग की योजनाओं के साथ ही महिलाओं के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही लाभकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करने में जुटी हैं।