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डीएपी तो कहीं एनपीके की किल्लत ने बढ़ाई मुश्किल
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कटेहरी। विकास खंड क्षेत्र में खाद न मिल पाने से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल इन दिनों रबी फसल सरसों, मटर, चना व आलू आदि की बुवाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इन फसलों की बुवाई के लिए डीएपी व एनपीके खाद की खास आवश्यकता होती है, लेकिन कई समितियों पर डीएपी या एनपीके खाद उपलब्ध न होने से किसानों को भटकना पड़ रहा है। इससे फसलों की रोपाई का कार्य प्रभावित हो रहा।
गौरतलब है कि रवी की विभिन्न फसलों की बुवाई के लिए किसानों ने कमर कस ली है। एक तरफ जहां आलू, सरसों, चना, मटर आदि फसलों की बुवाई कार्य तेजी से चल रहा है तो वहीं गेहूं व जौ आदि फसलों की खेत को तैयार करने का भी कार्य किसानों ने तेज कर दिया है। समस्या यह है कि मौजूदा समय में बुवाई जाने वाली फसलों आलू, चना, मटर व सरसों के लिए डीएपी व एनपीके खाद की सख्त जरूरत है, लेकिन क्षेत्र की सहकारी समितियों पर इन खादों की अनुपलब्धता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
क्षेत्र में कुल 11 समितियां स्थापित हैं। इनमें से कही डीएपी तो कहीं एनपीके खाद उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसान लगातार साधन सहकारी समितियों का चक्कर लगा रहे, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पा रही। इसके चलते ज्यादातर किसान निजी दुकानों से इन खादों को खरीदने के लिए विवश हैं, जहां निजी उर्वरक विक्रेताओं द्वारा ज्यादा पैसा लेकर किसानों को खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि तमाम किसान ऐसे भी हैं, जो डीएपी व एनपीके के स्थान पर यूरिया आदि डालकर फसलों की बुवाई का कार्य कर रहे। वहीं समितियों पर खाद उपलब्ध न होने पर किसानों ने नाराजगी भी प्रकट की।
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किसान विजय चौधरी, लालता प्रसाद, सुरेश कुमार व लालचंद आदि ने बताया कि डीएपी व एनपीके खाद समितियों पर उपलब्ध न होने से बुवाई का कार्य प्रभावित हो रहा है। किसानों के पास नकदी न होने की दशा में किसानों को फसली ऋण के तहत खाद समितियों से मिल जाता है। ऐसे में ज्यादातर किसानों का झुकाव समितियों की तरफ ज्यादा रहता है, लेकिन वहां भी खाद न होने से मुश्किलें ज्यादा बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि अभी यह हालत है तो गेहूं आदि की बुवाई के समय किसानों को कैसे खाद उपलब्ध हो पाएगी। किसानों ने शासन प्रशासन से अविलंब समितियों पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की।
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गौरतलब है कि रवी की विभिन्न फसलों की बुवाई के लिए किसानों ने कमर कस ली है। एक तरफ जहां आलू, सरसों, चना, मटर आदि फसलों की बुवाई कार्य तेजी से चल रहा है तो वहीं गेहूं व जौ आदि फसलों की खेत को तैयार करने का भी कार्य किसानों ने तेज कर दिया है। समस्या यह है कि मौजूदा समय में बुवाई जाने वाली फसलों आलू, चना, मटर व सरसों के लिए डीएपी व एनपीके खाद की सख्त जरूरत है, लेकिन क्षेत्र की सहकारी समितियों पर इन खादों की अनुपलब्धता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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क्षेत्र में कुल 11 समितियां स्थापित हैं। इनमें से कही डीएपी तो कहीं एनपीके खाद उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसान लगातार साधन सहकारी समितियों का चक्कर लगा रहे, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पा रही। इसके चलते ज्यादातर किसान निजी दुकानों से इन खादों को खरीदने के लिए विवश हैं, जहां निजी उर्वरक विक्रेताओं द्वारा ज्यादा पैसा लेकर किसानों को खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि तमाम किसान ऐसे भी हैं, जो डीएपी व एनपीके के स्थान पर यूरिया आदि डालकर फसलों की बुवाई का कार्य कर रहे। वहीं समितियों पर खाद उपलब्ध न होने पर किसानों ने नाराजगी भी प्रकट की।
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किसान विजय चौधरी, लालता प्रसाद, सुरेश कुमार व लालचंद आदि ने बताया कि डीएपी व एनपीके खाद समितियों पर उपलब्ध न होने से बुवाई का कार्य प्रभावित हो रहा है। किसानों के पास नकदी न होने की दशा में किसानों को फसली ऋण के तहत खाद समितियों से मिल जाता है। ऐसे में ज्यादातर किसानों का झुकाव समितियों की तरफ ज्यादा रहता है, लेकिन वहां भी खाद न होने से मुश्किलें ज्यादा बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि अभी यह हालत है तो गेहूं आदि की बुवाई के समय किसानों को कैसे खाद उपलब्ध हो पाएगी। किसानों ने शासन प्रशासन से अविलंब समितियों पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की।